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@dawriter

माँ की ममता बदल गई...

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रात के दो बज रहे थे पर रजनी की आँखों में नींद कहाँ। आज उसने पूनम दी का जो बदला हुआ रूप देखा उससे वह बहुत दुखी थी। उसे पूनम दी से ऐसे व्यवहार की ऐसी उम्मीद नहीं थी। पूनम दी रजनी की मौसेरी बहन हैं। अभी चार महीने पहले उन्होंने अपने बेटे की शादी की है मगर उस वक्त रजनी अपनी बेटियों के एग्जाम के वजह से शादी में आ न सकी।

बाद में मौका मिलते ही रजनी नव - दंपत्ति को शुभकामना देने निकल पड़ी। आज सुबह ही दिल्ली स्टेशन से पूनम दी के घर जाते समय रजनी बहुत उत्साहित थी। चार बेटियों व दो बेटों की माँ पूनम दी धैर्य व स्नेह की मूर्ति थी। पूरा परिवार ससुराल मायका व सभी रिशेतदार पूनम दी के सौम्य व मधुर व्यहवार के कायल थे। रजनी भी हर एक से उनकी तारीफ़ करते न थकती।

ऑटो से उतर बड़े उत्साह के साथ वह दी के गले लगती है। इत्तेफाक से चारों बेटियां भी ससुराल से आई हुई थी और बहू सुंदर सौम्य भारतीय झलक। सब बड़े प्यार और उत्साह से मिले। चाय की प्याली ख़त्म करते करते रजनी माहौल में फैले हुए तनाव को समझ चुकी थी और उसे यह समझते भी देर न लगी कि इसकी वजह नई नवेली दुल्हन है।

दोपहर के खाने तक यह बात रजनी के जेहन में उतर चुकी थी की नई बहू का कोई काम उन्हें पसंद नहीं आ रहा है। कभी उसकी बनाई चाय कभी उसकी बनाई रोटियां और कभी उसका खाना परोसने का तरीका। दी के साथ ही उनकी बेटियां भी दबी ज़बान में असंतोष व्यक्त कर रही थी। रात में खाने की टेबल पर तो पूनम दी अपना आपा ही खो बैठी जब बहू की बनाई मीठी खीर से उनका मुह कड़वा हो गया और बहू पर बुरी तरह से चीख़ पड़ी।

रजनी का मन इस अप्रिय स्थिति से डिस्टर्ब हो गया था। बिस्तर पर करवटे बदलते हुए रजनी यही सोच रही थी की ममतामयी पूनम दी एक बहू के आने से इतनी कर्कश कैसे हो गयी? बेटियों की बनाई कच्ची पक्की चीज़े ख़ुशी- ख़ुशी खाने वाली पूनम दी बहू की बनाई एक कप चाय में भी चाय, चीनी, अदरक की भी अलग अलग विवेचना कर रही हैं। छह बच्चों की माँ एक बहू की माँ क्यों नही बन पा रही है? क्यों बहू के हर काम को वे एक आलोचक की तरह देख रही है? पूनम दी के व्यवहार की परिपक्वता और मधुरता कहाँ खो गयी। क्या आप बता सकते हैं??

Image Source: jagotv



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