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@dawriter

तलाक की ओर बढ़ता पति-पत्नी का रिश्ता

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वर्तमान समय में हम काफी आधुनिकता की ओर बढ़ते जा रहे हैं हमारे विचार स्पष्ट व प्रभावशाली होते जा रहे हैं। समाज में अपनी जगह बनाने के लिए हमने नये नये तौर-तरीके व वेशभूषा भी अपना ली है परंतु एक चीज शायद पीछे छूटती जा रही है वो है रिश्तों को दिल से निभाने का सलीका...वो चाहे माता-पिता व सन्तान का हो, भाई का बहन से, या फिर भाई भाई का ही क्यों न हो हर रिश्ता धीरे धीरे अपनी पहचान खोता जा रहा है बस रह गयी है तो सिर्फ औपचारिकताँए, लेकिन सबसे ज्यादा प्रभावित होता रिश्ता है पति-पत्नी का, जी हाँ यह रिश्ता अपना सम्मान खोता जा रहा है। कहने में माफी चाहूँगी कि शादी सिर्फ एक जुआ बनती जा रही है….जिसमें लड़की के माता-पिता खूब पैसे लगाकर, दहेज देकर अपनी बेटी को उसके पति के साथ ससुराल विदा तो कर देते हैं परंतु यह नहीं जानते कि वह शादी कामयाब होगी भी या नहीं???? शादी के कुछ दिन घूमने-फिरने के बाद जब असल‌ रूप में एक ही छत के नीचे जीवन साथ बिताने का समय आता है तब धीरे धीरे एक दूसरे का स्वभाव व एक दूसरे के विचारों को ना पसंद करने की होड़ में पैदा हुआ झूठा अहंकार, स्वाभिमान व गुस्सा उस रिश्ते को तोड़ कर ही दम लेता है,बस फिर क्या चल पडते हैं तलाक लेने की चाह मन में लिए कोर्ट की तरफ,यह शादी निभाने का तरीका कहाँ तक उचित है????शायद खुद की जिन्दगी को खराब करना है व साथ ही साथ समाज में अपने माता-पिता की बनी हुई इज्जत को अपमानित करना है,क्योकि जब बच्चों का घर टूटता है तो कही न कही आरोपित माता-पिता भी कहलाए जाते हैं कि शायद उनहोंने अपने बच्चो को यह रिश्ता निभाना नहीं सिखाया या फिर हो सकता है कि अपने बच्चो का घर तोड़ने में उन्ही का ही हाथ होगा,इस प्रकार की बातें उन्हें आत्मग्लानि से भर देती है।

लव मैरिज हो या अरेंज मैरिज यह समस्या ज्यादातर हर कपलस में देखने को मिल रही है। एक दूसरे के स्वभाव, विचारों को समझने की बजाय तलाक लेना किस हद तक ठीक है?? इसका कितना बुरा असर आपके बच्चों पर पड़ता है शायद यह सोचने में असमर्थ है हम लोग, बच्चे सामाजिक मिलनसार नहीं सीख पाता व शादी के प्रति अपने दिल व दिमाग में स्वयं ही धारणा बना लेता है जिससे या तो वो शादी नहीं करता या फिर करने के बाद उसे निभाने में असमर्थ रहता है….अपना नहीं तो अपने बच्चो का तो खयाल कीजिए। हमारे टी.वी सीरियलस व फिल्मों में दिखाई जाने वाली बातें उनकी रील लाइफ है उसे अपनी रीयल लाइफ में लागू करके अपनी लाइफ बर्बाद मत कीजिए।

मै खुद एक औरत हूँ लेकिन कहना चाहूँगी कि जरूरी नहीं हर बार लड़का ही गलत हो, आजकल की गलत लड़कियाँ शादी को केवल पैसे लूटने का जरिया बना रही‌ हैं शादी के बाद कुछ माह ससुराल में रहकर किसी न किसी बात पर लड़ाई करकर, झूठा आरोप लगाकर कर देती हैं केस फाइल और फिर मांग लेती है अपनी मन चाही रकम,जिससे कि लड़के पर शारिरिक व मानसिक रूप से तो असर पड़ता ही है साथ ही साथ वह अपने कैरियर में भी पीछे रह जाता है...तलाक की‌ तरफ बढ़ता यह गलत तरीका कहा तक‌ ठीक है????कानून द्वारा केवल एक ही पक्ष की सुनवाई क्यों????समाज में बढ़ता यह तरीका शायद कानून भी‌ समझ में आने लगा है तभी सरकार द्वारा नये कानून बनाकर कदम उठाने की शुरुआत हो चुकी है।

अंत में इतना कहना चाहूँगी कि शादी दो आत्माओं व दो दिलों का मिलन है तो फिर किस बात का अहंकार, गुस्सा व लड़ाई….पति-पत्नी दोनो को इस रिश्ते में एक दूसरे को सम्मान देना चाहिए, एक दूसरे को समझें, वक्त दें,व जिस प्रकार पति को अपने माता-पिता के सम्मान की अपेक्षा शादी के बाद पहले दिन से ही अपनी पत्नी से बढ़ जाती है उसी प्रकार पत्नी की भी अपने माता-पिता के प्रति काफी ऎसी अपेक्षाएं होती है जिसे निभाने की चाह वह अपने पति से रखती है कृपया करके एक दूसरे की अपेक्षाओ को समझे,अगर उनका सम्मान नहीं कर सकते तो अपमान भी न करें व कोर्ट में अपना रिश्ता ले जाकर उसका मज़ाक न बनवाए न ही अपना समय, पैसा व जीवन बर्बाद करें।‌ सोच को आधुनिक बनायें, केवल पति पक्ष ही अपना सिर सदैव ऊँचा रखने मे अपनी शान न समझे, कुछ झुके थोड़ा झुकाए…यह रिश्ता एक गाड़ी के दो पहिए जैसा है दोनो को एक दूसरे की जरूरत है, जब आपके साथ कोई नहीं होगा तब आप ही एक दूसरे का ध्यान रखेंगे..कृपया करके सात जन्म ना सही इस जन्म तो यह रिश्ता दिल से निभाएं ...धन्यवाद।

मोना कपूर



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