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@dawriter

बिखरते रिश्ते

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rajmati777 by  
rajmati777

स्वाति आज सतीश से बोली,"सुनते हो, आज अप्सरा में गोलमाल लगी है,चलो फिल्म देखने चलते हैं।" "अरे स्वाति मुझे कहा वक्त है,इन सबका, तुम ही चली जाना।"

स्वाति उदास हो गई। वह अपने कार्य में व्यस्त हो गई। सतीश का व्यवहार आज कल उसे कुछ बदला हुआ सा लग रहा था। मन में सोचा शायद आंफिस  में ज्यादा काम होगा। रात को आकर सतीश न उससे बात करता न ही घर के बारे में पूछता। और सो जाता। एक दिन स्वाति की तबीयत ठीक नहीं थी, वो जल्दी ही सो गई। रात को अचानक स्वाति की नींद खुली तो देख‌ आश्चर्य में पड़ गई। अरे ये क्या, सतीश ये किससे रात में लेपटॉप पर चैटिंग कर रहा है।

पर उसने धीरे से करवट बदली और सोने का बहाना कर अधखुली आंखों से सब संदेश को पढ़ने लगी। सच्चाई का पता चलने पर दिल उसका रोने लगा। मैं तो इनका इतना ख्याल रखती हूं और ये अलग ही दुनिया में मस्त हैं। ये कैसा रिश्ता है।

बड़े संयम से वो समय बीताने लगी। एक दिन तो उसके धैर्य की सीमा टूट गई। सतीश को छोड़ कर वो बहुत दूर चलीं गई ‌। सतीश अपनी दुनिया में व्यस्त रहने लगा, पर धीरे धीरे स्वप्निल दुनिया की सच्चाई से अवगत हुआ। तब तक उसकी जिंदगी उससे बहुत दूर चली गई। और वो रिश्ते की परिभाषा में खुद को तलाशने में लग गया।



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