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@dawriter

कहानी का शीर्षक - डर

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विकास जब १३-१४ साल का हुआ तो उसकी माँ को गले में केंसर हो गया। उसी समय विकास के पिता की दुकान भी बन्द हो गई। इस बुरे वक्त में परिवार के लोग और रिश्तेदारों ने भी झगड़े करके विकास के घरवालों के लिए मुसीबतें खड़ी कर दी और जिस घर में विकास का परिवार रहता था, उस घर का बँटवारा करके हिस्सा करने पर अड़ गये। हर तरफ से बढ़ती मुसीबत में विकास के पिता भी परेशान होकर बीमार रहने लगे। उस समय विकास दसवीं क्लास में पढ़ रहा था। माता-पिता दोनों के बीमार होने के कारण छोटी बहिन की पढ़ाई-लिखाई, माता-पिता की दवाईयों का खर्च और घर की जिम्मेदारी विकास पर आ गई। विकास पैसे कमाने में ज्यादा ध्यान देने के कारण पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाया और दसवीं में फैल हो गया। दसवीं में फैल होने के बाद विकास ने पढ़ाई छोड़ दी और अपना पूरा ध्यान सिर्फ पैसे कमाने में ही लगा दिया। काम-धंधे और नौकरी के लिए छोटी उम्र में ही विकास कई छोटे-बड़े शहरों में और कुछ गाँवों में गया। धीरे-धीरे विकास ने अपने परिवार वालों को उनके हिस्से के पैसे दे दिये और माता-पिता का ईलाज भी करवा लिया। १८ साल का होने तक विकास घर की परेशानियाँ संभालते-संभालते लाखों के कर्जें में डूब गया। लेकिन धीरे-धीरे २-३ सालों में विकास ने सारा कर्जा उतार दिया। खुद के जीवन में हुए उतार-चढ़ाव देखकर विकास के मन में रुपये-पैसे और नाम-शौहरत की चाहत खतम हो गई। अब वो सिर्फ अपने माता-पिता और बहिन के लिए ही कमाता हैं।

घर से दूर रहने के कारण उसे घर-परिवार की बातों के बारे में, घर के माहौल के बारे में बिल्कुल समझ नहीं हैं। विकास पूरी तरह संवेदनहीन बन चुका हैं। उसका उठना-बैठना, चलना-फिरना, खाना-पीना, हँसना-बोलना, यहाँ तक कि मुस्कुराना भी केवल जरूरत के अनुसार होता हैं।

विकास मोबाइल नहीं रखता, इसलिए उसकी माँ ने कई बार उससे एक मोबाइल लेने के लिए कहा, ताकि फोन करके हाल-चाल पुँछ सकें। लेकिन विकास हर बार टाल देता हैं। आखिरकार माँ ने खुद ही एक मोबाइल खरीदकर विकास को दे दिया। मोबाइल आने के बाद दोस्तों के कहने पर विकास नेट यूज करने लगा। फिर कुछ समय बाद विकास ने फेसबुक आईडी बनाई। विकास को अपने दिल की बातें शायरी या कविता में लिखने का शौक था, इसलिए विकास हर रोज २-४ शायरी या कवितायें फेसबुक पर पोस्ट करता हैं और फ्रैंडलिस्ट में सबको टैग भी कर देता हैं। धीरे-धीरे फ्रैंड्स की संख्या बढ़ती गई और विकास रात-रात भर फेसबुक पर ऑनलाइन रहने लगा। विकास की हर पोस्ट पर १०० से ज्यादा लाइक और तारीफ में २०-३० कॉमेन्ट आ जाते हैं।

विकास ने गौर किया कि सिमरन नाम की एक फेसबुक आईडी से उसकी हर पोस्ट पर लाइक और तारीफ में एक कॉमेन्ट जरूर आता हैं। सिमरन विकास की फ्रैंडलिस्ट में नहीं हैं। विकास के २-३ फेसबुक फ्रैंड की फ्रैंडलिस्ट में हैं। ये सिलसिला लगातार ३ महिने तक चलता हैं। विकास एक रात ४ बजे के सिमरन को फ्रैंड-रिक्वेस्ट सेन्ड करता हैं। सिमरन सुबह ८ बजे के विकास की फ्रैंड-रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करती हैं। ४ दिन बाद सिमरन विकास को गुड मॉर्निग मैसेज करके हाय-हैलो में थोड़ी सी बात करती हैं।

इस तरह २-४ दिन में एक या दो बार सिमरन विकास को मैसेज करके थोड़ी-बहुत बात करती हैं। लगभग महिने भर बाद एक दिन सिमरन के अलावा किसी और के ऑनलाइन नहीं होने के कारण विकास ने खुद अपनी तरफ से सिमरन को गुड मॉर्निग मैसेज किया। सिमरन ने २-४ मैसेज के जवाब देने के बाद रिप्लॉय नहीं किया। विकास ने सोचा शायद कहीं बिजी होगी। विकास ने दोपहर को मैसेज किया, लेकिन सिमरन ने फिर पहले की तरह दो-चार मैसेज के बाद रिप्लॉय करने बन्द कर दिया।

इसी तरह शाम को विकास के मैसेज करने पर हुआ। रात के लगभग ९ बजे विकास ने सिमरन को मैसेज किया। इस बार सिमरन का रिप्लॉय ही नहीं आया। विकास ने सोचा कि सिमरन ऑनलाइन तो लगभग पूरे दिन थी, लेकिन इस तरह इंग्नोर क्यों कर रही हैं ? वरना हमेशा तो खुद ही मैसेज करती हैं। आखिर रात के १० बजे तक विकास ने एक के बाद एक सिमरन को चार मैसेज किये, लेकिन सिमरन का कोई रिप्लॉय नहीं आया। विकास ने तंग आकर सिमरन को "स्वीट ड्रीम , टेक केयर" लिख कर लास्ट मैसेज कर दिया। इस बार तुरन्त सिमरन का रिप्लॉय आ गया- "सैम टू यू, गुड नाइट" विकास को थोड़ा बुरा लगा, लेकिन उसने सोचा शायद सिमरन को नींद आ रही होगी।

रात के एक बज गये, लेकिन सिमरन अभी तक ऑनलाइन हैं। विकास सोचने लगा कि मुझे तो दस बजे ही गुड नाइट बोल दिया और अभी तक ऑनलाइन ही हैं।

विकास ने गुस्सा होकर सिमरन को मैसेज किया- "अगर आपको मुझसे बात नहीं करनी तो साफ़-साफ़ मुझे बोल देते। इस तरह इंग्नोर करने की क्या जरूरत हैं। अच्छा अगर मेरी कोई बात आपको बुरी लगी हो या मेरी किसी बात से आपका दिल दुःखा हो तो आई एम सॉ सॉरी। मुझे माफ़ कर दीजिए। अब कभी आपको मैसेज करके परेशान नहीं करूँगा।"

