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@dawriter

टूटे रिश्ते

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कुछ लोगों की आदत होती है अक्सर टूटी हुई चीज़ों को ढोते जाते हैं। कुछ लोग उससे दूर भागते हैं उससे पूरी तरह हटते रहते हैं। जिससे अब कोई सम्बन्ध नहीं है। जिससे कभी गहरा नाता था।

दिल एक ऐसी टूटी हुई चीज़ है जिसको ढोना ही है।

मैंने उन जगहों और रेस्तराओं में जाना छोड़ दिया था जहाँ पर कभी उसके साथ गया था। बालों में सीधी मांग निकालनी बंद कर दी थी जो उसको पसंद थी अब उससे जुड़ी हर चीज से वास्ता नहीं रखना है । टूटी हुई चीज़ें ख़तरनाक होती हैं। यादों में भी चुभती हैं ।

गाड़ी जब उसके शहर के स्टेशन से होकर गुजरी तो मेरे और रेलवे के न चाहने पर भी ट्रेन रूक गई। कहीं बहुत दूर से डूबे स्वर सुनाई देते हैं। उन पर ठिठका और ध्यानमग्न हुआ मन, अचानक सुनना स्थगित कर देता है। पूर्णमासी का प्रकाश चीजों को आलोकित करता है किन्तु स्याही के बूटे खिले रहते हैं। धुंधले अनचीन्हे स्वर सुघड़ होने लगते हैं। क्या कोई मुझे ही पुकार रहा है?

मैं देखता हूँ कि चांद ने कोई जादू फूंका है और असर बाकी है। ट्रेन छोड़कर चल पड़ा रोशनी का एक टुकड़ा राह दिखा रहा था ।

शाम बीत चुकी है। मजदूरों को उनकी गाड़ियों ने छोड़ दिया है, घर जाती पगडंडियों पर। कोई हल्का उजास, कोई चहल, कोई ठिठकी नज़र उनको खींच चुकी होगी । मैं भी एक अच्छा मजदूर होना चाहता रहा हूँ। मुझे भी सलीके से घर पहुंचना अच्छा लगता है। लेकिन मैं उससे बंध नहीं पाता। अकसर बीच मे कहीं भी ठहर जाता हूँ। जैसे अभी इस ट्रेन से उतर गया हूं ।

किसी की चिंता न करो। प्रेम से बड़ी बहुत सी तकलीफें हैं। वे उनको सबकुछ भुला देंगी। ये भी कि वे इंतज़ार कर रहे थे। ये भी कि उनको कोई शिकायत करनी थी। काश मेरे पास थोड़ी सी शराब और एक हैट होती ?

नहीं है तो कोई बात नहीं।

कुछ जानी पहचानी अनजानी सी गलियों से होकर उसके घर के सामने जाकर खड़ा हो गया। जलसा खत्म हो चुका था मर्तबान धुल रहे थे। अजीब सी खामोशी वातावरण में थी । गाना बज रहा था ..

ये गलियां ये चौबारा
यहाँ आना न दोबारा
तेरा यहाँ कोई नहीं

एक लड़की खिड़की पर बैठी हजारों तारों में अपना तारा ढूंढ रही थी। उसकी पीठ उसके होने का एहसास करा रही थी जिसे मैं भूलना चाहता था।

उस पीठ को देखते हुए सोचा कि क्या हो अगर वह अचानक मुड़ जाए और मुझसे पूछ बैठे कि ऐ अजनबी यहाँ क्या लेने आए हो? मैं अपने ही ख़याल से चौंक गया। मुझे लगा कि वह सचमुच मुड़कर देख रही है।

कुछ लोगों को हम कभी भूल नहीं पाते। चाहे हमने उनको न देखा हो। ऐसा लगता है कि अगर वे मिले तो हम एक दूजे में इस तरह खो जाएंगे, जैसे बहुत पुराने परिचित दो तकिये एक साथ पड़े रहते हैं।

छूटकू ने पहचान लिया, यही था कमबख्त जिसने हमारे इश्क के इत्र का ढक्कन खोला था। उसको देखकर आज चार साल बाद फिर से बदन के पोर दुखने लगे। देखकर मुस्कुराया वो " क्यूं पुलिस में भर्ती हो गये क्या, बहुत लेट आये हो। "

मन तो हुआ सर फोड़ दूं उसका। पत्थर भी उठा लिया था, लेकिन तभी वो पास आकर लिपट गया कहने लगा " जबसे शादी तय हुई थी बहुत रोई थी, इतना की विदाई तक तो उसकी आंखें पत्थर हो चुकी थी। "

उसको अलग कर वापस लौट रहा हूं, सर्द मौसम अच्छा होता है कि हमारे पास बहुत सी जेबें होती हैं। हम उनमें बहुत कुछ रख सकते हैं। जैसे उसकी छुअन को महसूस करती ऊंगलियां और ये पत्थर।
पत्थर जेब में रख लिया है जब याद आएगी तो सर पटकूंगा इस पर। जिन्स की पैंट बहुत टाइट है या पत्थर भुरभुरा पता नहीं लेकिन पत्थर कंकड़ में बदल रहे हैं।

मेरी ख्वाहिश है कि कम लोग प्रेम करें। हम क्यों किसी के दुःख का कारण बनें।

Image Source: 3000pr.info



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