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@dawriter

बहू बेटी

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बहू बेटी

आज मार्किट में मुझे मेरी कॉलेज टाइम की सहेली मिल गयी |अचानक एक दूसरे को देखा और देखते ही पहचान लिया | स्कूल में भी हम दोनों साथ ही थे | इतने दिन बाद मिले कभी सोचा भी नहीं था कि वो मुझे इस तरह अचानक मिल जाएगी . शादी के बाद मैं अपने पति के साथ गुवाहाटी चली गयी थी उसके बाद जब आती तब हम मिलते लेकिन जब उसकी भी शादी ही गयी तो फिर कभी मिलना हुआ ही नहीं आज पूरे २८ साल बाद मिले हम दोनों | दोनों की आँखों पर चश्मे चढ़ चुके थे और चेहरे भी काफी बदल गए थे | दोनों एक दूसरे से लिपट कर मिले | यकीन ही नहीं हो रहा था कि हम एक बार फिर आमने सामने हैं | भावातिरेक में दोनों की आँखें नम हो आयी थीं |लेकिन आज भी लगा जैसे हम उसी पुराने समय में लौट गए | उसका घर नज़दीक ही था उसने ज़िद की और मुझे अपने घर ले गयी |
घर काफी बड़ा और खूबसूरत था | उसने चाय बनायीं और चाय पीते पीते पुराने किस्से खूब याद किये | खूब बातें हुईं नयी पुरानी | कब दो घंटे बीत गए पता ही नहीं चला | मैंने घडी देखी ६ बज चुके थे “ आशा अब मुझे चलना चाहिए बहुत देर हो गयी | “
“ अरे घर तो देख ले ” यह कह कर आशा मुझे ऊपर ले गयी | फिर वो बड़े चाव से अपनाघर दिखने लगी . नया बनवाया था | फर्स्ट फ्लोर पे पहुंचे तो देखा कि घर वेल फर्निश्ड लगा लेकिन ऐसा नहीं लगा कि यहाँ कोई रहता है | तभी उसने मेरी शंका दूर कर दी |
'' देख ये वाला फ्लोर हमने बड़े बेटे और उसकी बहू के लिए तैयार करवाया है |"
“अरे वाह बहुत सूंदर है लेकिन देख कर तो लग ही नहीं रहा की यहाँ कोई रहता भी है “
“ हाँ तो अभी कोई रहता ही कहाँ है " कह कर वो हॅंसने लगी |
“ क्यों ? “ मैंने पूछा तो बोली , “अभी शादी कहाँ हुई है उसकी !”
“तो अभी से उनका अलग इंतज़ाम कर दिया”
वह हंसने लगी | “ देख, आजकल हर सास बहू में बनती कहाँ है , मैंने सोचा हुआ था पहले ही कि भैय्या लड़ाई झगडे में कुछ नहीं रखा हम तो पहले दिन से ही अलग कर देंगे कम से कम प्यार तो बना रहेगा .यह देख किचन भी बनी हुई है चूल्हा भले ही अलग हो न हो पर जब चाय पानी का मन करे तो बनाओ खाओ पियो आराम से नयी बहू की सुविधा का भी तो ख्याल रखना है |
“ अरे वाह! तू तो बड़ी समझदार निकली | “ और हम दोनों हंस पड़े | “ चल न ऊपर एक और फ्लोर है |”
“ वो क्या छोटी बहू के लिए है ? “ मैंने मज़ाक में ही कहा |
“ और नहीं तो क्या ! “
“ क्या ? सच्ची ? ”
“हाँ , आ देख न “ वो बड़े प्यार से मुझे खींचती हुई ऊपर ले गयी बिलकुल वैसा ही था ऊपर वाला फ्लोर भी | मेरा मुंह खुला का खुला रह गया | मुझे हैरान देख कर बोली क्या हुआ ? इतना भी हैरान होने की बात नहीं है हमने तो अपना झंझट मुकाया है |"

 " सही कह रही है । वैसे एक बात बता , तू इतनी समझदार कैसे हो गयी तू तो कॉलेज टाईम में बिल्कुल बुद्धू थी ।" हहहहा
“ सास बहू की चिकचिक में क्या रखा है | भाई जब तक चाहे साथ रहें जब चाहे अपना खाना अलग बनाना शुरू कर दें | बस ग्राउंड फ्लोर हमारा है |”
“ हाँ अब तो सब लोग यह सीख लें तो सब सुखी हो जाएँ |”
मैं उसके इस काम से जितनी हैरान थी उतनी ही प्रभावित भी | कितना आसान और बढ़िया तरीका है |
तभी वो बोली “ अरे मज़ाक अपनी जगह है | बहुएं भी तो बेटियां ही होती हैं ,अपने मन में बुरी भावना लेकर थोड़ा ही आती हैं ससुराल में |उनको अगर प्यार मिलेगा तभी तो प्यार देंगी हमें |”
“ बात तो सोलह आने सही है |”
“अरे ! ७ बज गए ! वह हंसने लगी | चलूँ अब मैं वह हंसने लगी | वरना घरवाले ढूंढने निकल पड़ेंगे | " दोनों पुराने वाला ठहाका मार कर हंस पड़े |
इतनी ख़ुशी हो रही थी आज आशा से मिलकर कि क्या कहूँ ! एक तो अपनी प्यारी सखी से इतने सालों के बाद मिलना हुआ और बोनस में इतनी बड़ी शिक्षा मिली मुझे | अब तो मैं भी यही करने वाली हूँ अपने बेटे की शादी से पहले ही |



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