विकास का मैसेज पढ़कर सिमरन ने तुरन्त दो मैसेज किए- "अरे ऐसी कोई बात नहीं हैं।"
"आई एम सॉरी।"

विकास ने सिमरन के मैसेज का कोई जवाब नहीं दिया।

४ दिन बाद सिमरन विकास को गुड मॉर्निग मैसेज करती हैं। विकास ने मैसेज देखा, लेकिन कोई रिप्लॉय नहीं किया। अगले ८-१० दिनों में सिमरन ने ४-५ बार विकास को मैसेज करती हैं। विकास ने मैसेज देखकर भी कोई रिप्लॉय नहीं किया। आखिर में दसवें दिन सुबह सिमरन ५-७ मैसेज करने के बाद भी कोई रिप्लॉय नहीं आने के कारण सॉरी बोलती हैं।

सिमरन- "शायद आप उस दिन के लिए अभी तक नाराज हैं। एम सॉरी उस दिन मेरे ७-८ फ्रैंड एक साथ मैसेज कर रहे थे, तो उनको रिप्लॉय करने के चक्कर में आपको रिप्लॉय नहीं कर पाई। प्लीज अब माफ़ कर दीजिए। मैं आगे से ऐसा नहीं करूँगी। सबसे पहले आपको रिप्लॉय करूँगी।

विकास- "मिस. सिमरन जी! आपने मेरे मैसेज का रिप्लॉय नहीं किया, मैं इसलिए गुस्सा नहीं हूँ। आप मुझसे बात करो, मैं ये भी नहीं बोल रहा हूँ। देखो, हर इन्सान की जिन्दगी में बहुत से लोग होते हैं। हर इन्सान के बहुत से दोस्त होते हैं। आपके भी दोस्त होगें। आप उनसे आराम से बात करो। जी भर कर बात करो। लेकिन आप एक मैसेज करके मुझे इतना तो बोल सकते हो ना कि मैं अभी बिजी हूँ, आपसे बात नहीं कर सकती। सिम्पल। मैं खुद ही आपको मैसेज नहीं करता। लेकिन आप तो कोई जवाब ही नहीं दे रहे थे। बस आपका ये इंग्नोर करना मुझे अच्छा नहीं लगा।"

सिमरन- "हम्म.....एम सॉरी। अब ऐसा नहीं करूँगी।"

विकास ने सिमरन को माफ़ कर दिया और दोनों की रोज बातें होने लगी। सिमरन और विकास दोनों ही सुबह ७-८ बजे से लेकर रात के ३-४ बजे तक फेसबुक पर ऑनलाइन रहते और समय मिलते ही एक-दूसरे को मैसेज कर देते हैं।

सिमरन की उम्र २५ साल हैं। वो एक प्राइवेट स्कूल में हिन्दी और मराठी पढ़ाती हैं। उसके घर में मम्मी-पापा, दो बड़े भाई और बड़े भईया की वाईफ और दो बच्चे हैं। छोटे भाई(सिमरन से बड़े) ने अभी तक शादी नहीं की। सिमरन के पापा का गाड़ियों के पार्टस बनाने का बिजनेस हैं। बड़े भाई सिमरन के पापा के साथ बिजनेस संभालते हैं और छोटे भाई की एक जिम हैं, जिसमें वो जिम ट्रेनर हैं।

सिमरन अपनी फैमिली के बारे में सब बता कर विकास से उसकी फैमिली के बारे में पूछती हैं।

विकास ने बताया कि मेरे घर में मम्मी-पापा और एक छोटी सिस्टर हैं। मम्मी-पापा दोनों बीमार रहते हैं। ईलाज तो करवाया हैं, लेकिन पूरी तरह ठीक होना संभव नहीं हैं। छोटी बहन अभी पढ़ रही हैं। मैं एक एजेन्सी में ४-५ कम्पनियों के लिए कमीशन पर मार्केटिंग करता हूँ।

एक-दूसरे से साधारण परिचय होने के लगभग एक महिने बाद एक रात सिमरन ने विकास से पूछा- "क्या आपकी कोई गर्लफ्रैंड हैं ?"

विकास ने मैसेज किया- "नहीं जी, मुझ दसवीं फैल की गर्लफ्रैंड कौन बनेगी ?"

सिमरन ने मैसेज किया- "अरे ! ये फैल-पास क्या होता हैं ? अगर आप बताना नहीं चाहते तो कोई बात नहीं। एम सॉरी।"

विकास- "अगर कोई होती, तो आपको जरूर बताता। क्योंकि मैं ऐसा कुछ नहीं करता, जो मुझे किसी से छूपाना पड़े। लेकिन मेरी लाइफ में अभी तक कोई नहीं आई।"

सिमरन- "झूठ मत बोलो, मैं आपके सारे पोस्ट पढ़ती हूँ और पोस्ट पर जो कॉमेन्ट होते हैं, वो सारे कॉमेन्ट भी।"

विकास- "अरे ! वो तो बहुत सारी लड़कियों के लिए हैं। कभी कोई ट्रेन में मिल गई, कभी कोई बस में मिल गई। कभी मैं कहीं रहने गया, तो पड़ौस में रहने वाली लड़कियाँ। इसके इलावा बहुत सी लड़कियाँ मेरे साथ मार्केटिंग या ऑफिस में काम भी करती रही हैं। इन सबसे सिर्फ जान-पहचान हैं। इनमें से कोई भी मेरी गर्लफ्रैंड नहीं हैं और मैंने कभी किसी लड़की या किसी औरत के बारे में ऐसा कुछ सोचा भी नहीं।"

सिमरन- "आपकी जिन्दगी में इतनी लड़कियाँ और औरतें हैं। और गर्लफ्रैंड एक भी नहीं। मुझे यकिन नहीं होता।"

विकास- "अब इसका तो कोई ईलाज नहीं हैं, जी। बाकी मेरे पास ५००-७०० लड़कियों और औरतों के नम्बर हैं। मैं आपको बता देता हूँ, आप उनसे पूछ लो, कि मैंने उनमें से किसी के साथ कभी कोई ऐसी-वैसी बात या कोई ऐसी कोशिश की हैं क्या ? फिर भी आपको यकिन ना आए, तो इसमें मैं कुछ नहीं कर सकता।"

सिमरन- "हम्म....नहीं, मुझे यकिन हो गया। आप चिन्ता मत करो, आपकी जिन्दगी में भी कोई ना कोई आ जाएगी।"

विकास- "थैक्यू, वैसे मुझे तो किसी का ईंतजार नहीं हैं। लेकिन आपकी ईजाजत हो तो आपसे एक बात पूछू ?"

