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@dawriter

नोंक-झोंक

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कुछ भूंख सी लग रही है कुछ बना दो खाने को। टाई की नॉट ढीली करते हुए करन ने कहा।

निशा "अरे खुद बना लो कुछ। मैं कुछ आर्टिकल लिख रही हूँ।

आज एक अख़बार को भेजना है, "अभी- अभी कुछ देर पहले अख़बार के एडिटर रहमत भाई का फ़ोन आया था, की जल्दी भेजो "

करन ने निशा से कहा की एक कप चाय बना दो फिर लिखती रहना।

बहुत थक गया हूँ आज !!

निशा गुस्से में बोली आप कब नहीं थकते, जब देखो थके हुए से रहते हो !!

मैं अकेली दिन भर दो बातें करने के लिए तरसतीं हूँ, और ये महाराज घर आएंगे तो बस ऐसा नाटक दिखाएंगे जैसे किसी होटल में आए हो।

बीबी खाना बनाए, रोटी बनाए और महाराज जी के मुँह में ठूस दे।

हद हो गयी यार !!

कमाने वाली बीवी होती तो खुद बनाते गरम चाय और अपने हाथों से पिलाते, और फिर मेरा सोना, बाबू वाले गुणगान गाते फिरते।

गाय जैसी बीबी मिल गयी है तो नवाबी झाड़ रहे हो !

अब निशा गुस्से में मुँह बनाते हुए चप्पल पटकते हुए रसोई की तरफ घुस गई ,

चप्पल पट ,पट ,पट ......

कुछ देर बाद !!

लो चाय ! और सुरक लो ,

और कुछ चाहिए तो एक बार बता दो , बार -बार आवाज मत लगाना गला मत फाड़ना।

करन सहमी सी आवाज में हिम्मत जुटा कर पूछा ,

"वैसे किस टॉपिक पर लिख रही हो आर्टिकल बताती जाओ शायद मैं कुछ आयडिया दे दूँ"

निशा ने जोर से कहा ," घर कैसे बने स्वर्ग " इस पर

करन "उफ़ !!

करन को अभी तक कुछ आयडिया नहीं आ रहा, और न ही उसने ज्यादा कुछ सोचने की कोशिश की।

"समाप्त"

धन्यवाद...

(सचिन ओम गुप्ता, चित्रकूट धाम)



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