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@dawriter

बेटे का दर्द

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पूरा घर दुल्हन की आगमन की तैयारी में दुल्हन सा सजा हुआ था। स्मिता और अर्पिता दोनों अपनी एकलौती भाभी के आगमन का बेसब्री से इन्तेजार कर रही थीं। रोहन दोनों बहनों का इकलौता भाई था। स्मिता रोहन से बड़ी और अर्पिता छोटी थी। दोनों की शादी हो चुकी थी और दोनों अपने-अपने परिवार में बहुत खुश थीं और इन तीनों की माँ सविता जी,जिनकी जिंदगी उनके बच्चों के ही इर्द गिर्द घूमती थी। आज उनकी सारी जिम्मेदारियां पूरी हो गयी थीं,आरती की थाल लिए वो अपनी बहू शिखा इन्तेजार कर रही थीं। तभी रोहन और शिखा की कार दरवाजे पर आकर रुकती है। गुड़िया जैसी बहू को देखकर सविता जी,स्मिता और अर्पिता फूले नहीं समा रही थीं।

शादी के कुछ दिनों बाद शिखा और रोहन अपने हनीमून पर चले जाते हैं और स्मिता,अर्पिता अपने-अपने घर। शिखा के वापस आने के बाद सविता जी के घर की रौनक वापस लौट आती है। रोहन का अपना खुद का बिज़नेस था और उसके पिता रिटायर हो चुके थे। घर में किसी चीज की कमी नहीं थी। रोहन बहुत अच्छा इंसान था,हर रिश्ते को प्यार और सम्मान देता था। शिखा भी बहुत प्यारी और समझदार थी।

इंसान की आदत होती है,जब तक कोई चीज उसे मिलती नहीं तब तक उसकी बहुत कदर होती है पर जिस दिन वो चीज उसको मिल जाती है उसकी क़द्र कम हो जाती है। सविता जी और शिखा के रिश्तों में वही ठंडापन आ गया था। सविता जी हर बात पर शिखा की तुलना अपनी बेटियों से करती थीं। रोहन उनका बहुत दुलारा था,उसके दोस्त उसे मम्मा'ज बॉय कह कर चिढ़ाते थे। हर चीज के लिए माँ के आगे पीछे घूमने वाले रोहन की जिंदगी में शिखा आ चुकी थी,जाहिर सी बात थी,अपना काम और नई-नई शादी के बीच वो माँ को उतना समय नहीं दे पाता था। रोहन के इस बदले व्यवहार ने सविता जी के मन में असुरक्षा की भावना पैदा कर दी थी जिसका असर उनके और शिखा के रिश्ते पर पड़ रहा था। शिखा अभी खुद 21 साल की लड़कीं थी,सास के स्वभाव में हो रहे परिवर्तन की वजह समझने की परिपक्वता नहीं थी उसमें।

अर्पिता उसी शहर में रहती थी तो अक्सर घर पे आ जाती थी। शुरू-शुरू में उसके और शिखा में बहुत बनती थी लेकिन धीरे-धीरे वो भी उससे दूर होने लगी। जो माँ अक्सर उदास और चुपचाप पड़ी रहती थीं,वो अर्पिता के आने पर बिल्कुल बदल जाती थीं। हर समय उसके आगे-पीछे घूमतीं,उसकी पसंद का खाना बनातीं,उसके साथ खूब हँसती बोलतीं। यह सब देख शिखा को अपनी माँ की बहुत याद आती। शिखा बहुत कोशिश करती थी कि माँ उसके साथ भी खूब खुश रहें लेकिन सविता जी ने उसे अपने बेटे को उनसे  दूर करने का कारण मान लिया था।

साल बीत रहे थे,दोनों के मन में सास और बहू से इतर प्रतिद्वंदी का रिश्ता जन्म ले रहा था। इस बीच शिखा भी एक बेटे की माँ बन चुकी थी। शिखा के बेटा होने पर सविता जी ने खुश होकर कहा था,अच्छा हुआ बेटी नहीं हुई अब समझेगी मेरा कष्ट जब खुद की बहू आएगी। शिखा ने भी सबकुछ ठीक करने की कोशिश बन्द कर दी थी उसने भी ये मान लिया था कि सास कभी माँ नहीं बन सकती हालांकि उसे स्मिता और अपने ससुर से कोई शिकायत नहीं थी। लेकिन इस माहौल से सबसे ज्यादा परेशान रोहन था। उसके लिए माँ का बदलता रूप बहुत परेशान करने वाला था। जो माँ उसके बच्चे को वही स्नेह देतीं थीं जो कभी उसे मिला था,जिस माँ ने अपनी अध्यापिका की नौकरी छोड़ पूरा जीवन अपने बच्चों के लिए समर्पित कर दिया वही माँ आज उससे विमुख होती जा रही थीं। अर्पिता, स्मिता पर भरपूर वात्सल्य लुटाने वाली माँ उससे ठीक से बात भी नहीं करती थीं। वो कभी माँ से पूछता,,आपको कुछ चाहिए तो वो कह देतीं,नहीं मुझे तुमसे कुछ नहीं चाहिए। उसकी लायी हुई चीजें उन्हें पसंद नहीं आती थीं। स्मिता और अर्पिता की दी हर चीज की तारीफ करने वाली माँ रोहन के दिये हुए तोहफों में हमेशा कमी निकाल देती थीं। इस सबसे रोहन टूटता जा रहा था वो कुछ कहता नहीं था पर अंदर ही अंदर बहुत परेशान था। जब शिखा को माँ की बातों का बुरा लगता तो वो भी रोहन से ही कहती,उसके लिए माँ का बदला रूप अविश्वसनीय था।