सिमरन- "हाँ, पूछो।"

विकास- "आपकी जिन्दगी में कोई हैं ?"

सिमरन- "हाँ, था। लेकिन अब वो इस दुनिया में नहीं हैं। सिर्फ मेरे दिल में हैं। ४ चार साल पहले उसकी मौत हो गई।"

विकास- "ओह ! एम सॉरी। लेकिन उसे क्या हुआ ?"

सिमरन- "उसने मन्नत माँगी थी, जब सब कुछ ठीक हो जाएगा, तो वो शिरडी जाकर आएगा। सब ठीक होने के बाद हमारी शादी होने वाली थी। लेकिन शादी होने से एक महिने पहले शिरडी से वापस आते वक्त कार एक्सीडेंट में उसकी मौत हो गई।"

विकास- "ये तो बहुत बुरा हुआ"

सिमरन- "हम्म....."

विकास- "आपके दुःख का तो कोई ईलाज नहीं हैं। बस टाइम के साथ आप हिम्मत से खुश रहने की कोशिश करती रहे।"

सिमरन- "हम्म.....वहीं कर रही हूँ। मैंने अब खुद के बारे में सोचना छोड़ दिया हैं। मैं बस अपने मम्मी-पापा के लिए जी रही हूँ।"

विकास- "हौसला रखिए। जिन्दगी से निराश मत होईए।"

विकास को समझ नहीं आया कि ऐसी परिस्थिति में क्या बोले ? लेकिन फिर भी वो सिमरन को दिलासा देने की कोशिश करता हैं।

कुछ दिन बाद रात के समय विकास ने एक फेसबुक पेज पर एक पोस्ट देखता हैं- "क्या आपने कभी किसी को दिल दिया ?"

उस पोस्ट पर सिमरन कॉमेन्ट करती हैं- "हाँ, मैंने किसी को दिल दिया था, लेकिन उसने मेरा दिल तोड़ दिया।"

पेज के एडमिन ने सिमरन को जवाब दिया- "ऐसा क्या हुआ सिमरन, जो उसने आपका दिल तोड़ दिया ?"

विकास ने कॉमेन्ट पढ़कर सिमरन से पूछा- "आप तो बता रही थी, उसके साथ आपकी शादी होने वाली थी। लेकिन किस्मत खराब थी और शादी से पहले एक्सीडेंट में उसकी मौत हो गई। फिर ये दिल तोड़ने वाली बात समझ नहीं आई।"

सिमरन- "वो कॉमेन्ट किसी ओर के लिए था। उसने मुझे शादी के लिए प्रपोज किया था। अभी कुछ दिन पहले मैंने उसे एक पेज पर एक लड़की को आई लव यू बोलते देखा और जिसके लिए ये कॉमेन्ट किया, उसने ये कॉमेन्ट पढ़ लिया हैं।"

विकास- "ये लड़के बैकार होते हैं। आप ऐसे लड़कों से बात मत किया करो।"

सिमरन- "मैं बात नहीं करती। वो खुद ही बार-बार मैसेज करता हैं, तो उसको जवाब दिया।"

विकास- "ऐसे घटिया और गन्दी सोच वाले लड़कों को जवाब देने की जरूरत नहीं हैं। ऐसे लड़कों को अनफ्रैंड करके सीधा ब्लॉक कर दिया करो।"

सिमरन- "हम्म.....अब यहीं करने वाली हूँ।"

धीरे-धीरे सिमरन और विकास की दोस्ती गहरी होती चली गई। सिमरन एक-एक करके अपनी जिन्दगी के सारे पन्ने विकास के सामने खोल देती हैं।

सिमरन बताती हैं कि उसका नाम सन्देश था। वो मुम्बई से पढ़ाई के लिए पुणे आया था। एक बार नवरात्रा में डांडियाँ खेलते हुए उससे पहली मुलाकात हुई, जो २-४ महिनों बाद दोस्ती में बदल गई। दोस्ती होने के बाद पहले सन्देश ने मेरी एक फ्रैंड को बताया कि वो मुझसे प्यार करता हैं। मेरी फ्रैंड ने जब ये बात मुझे बताई तो मैंने कहा- "जो लड़का मेरे सामने आकर मुझसे अपने दिल की बात कहने में डर रहा हैं, वो जिन्दगी भर साथ कैसे निभाएगा ?" जब मेरी फ्रैंड ने उसे मेरा जवाब बताया तो, वो सीधा मेरे पास आकर बोला- "क्या तुम मुझसे शादी करोगी ? अगर तुम्हारी हाँ हैं, तो मैं अभी चलकर तुम्हारे घरवालों से मिलकर हमारी शादी की बात करने के लिए तैयार हूँ।" मैंने उसे हाँ बोल दिया।

धीरे-धीरे उसका मेरा ख्याल रखना, मेरे अच्छे बुरे के बारे में सोचना, मेरी फैमिली की रिस्पेक्ट करना, मेरी फैमिली की परवाह करना। उसकी ये सब बातें मुझे अच्छी लगने लगी और मुझे भी उससे प्यार हो गया। फिर हमने हमारे घरवालों को हमारे बारे में बताया, तो पहले सब बहुत नाराज हुए, लेकिन हमने सबको बोल दिया- "शादी करेंगे तो सिर्फ एक-दूसरे से वरना शादी ही नहीं करेंगे। और सबकी मरजी से करेंगे। घर से भागकर घरवालों की मरजी के खिलाफ शादी नहीं करेंगे।" कुछ दिनों बाद उसके घरवाले मान गए। बस मेरे पापा को ये रिश्ता पसन्द नहीं था। क्योंकि वो मराठा थे और नॉनवेंज खाते थे।

सन्देश ने मन्नत माँगी कि जब सब घरवाले मान जाएगे, तो वो शिरडी साँई बाबा से आशीर्वाद लेने जाएगा। फिर सन्देश के नॉनवेंज छोड़ने का वादा करने के बाद मेरे चाचाजी और मेरे मामाजी के समझाने पर पापा भी मान गए। जब हमारे रिश्ते की बात पक्की हुई, तो वो अपनी मन्नत पूरी करने शिरडी गया था, लेकिन कभी वापस लौट कर नहीं आया। उसके जाने के बाद मैंने फिनायल पीकर मरने की कोशिश की थी। चार दिन तक हॉस्पीटल में एडमिट भी रही। तब मेरे मम्मी-पापा बहुत रोए और सन्देश के मम्मी-पापा ने भी मुझे समझाया। उसके बाद मैंने अपनी जिन्दगी अपने मम्मी-पापा के नाम कर दी। अब मेरी जिन्दगी का फैसला वहीं करेंगे। तब से लेकर आज तक मैं हर गुरुवार को साँई के नाम पर उपवास रखकर पूछती हूँ कि उन्होंने मेरे साथ ऐसा क्यों किया ?

