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@dawriter

बाँझ

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#बाँझ

शनिवार का दिन था। ग्राहक कुछ ज्यादा ही थे तो दुकान बंद करते करते काफी देर हो गयी। 11 बजे घर पहुँचा तो कनिया मुँह फुलाये बैठी थी।

"अरे, हम दिन भर काम-धाम करके आये हैं। तुम खाना-पानी देने के बजाय चुप्पी साधे बैठी हो। क्या हुआ?

..... " कुछ बोलोगी या कैकई बनना है?

जबाब में कनिया ने उस पर तकिया दे मारा।

"अब पागल टाइप मत करो। हम अभी मज़ाक के मूड में बिल्कुल नहीं हैं।" अब कनिया उठ कर आयी और उसका कन्धा झकझोर दिया ," या तो तुम दूसरी शादी कर लो या मुझको ज़हर ला दो। मुझसे अब बर्दाश्त नहीं होता है।"

"अरे हुआ क्या?बताओगी तभी तो कुछ समझ में आयेगा।"

"जो भी आता है ताने मार कर चला जाता है। माँजी, चाची का ताना तो सुनने का आदत ही हो गया है। आपकी बुआ, मौसी, मामी भी जब आती हैं तो प्रवचन देना नहीं भूलतीं।"

"अरे बोलने दो उन सबको। इस कान से सुनो, उस कान से निकाल दो।"

"अब नहीं होगा बर्दाश्त हमसे। आज तो वह कमीनी कामवाली बाई भी इशारे इशारे में काफी कुछ कह गई।" .....

"बोलो न! तुम दूसरी शादी करोगे या हम यह घर छोड़ कर चल जाये।"

"पागल हो क्या?एक ही रट लगा रखी है।

"तो क्या करूँ।" अब तक आँसू ने आवाज़ की शक्ल ले ली थी।

"सुनो। सबसे कह देना कि मुझमें ही कमी है।"

"न।न।यह पाप मुझसे नहीं होगा। आप पर कोई अँगुली उठाये। यह मैं नहीं होने दूँगी।"

"मुझसे प्यार करती हो न! तो तुझे मेरी कसम है कि मेरी यह बात मानलो।"

"और रिपोर्ट?"

" वह मैंने बदलबा लिया है। उसकी चिंता मत करो!"

" लेकिन लोग अब आपको ताने देंगे!" कनिया अभी भी चिंतित थी।

"ज्यादातर लोग तो कुछ बोलेंगे नहीं। और जो मुँह खोलेंगे, उनके लिये मैंने जबाब तैयार रखा है। पर अब कोई मेरी कनिया को बाँझ तो नहीं कहेगा न!" कहकर कनिया को गले क्या लगाया, दोनों की आँखों से दरिया बह निकला।

©मृणाल आशुतोष

Imagesource: YouTube



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