सविता जी रोज सुबह टहलने जाती थीं,एक रोज पार्क में एक कुत्ते ने उन्हें दौड़ा दिया जिससे डगमगा कर वो गिर गईं। उनके कूल्हे की हड्डी टूट गयी थी। ऑपरेेशन के बाद हड्डी तो जुड़ गई लेकिन डॉक्टर ने उनका बहुत खयाल रखने को कहा था। सविता जी के तीनों बच्चे और शिखा उनकी सेवा में लगे रहते थे। कुछ दिनों बाद अर्पिता और स्मिता जाने लगीं। सविता जी ने उन दोनों से कहा तुम दोनों के जाने के बाद मेरा क्या होगा,तब स्मिता ने कहा,"ऐसे क्यों कहा रही हो माँ"?रोहन और शिखा तो तुम्हारा कितना ख्याल रखते हैं। रोहन तो बहुत परेशान रहता है तुम्हारे लिए,जब तक तुम्हारा ऑपरेशन चल रहा था वो भगवान की मूर्ति के सामने बैठा रहा। तुम्हारी दवाई से लेकर खाने-पीने हर चीज का बहुत ध्यान रखता है। पता नहीं आपको उन दोनों का किया क्यों नहीं दिखता!!

सविता जी ने कहा,"ये सब तुम लोगों को दिखाने के लिए होता है। तुम दोनों के जाने के बाद दोनों मियां-बीवी खुद में व्यस्त हो जाएंगे। "तब अर्पिता बोली नहीं माँ ऐसा नहीं है। हमलोग ही उनदोनो के लिए गलत सोचते थे,वो दोनो आपसे बहुत प्यार करते हैं।

सच ही है अगर कोई इंसान अपनी आंखों पर पट्टी ही बांध लें तो उसे सही गलत नहीं दिखाई देता। जो भी सविता जी से मिलने आता वो उनसे अपनी बेटियों की ही तारीफ करतीं,,सबसे कहतीं,उन्हीं की सेवा से वो बच गयीं,यह सब सुन शिखा को बहुत दुख होता पर रोहन उसे समझा देता,अभी माँ की तबियत ठीक नहीं है। वो जो कह रही हैं,जो भी सोच रही हैं उसपर ध्यान मत दो। रोहन थोड़ी-थोड़ी देर पर माँ के कमरे में जाता था। उनको दवाई देना फल खिलाना,सबकुछ खुद ही करता था।

एक दिन सविता जी को बुखार हो गया था,रोहन पूरी रात माँ के सिरहाने बैठा रहा,सुबह जब सविता जी को थोड़ा आराम मिला तो उन्हें  रोहन को अपने पास देख बहुत खुशी हुई। बहुत सालों बाद उन्होंने रोहन को अपने गले लगा कर उसका माथा चूमा। इतने दिनों बाद माँ से मिले प्यार से वह अभिभूत हो गया,उसके आँसू बहने लगे। वो कहने लगा,कहाँ खो गयीं थी माँ आप?क्यों मुझे खुद से दूर कर दिया था?सविता जी बोलीं,"मैं कहाँ गयी थी रोहन,,तू ही अपनी बीवी के पल्लू से बंध गया था। तुझे माँ को देखने की फुरसत ही नहीं थी। रोहन कहने लगा,आपको ऐसा क्यों लगता था माँ!!मैं नहीं जानता,हो सकता है मुझसे ही कोई गलती हो गयी हो। पर माँ शिखा भी तो अपना घर छोड़कर एक अनजान घर में आई थी। आपको याद है,जब स्मिता दी की शादी हुई थी,जीजाजी उनको बिल्कुल समय नहीं देते थे,तब आपको कितना बुरा लगता था। आप कहती थीं,एक औरत के लिए पति का साथ बहुत जरूरी होता है। आपने ही तो मुझे बचपन से सिखाया था,हमेशा लड़कियों की इज्जत करना,अपनी जिम्मेदारियों का सदैव पूरे मन से निर्वाह करना। शादी के बाद जब अर्पिता आपको फ़ोन नहीं कर पाती थी,तब आप ही पापा से कहतीं कि नई शादी की नई जिम्मेदारियां हैं उस पर,वही जिम्मेदारियां तो मुझ पर भी थीं माँ!शिखा की लायी हर चीज आपको खराब लगती थीं,पर साल भर में अर्पिता अगर एक भी साड़ी ले आये तो आप उसकी तारीफ करते नहीं थकती थीं। उन दोनों के फोन पर हाल-चाल ले लेने से ही आप बहुत खुश हो जाती थीं लेकिन शिखा से  कभी खुश नहीं होती थीं। उसे भी तो इस घर में आपका प्यार चाहिए था।

"तो तू  अपनी बीवी के भड़काने पर मुझसे दूर हो गया था और आज भी उसकी तरफदारी करने आया है। "

"नहीं माँ उसने कभी मुझे आपके खिलाफ नहीं भड़काया। लेकिन मैंने आपकी बेरुखी से उदास उसका चेहरा देखा है। मैंने इतने साल से आपकी नाराजगी खुद भी झेली है,मैं ये सब देख कर कितना टूटा हूँ आपको नहीं बता सकता,लेकिन अब आपकी नाराजगी नहीं झेल सकता। मुझे मेरी गलतियों पर डाँटने वाली,फिर थोड़ी देर बाद ही मेरी पसन्द का खाना खिलाने वाली मेरी अपनी माँ चाहिए। "

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Image Source:bestmediainfo



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