सिमरन की कहानी सुनकर विकास को बहुत दुःख हुआ। अब तक विकास के लिए नारी-पुरुष का प्यार केवल शारीरिक संबंधों तक ही सीमित था। धीरे-धीरे सिमरन और विकास एक-दूसरे से अपने मन की हर बात कहने लगे और सिर्फ फेसबुक फ्रैंड होकर भी एक-दूसरे की बहुत परवाह करने लगते हैं। अगर किसी दिन एक-दूसरे से बात नहीं हो तो परेशान हो जाते हैं। फिर जैसे ही बात होती हैं, दोनों एक-दूसरे से खुब नाराज होते हैं और दोनों के बीच रूठने-मनाने का सिलसिला चलता हैं।

सिमरन भी विकास के बारे में सब कुछ जानकर विकास के करीब होती चली गई। अब तक सिमरन के लिए सन्देश का गम ही सबसे बड़ा गम था। जिन्दगी की दूसरी परेशानियों से सिमरन अन्जान थी।

७-८ महिने तक फेसबुक पर बातें करने के बाद एक रात सिमरन ने विकास से उसका मोबाइल नम्बर लिया और इसके बाद दोनों में मोबाइल पर भी बातें होने लगती हैं।

सिमरन स्कूल टीचर की जॉब छोड़कर जिम ट्रेनर का कॉर्स करने लगी और विकास मार्केटिंग का काम छोड़कर जयपुर की एक कम्पनी में ज्वैलरी स्टोन असोरटिंग की जॉब करने लगता हैं। दोनों के बीच शुरू-शुरू में महिने में २-४ बार फोन पर बात होती हैं, फिर हफ्ते में २-४ बार फोन पर बात होने लगी और धीरे-धीरे हर रोज दिन में ८-१० बार फोन पर बात होने लगती हैं।

इस बीच सिमरन का जन्मदिन आता हैं। विकास फेसबुक पर एक बर्थडें केक सिमरन को पोस्ट करके आदतन अपने ७-८ खास दोस्तों को टैग भी करता हैं। टैग किये गये सभी दोस्तों ने पोस्ट पर कॉमेन्ट करके सिमरन को विश किया और सिमरन भी सबको रिप्लॉय करती हैं। सभी दोस्त सिमरन और विकास के साथ खूब हँसी-मजाक भी करते हैं।

विकास का एक दोस्त पवन बर्थडें पोस्ट पर कोई लाइक-कॉमेन्ट कुछ ना करके सिमरन को बर्थडें केक मैसेज करके बर्थडे विश करता हैं।

सिमरन ने विकास से पूछा- "ये पवन कौन हैं ?"

विकास ने कहा- "मेरा दोस्त हैं। क्यों क्या हुआ ?"

सिमरन- "नहीं, हुआ कुछ नहीं। उसने मुझे बर्थडे केक मैसेज करके विश किया हैं।"

विकास को थोड़ा अजीब लगा कि बाकी सब कॉमेन्ट में विश कर रहे हैं, मजाक-मस्ती भी कर रहे हैं। फिर इस पवन को स्पेशल मैसेज करने की क्या जरूरत पड़ गई ?

विकास ने कहा- "कोई बात नहीं। पवन थोड़ा फ्लर्टी लड़का हैं, लेकिन बुरा लड़का नहीं हैं। अच्छा इन्सान हैं। फिर भी तुमसे कोई ऐसी-वैसी बात बोले तो मुझे उसी वक्त बता देना।"

सिमरन ने कहा- "ठीक हैं।"

दो दिन बाद शाम के टाइम पवन ने विकास के साथ फेसबुक पर बातें करते हुए कहा कि "ये सिमरन तो बहुत मस्त लड़की हैं यार, एक बार मिल जाये तो मजा आ जाये। क्या बातें करती हैं। उफ्फ,,,,, ऐसा माल तो कभी-कभार ही नसीब होता हैं। उसको बताना मत मेरी गर्लफ्रैंड हैं। बस एक बार इसे पटाकर इसके मजे ले लूँ, फिर बाद में तू समझा देना।"

यह मैसेज पढ़ते ही विकास गुस्से से पागल हो गया और पवन को फोन करके बोला- "नीच, घटिया, बैकार, गन्दे इन्सान कोई तेरी बहिन या तेरी माँ के भी इसी तरह मजे ले, तब तुझे कैसा लगेगा ? अगर मुझे पता होता कि तु इतना कमीना और गन्दी सोच वाला इन्सान हैं, तो मैं तुझसे कभी दोस्ती नहीं करता। अब आज के बाद मुझे कभी कोई मैसेज या कॉल बिल्कुल मत करना और मिलने के बारे में तो कभी सोचना भी मत। वरना मुँह तोड़ दूँगा।"

पवन बोलता रहा कि यार, मैं मजाक कर रहा था। मेरा वो मतलब नहीं था। तुने गलत मतलब निकाल लिया। अच्छा अब कभी उसको मैसेज नहीं करूँगा। बस इस बार माफ़ कर दें। एम सॉरी यार।

विकास पर पवन की बातों का कोई असर नहीं हुआ और पवन को बातें सुनाकर उसने फोन काट दिया।

पवन से बात करके विकास ने सिमरन को मैसेज किया- "क्या कर रही हो ?"

सिमरन- "कुछ नहीं।"

विकास- "कुछ नहीं। बैशर्म कहीं की। वो पवन के साथ क्या बातें कर रही हैं ?"

सिमरन- "अरे क्या हुआ ? वो खुद ही दो दिन से मैसेज कर रहा हैं। मैं बस उसे रिप्लॉय कर रही थी। और मैंने उसके साथ कोई ऐसी-वैसी बात नहीं की।"

विकास- "मुझे कुछ नहीं सुनना। मैंने तुम्हें साफ़-साफ़ कहा था कि अगर वो कोई ऐसी-वैसी बात बोले तो उसी वक्त मुझे बता देना। अब तुम्हें जिससे बात करनी हैं, जो बात करनी हैं, आराम से करो। मुझे कोई मतलब नहीं।"

विकास का मैसेज पढ़कर सिमरन ने विकास को कॉल किया, लेकिन विकास ने रिसींव नहीं किया। सिमरन के एक के बाद एक चार कॉल करने पर भी जब विकास ने कॉल रिसींव नहीं किया, तो सिमरन ने विकास को मैसेज किया कि "तुम्हें मेरी कसम। प्लीज कॉल रिसींव करो। मुझे तुमसे अभी बात करनी हैं।"

सिमरन के कसम देने के कारण पाँचवी बार कॉल आने पर विकास ने कॉल रिसींव कर लिया और रोते हुए सिमरन पर बुरी तरह चिल्लाने लगा- "तुम में अक्ल नहीं हैं। बाकी सब कॉमेन्ट में बात कर रहे हैं, बाकी सबको अपनी बातें सबके सामने बोलने में कोई प्रोब्लम नहीं हैं। तो उस एक पवन को प्राइवेट मैसेज करके क्या बात करनी हैं ? सच तो ये हैं कि तुम खुद उससे बात करना चाहती हो, तुम्हें उसकी बातें अच्छा लग रही हैं। इसलिए तुमने मुझे बताया भी नहीं। तुम्हें भी बैकार लड़कियों की तरह मजे करने और करवाने का शौक हैं।"

सिमरन एक-डेढ़ घंटे तक विकास की बातें सुनती हुई बीच-बीच में "अब मैं कुछ बोलूँ ? मुझे अपनी बात कहने का मौका दोगें या यू ही रो-रोकर अपना दिल जलाते रहोगें ?" बोलती रहती हैं।

आखिर में जब विकास चिल्ला-चिल्लाकर थक गया तो चुप होकर रोने लगा। सिमरन ने पहले प्यार से समझाकर पवन के साथ हुई शुरू से आखिर तक की एक-एक बात पूरी डिटेल में बताकर विकास का रोना बन्द करवाया।

विकास के चुप होने पर सिमरन ने कहा- "तुमने खुद कहा था ना कि वो अच्छा लड़का हैं, लेकिन थोड़ा फ्लर्टी हैं। तो मैंने उस हिसाब से ही बात की हैं और वो कुछ गलत बोला ही नहीं, इसलिए मैंने तुम्हें बताया नहीं। उसने बस तुम्हें मेरे बारे में कुछ गलत बोला हैं।"

सिमरन की बातें सुनकर विकास ने रोना तो बन्द कर दिया, लेकिन झगड़ा अभी भी बन्द नहीं किया। अब चिल्लाने की बारी सिमरन की थी। आखिर चार घंटे तक फोन पर जमकर झगड़ने के बाद विकास का गुस्सा ठंडा हुआ।

सिमरन ने कहा- "अब दुबारा कभी ऐसा कुछ हो तो सबसे पहले मुझसे बात करना। हमारी दोस्ती में किसी तीसरे का क्या काम ?"

विकास ने सिमरन की बात से सहमत होकर झगड़ा खत्म कर लिया।

इसके बाद विकास ने पवन से बात करना बिल्कुल बन्द कर दिया। पवन ने बहुत कोशिश की, लेकिन विकास ने उसे माफ़ नहीं किया। आखिर में पवन ने अपनी गर्लफ्रैंड को सारी बात बताई। पवन की गर्लफ्रैंड ने विकास से बात करके पवन की तरफ़ से माफ़ी माँगी। तब जाकर विकास ने पवन को माफ़ किया। विकास को मनाने के बाद पवन ने सिमरन से भी माफ़ी माँगी और फिर दूबारा कभी सिमरन से बात नहीं की।

इस झगड़े के बाद सिमरन सोचने लगी कि कहीं विकास को मुझसे प्यार तो नहीं हो गया हैं। मेरे कारण अपने एक बहुत अच्छे दोस्त से इतनी नाराजगी। और उस रात मुझ पर किस तरह, कितने हक से चिल्ला रहा था। मेरे लिए कितनी बुरी तरह रो रहा था। कुछ समझ नहीं आ रहा ? इस बारे में विकास से बात करूँ, तो कैसे करूँ ? कहीं ये सिर्फ एक दोस्त की दूसरे दोस्त के लिए चिन्ता तो नहीं, जिसे मैं प्यार समझ रही हूँ।

एक महिने इस उलझन में गुजारने के बाद सिमरन ने पहले घुमा-फिराकर इशारों में और आखिर में साफ़-साफ़ विकास से पूछ लिया कि क्या तुम मुझसे प्यार करते हो ?

विकास ने साफ़-साफ़ कुछ नहीं कहा और सवाल को टाल दिया।

इस बीच सिमरन के घर में सिमरन की शादी की बात चलने लगी। सिमरन ने ये बात विकास को बताई। विकास समझ नहीं पाया कि वो सिमरन से क्या कहें ? विकास अभी तक सिमरन के सवाल का जवाब तलाश रहा हैं। विकास की लड़खड़ाती बातों में सिमरन को अपने लिए प्यार नजर आने लगता हैं।

सिमरन भी विकास पर दवाब डालने लगी कि "तुम अपने दिल की बात कहते क्यों नहीं हो ?"

लगभग एक महिने तक सिमरन के सवालों में उलझ कर विकास ने फैसला किया कि वो सिमरन से प्यार नहीं करता। सिमरन एक अच्छे पैसे वाले घर की बहुत पढ़ी-लिखी लड़की हैं। उसे जिन्दगी में कभी किसी चीज की कोई कमी नहीं रही। मैं उसे क्या खुशी दे पाऊँगा ? मेरे घर में बीमार माँ-बाप, छोटी बहिन की जिम्मेदारी, एक-एक रुपया सतर बार सोच-सोच कर खर्च करना पड़ता हैं। मेरे साथ उसे मुसीबतों के सिवा और कुछ नहीं मिलने वाला। अगर किसी तरह मेरी शादी उसके साथ हो भी गई तो शादी के बाद अगर वो मेरे साथ एडजस्ट नहीं कर पाई तो उससे दुर होना मुझसे सहन नहीं होगा। इसलिए अच्छा यहीं हैं कि मैं उसका दोस्त बनकर हमेशा उसके दिल के पास रहूँ और वो किसी अच्छे इन्सान से शादी करें, जो उसे दुनिया की हर खुशी दे सकें। जो उसकी हर जरूरत पूरी कर सकें। मैं किसी भी तरह से सिमरन के लायक नहीं हूँ।

विकास ने सोच तो लिया कि वो सिमरन से प्यार नहीं करता। लेकिन वो ना तो सिमरन को इन्कार कर पा रहा हैं और ना ही इजहार कर पा रहा हैं।

सिमरन भी ये शादी नहीं करना चाहती, लेकिन घरवाले बार-बार उस पर शादी के लिए हाँ बोलने का दवाब डालते हैं। आखिर में मम्मी-पापा के बहुत जोर देने पर सिमरन शादी के लिए हाँ बोल देती हैं।

कुछ दिनों बाद सिमरन के पापा अपने एक दोस्त के बेटे के साथ सिमरन की शादी तय कर देते हैं।

सिमरन उस लड़के के बारे में विकास को बताती हैं कि उसका नाम शैलैश हैं। मैं उसे बचपन से जानती हूँ और वो मुझे पसन्द भी करता हैं। तीन भाईयों में वो दूसरे नम्बर पर हैं। अपने पापा का सारा बिजनेस वहीं संभालता हैं।

विकास ने सिमरन से पूछा- "क्या तुम भी शैलेश को पसन्द करती हो ?"

सिमरन- "मम्मी-पापा ने उसे मेरे लिए पसन्द किया हैं, तो मेरा अच्छा सोचकर ही पसन्द किया हैं। फिर मैं उसे क्यों नापसन्द करूँ ?"

विकास- "ये भी सही हैं। अच्छा शैलेश जी को सन्देश के बारे में पता हैं।"

सिमरन- "हाँ, उसे सब पता हैं।"

सिमरन का रिश्ता होने के बाद विकास अक्सर सिमरन से शैलेश के बारे में पूछता हैं। सिमरन हमेशा शैलेश के बारे में बात करने से कतराती हैं।

विकास के जोर देने पर थोड़ा बहुत बताती कि आज शैलेश का मैसेज आया, आज शैलेश मिलने के लिए बोल रहा था।

विकास पूछता हैं कि तुमने क्या कहा ?

सिमरन कहती हैं कि कुछ नहीं, शादी के बाद उसके साथ ही तो रहना हैं।

विकास को लगा कि सिमरन की शैलेश से शादी होनी तो अब फिक्स हैं। इसलिए सिमरन का शैलेश को इस तरह इंग्नोर करना ठीक नहीं। कहीं इन बातों के कारण इन दोनों में दूरी ना बन जायें।

यह सोचकर विकास सिमरन को शैलेश से बात करने के लिए, शैलेश से मिलने के लिए जोर देने लगा। सिमरन ज्यादातर विकास की बातों को टालने की कोशिश करती हैं, लेकिन कभी-कभी विकास के जिद करने पर वो शैलेश को मैसेज कर देती हैं।

आखिर विकास की कोशिश का असर होने लगता हैं। धीरे-धीरे सिमरन और शैलेश में बातें होने लगी और कभी-कभी दोनों मिलते भी हैं।

सिमरन के दिल और दिमाग में सन्देश, विकास और शैलेश को लेकर उलझने बढ़ने लगती हैं। अभी तक उसे विकास की बातें ही समझ नहीं आ रही हैं। विकास की बातों में हमेशा उसे अपने लिए प्यार और अपनापन नजर आता हैं, लेकिन अगर विकास के दिल में प्यार हैं, तो वो मुझे शैलेश के करीब जाने के लिए क्यों बोलता हैं ?

अपनी उलझन को सुलझाने के लिए सिमरन ने अपनी कसम देकर विकास से कहा- "तुम्हें मेरी कसम। सच-सच बताओ, तुम मुझसे प्यार करते हो या नहीं ?"

सिमरन की बात सुनकर विकास के दिमाग में सन्नाटा छा जाता हैं।

सिमरन ने बार-बार कहा- "तुम्हें मेरी कसम विकास । प्लीज कुछ बोलो।"

विकास ने गंभीर होकर कहा- "पहले तुम मुझसे प्रोमिस करो, मेरी बात सुनने के बाद तुम मुझसे दोस्ती कभी नहीं तोड़ोगी। क्योंकि मैं तुमसे दूर रह सकता हूँ, लेकिन तुम्हारे बिना नहीं रह सकता।"

सिमरन- "तुम्हारे बिना तो अब मैं भी नहीं रह सकती। सन्देश के बाद मुझे अगर किसी के दिल में अपनी तस्वीर नजर आई हैं, तो वो सिर्फ तुम हो। मैं जानती हूँ, तुम्हें भी मुझसे (रोते हुए) प्यार हो गया हैं।"

विकास- "जब जानती हो तो रो क्यों रही हो ? तुमसे प्यार करने वाला तुम्हारी आँखों में आँसू कैसे देख सकता हैं ?"

सिमरन- "तुम पहले क्यों नहीं बोले ?"

विकास- बोला तो था। मैं तुम्हें खुश देखना चाहता हूँ। अब शैलेश जी के साथ तुम खुश नजर आ भी रही हो।"

सिमरन ने अपने आँशु पोंछकर कहा- "तुम सन्देश के बारे में भी जानते हो और शैलेश के बारे में भी। लेकिन इतना याद रखना मेरी जिन्दगी में पहले कोई आया था और अब कोई आने वाला हैं। लेकिन तुम्हारे लिए मेरे दिल में एक खास जगह हैं और वो जगह हमेशा सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी ही रहेगी।"

विकास- "मुझे बस यहीं चाहिए। वरना लोग कई सालों तक साथ रहकर भी एक-दूसरे के दिल में जगह नहीं बना पाते और हम कभी मिले बिना ही एक-दूसरे के दिलों में बस गये।"

सिमरन- "लेकिन तुम प्रोमिस करो। मेरे मरने से पहले एक बार मुझसे मिलने जरूर आओगे।"

विकास- "अरे तुम मरने की बातें क्यों बोलती हैं ? पहले भी तुम्हें कितनी बार बोल चुका हूँ।"

सिमरन- "नहीं, तुम पहले प्रोमिस करो।"

विकास- "किया, अगर तुम नहीं कहती तब भी तुमसे मिलने जरूर आता। लेकिन तुम शादी के बाद इस दोस्त को भूल तो नहीं जाओगी ?"

सिमरन- "हम्म.....एक डायलॉग बोलूँ ?"

विकास- "बोलो।"

सिमरन- "हम्म.....मैं तुम्हें भुल जाऊँ, ये हो नहीं सकता। और तुम मुझे भूल जाओ, ये मैं होने नहीं दूँगी। हाहाहाहा....."

विकास- "अरे तुम धमकी भी देती हो ?"

सिमरन- "हम्म.....डराना भी तो जरूरी हैं।
दोनों तरफ से हँसी गुँजने लगती हैं।"

देखते-देखते समय गुजरता हैं। धीरे-धीरे शैलेश और सिमरन भी एक-दूसरे के करीब आ जाते हैं। विकास भी सिमरन को खुश देखकर बहुत खुश हैं। कुछ समय बाद शैलेश के साथ सिमरन की सगाई हो गई। सिमरन की सगाई होने के कुछ दिनों बाद अचानक विकास के दिमाग में सिमरन के पास रहने का ख्याल आया।

विकास सोचने लगा कि जहाँ सिमरन रहेगी, मैं भी वहीं उसके आस-पास कहीं ना कहीं घर खरीदकर या घर किरायेपर लेकर रह लूँगा। जब काम-धंधा सेट हो जाएगा, तो घरवालों को भी वहीं बुला लूँगा। वैसे भी यहाँ अपना हैं ही कौन ? परिवार और रिश्तेदारों में कोई हमें पसन्द नहीं करता। व्यवहार और स्वभाव अच्छा रहा तो अपने तो वहाँ भी बन ही जाएगें।

विकास ने सब सोच तो लिया और विकास के लिए ये कोई मुश्किल भी नहीं हैं। लेकिन घर में सबको कैसे समझायें ? और अगर किसी को ये बात बताएगा तो हर कोई विकास को बैवकूफ बोलकर ऐसा ना करने की ही सलाह देगा। इसलिए विकास बिना किसी को बताए जयपुर की नौकरी छोड़कर पुणे जाने की तैयारी कर लेता हैं। विकास ने फैसला किया कि पहले पुणे में सब सेट करके फिर सबको बताऊँगा।

जयपुर से रवाना होते समय विकास ने सिमरन को अपने पुणे आने के बारे में बताया। सिमरन भी विकास के इस अचानक लिए गये फैसले के बारे में जानकर परेशान हो गई।

विकास ट्रेन में बैठकर रवाना हो चुका हैं, इसलिए अब विकास को रोकने का कोई मौका नहीं हैं। विकास के मन में किसी तरह की कोई टेन्शन या परेशानी जरा भी नहीं हैं। विकास तो बस पहली बार सिमरन से मिलने की खुशी में ही खोया हुआ हैं। सिमरन विकास के पुणे में रहने-खाने की प्रोब्लम के बारे में सोचकर थोड़ी परेशान जरूर हैं, लेकिन विकास से मिलने की खुशी में वो भी फूली नहीं समा रही हैं।

विकास पुणे पहुँचकर सिमरन को फोन करता हैं। सिमरन एक रेस्टोरेन्ट का पता बता कर विकास को रेस्टोरेन्ट में बुलाती हैं और खुद किताबें खरीदने का बहाना करके घर से निकल आई।

सिमरन बस से उतरकर विकास के सामने आकर खड़ी होती हैं। दोनों एक-दूसरे की आँखों में डूबकर खो जाते हैं। कुछ देर बाद दोनों का ध्यान टूटा और सिमरन विकास को सामने के रेस्टोरेन्ट में ले आई। खाने का ऑर्डर देकर सिमरन ने विकास के सामने सवालों की झड़ी लगा देती हैं कि ऐसे अचानक तुम्हारे दिमाग में क्या आया, जो इस तरह जॉब छोड़कर चले आए ? अब रहोगे कहाँ ? यहाँ क्या करोगे ? मैं भी अपनी शादी में बिजी हूँ, वरना कुछ हेल्प कर देती।

विकास ने चुपचाप सिमरन की बातें सुनकर अंत में कहा- "तुम परेशान क्यों हो रही हो ? जो यहाँ तक आया हैं, वो आगे भी रास्ते तलाश कर लेगा। मुझ पर भरोसा नहीं हैं तुम्हें कि मैं खुद को संभाल सकता हूँ या नहीं ?"

सिमरन- "वो सब ठीक हैं, तुम पर भरोसा भी हैं। लेकिन तुम यहाँ मेरे सिवा किसी को जानते भी नहीं हो, लेग्वेंज प्रोब्लम।"

विकास- "अच्छा ये सब छोड़ो. तुम मुझसे मिलना चाहती थी ना. तो अब मुझसे मिलकर खुश नहीं हो ?"

सिमरन ने मुस्कुराकर कहा- "नहीं, बिल्कुल नहीं। मुझे नहीं मालूम था, तुम इस तरह अचानक जॉब छोड़कर आओगे।"

विकास ने अपना बैग उठाकर कहा- "ठीक हैं। फिर मैं वापस चला जाता हूँ।"

सिमरन ने विकास का हाथ पकड़कर कहा- "रूको और बैठो यहाँ। अब आ गये हो तो कहीं नहीं जाना। कुछ दिन यहाँ रुको, फिर वापस चले जाना।"

विकास- "कुछ दिन नहीं, अब तो हमेशा यहीं रहूँगा। तुम्हारे पास। जहाँ तुम रहोगी वहीं।"

सिमरन- "तुम बिल्कुल पागल हो। ऐसे नहीं होता।"

विकास- "क्यों ? क्या प्यार का मतलब सिर्फ किसी से शादी करके किसी को हासिल करना हैं ? (हँसकर) हम पड़ौसी बनकर भी तो पास रह सकते हैं।"

सिमरन ने मुस्कुराकर कहा- "हम्म.....और सब लोग पूछेंगे नहीं, ये लड़का सिमरन के पड़ौस में आकर ही क्यों रूका हैं ?"

विकास- "वो सब बाद में सोचे। हाँ, अगर तुम्हें मेरी वजह से कोई प्रोब्लम हो, तो बता देना। मैं खुद तुम्हारी जिन्दगी से दूर हो जाऊँगा।"

सिमरन- "ओहो.....तुम हर बार अपने बारे में सफाई क्यों देते हो ? मुझे पता तुम कभी ऐसा कुछ नहीं करोगे, जिससे मुझे किसी तरह की कोई प्रोब्लम हो।"

विकास- "तो फिर डर क्यों रही हो ?"

सिमरन- "अरे मैं अपने लिए नहीं, तुम्हारे बारे में सोचकर डर रही हूँ।"

विकास- "हाहाहाहा.....(हँसकर) अच्छा, अब डरना छोड़ो और खाना खाओ।"

खाना खाकर दोनों कुछ देर एक पार्क में बैठकर बातें करते हैं। विकास और सिमरन एक-दूसरे से बातें करते-करते इतने खो गये कि दोनों को पता ही नहीं चला कब दोपहर से शाम हो गई।

शाम को सिमरन के मोबाइल पर सिमरन की मम्मी का फोन आया और उन्होंने सिमरन से पूछा- "कहाँ रह गई, शाम होने वाली हैं ?"

सिमरन ने कुछ देर में घर आने का बोला और अपने कुछ दोस्तों से पूछ कर विकास को ३-४ सस्ते होटलों के बारे में बताकर घर चली गई।

विकास सिमरन के बताए होटल में जाकर एक कमरा लेकर रूक गया और अगले दिन से पुणे में कोई जॉब तलाश करने लगता हैं। विकास जहाँ भी जाता हैं, उसे अनुभव के आधार पर जॉब के लिए पसन्द तो कर लेते हैं, लेकिन आखिर में गारन्टर पर आकर बात अटक जाती हैं। सब यहीं बोलते हैं कि "आपको यहाँ कोई जानता हैं तो उसे साथ ले आओ, ताकि वो आपकी गारन्टी लेले। फिर जॉब तो आपकी पक्की हैं।"

सिमरन ४-५ दिनों के अंतराल से विकास से मिलती हैं। कई जगह विकास के साथ जॉब के लिए गई भी। सिमरन ने अपने ४-५ दोस्तों से भी विकास की जॉब के लिए बात करती हैं, लेकिन किसी ने सैलरी बहुत कम दो-तीन हजार तक ही बताई और किसी ने अन्जान होने के कारण बहाना बनाकर टाल दिया। करीबी लोगों से सिमरन बात नहीं कर सकती, क्योंकि इससे सिमरन के घरवालों को विकास के बारे में पता चलने की संभावना हैं। इस तरह हर जगह बस कोई गारन्टी लेने वाला नहीं होने के कारण विकास को कोई जॉब नहीं मिली और एक महिना निकल जाता हैं।

सिमरन की शादी का वक्त नजदीक आ गया और सिमरन की शादी गाँव में होनी हैं, इसलिए सिमरन के घरवाले गाँव जाने की तैयारी कर रहे हैं। सिमरन विकास को लेकर परेशान हो रही हैं कि "मेरे गाँव जाने के बाद वो यहाँ कैसे रहेगा ? ज्यादा पढ़ा-लिखा भी नहीं हैं, इसलिए आसानी से अच्छी जॉब मिलना भी बहुत मुश्किल हैं।"

सिमरन ने फैसला किया कि वो विकास को राजस्थान वापस जाने के लिए समझाएगी।

गाँव जाने से चार दिन पहले सिमरन ने एक पार्क में विकास को मिलने के लिए बुलाया और उसे वापस राजस्थान जाने के लिए समझाने लगी। लेकिन विकास वापस नहीं जाने की जिद पकड़कर बैठ गया।

विकास ने कहा- "नहीं, मैं वापस नहीं जाऊँगा, मैं वहीं रहूँगा, जहाँ तुम रहोगी।"

सिमरन- "तुम समझते क्यों नहीं ? अगर तुम्हें यहाँ पुणे में जॉब मिल भी गई तो यहाँ अकैले कैसे रहोगे ? और शादी के बाद शैलेश कहाँ रहेगा ? मैं शैलेश के साथ रहूँगी या ससुराल में रहूँगी ? ये सब मुझे भी नहीं पता। तुम कहाँ-कहाँ मेरे पिछे भटकते फिरोगे ?"

विकास- "मैं रह लूँगा कहीं भी। तुम भी तो पहले यहीं बोलती थी, काश ! हम साथ रह सकते। अब क्या हो गया ?"

सिमरन- "हाँ, कहती थी। और अब भी कहती हूँ। लेकिन ये पॉसिबल नहीं हैं और मैं तुम्हें इस तरह छोड़कर नहीं जा सकती। तुम यहाँ रहोगे तो इधर मैं तुम्हारे बारे में सोचकर परेशान रहूँगी और उधर राजस्थान में तुम्हारे घरवाले परेशान रहेंगे। इसलिए बोल रही हूँ, वहाँ जयपुर में तुम्हारी जान-पहचान हैं, वहाँ तुम आसानी से कोई ना कोई जॉब ढूँढ लोगें।"

विकास ने मायूसी भरी आवाज़ में कहा- "लेकिन मैं तुम्हारे पास रहना चाहता हूँ।"

सिमरन ने सर पकड़कर कहा- "ये क्या तुम बच्चों की तरह जिद पकड़कर बैठे हो। जब सबको पता चलेगा तो क्या कहेंगे सबसे ?"

विकास- "वहीं, जो सच हैं। जब हमारे बीच में कुछ गलत नहीं हैं ही नहीं, तो क्या प्रोब्लम होगी ? अगर कोई कुछ बोलेगा तो हम उनको समझा देंगे। हमें कौनसे प्यार के नाम पर नाजायज़ रिश्ते बनाने हैं, जो सबसे छुपाने पड़ेगें।"

सिमरन- "कोई नहीं समझेगा। मैं तुम्हें जानती हूँ। मुझे पता हैं तुम कुछ गलत करना तो बहुत दूर की बात हैं, तुम कुछ गलत सोचते भी नहीं हो। सिर्फ मेरे लिए ही नहीं, तुम किसी के लिए बुरा नहीं सोचते। लेकिन बाकी सब लोग ये नहीं जानते। हमें कोई नाजायज़ रिश्ते नहीं बनाने, लेकिन बाकी सब हमें गलत ही समझेगे। तुमने यहाँ देखा ना, हर बात में परफेक्ट होने के बाद भी सिर्फ कोई गारन्टर नहीं होने के कारण तुम्हें जॉब नहीं मिल रही।"

विकास- "मैं कोशिश कर रहा हूँ ना। आज नहीं तो कल, कहीं ना कहीं, कोई ना कोई जॉब मिल जाएगी। फिर भी अगर कोई जॉब नहीं मिली तो मजदुरी कर लूँगा।मजदूरी करने में तो गारन्टी की जरूरत नहीं पड़ेगी ना।"

सिमरन- "हे भगवान! लेकिन तुम यहाँ रहकर करोगे क्या ? तुम यहाँ मेरे लिए आये हो और मैं खुद चार दिन बाद गाँव जा रही हूँ। २२ दिन बाद मेरी शादी हैं। शादी के बाद का अभी कुछ पता नहीं। फिर तुम यहाँ अजनबी शहर में बिना जान-पहचान के रहोगें ? तुम एक बात बताओ, तुम यहाँ अचानक कैसे चले आये ? ऐसी क्या बात हो गई ?"

विकास चुप होकर सिमरन से नजरें चुराकर इधर-उधर देखने लगता हैं।

सिमरन विकास का हाथ थामकर दूसरे हाथ से विकास का चेहरा अपनी तरफ करके बोली- "मेरी तरफ देखो और बताओ, क्या बात हैं ? मैं जानती हूँ, तुम मुझे पाने के लिए या मुझसे शादी करने के लिए यहाँ नहीं आए। मेरी और शैलेश की शादी से भी तुम खुश हो। फिर ऐसी क्या बात हैं, जो तुम अचानक हमेशा मेरे आस-पास रहने का फैसला करके यहाँ चले आये ?"

विकास ने सिमरन की आँखों में देखकर कहा- "मैं डर गया था। तुम्हारी सगाई के बाद मैं डर गया। मुझे लगा तुम शादी के बाद मुझे भुल जाओगी। इसलिए मैं अचानक यहाँ आ गया। मैंने सोचा हमेशा तुम्हारे आस-पास रहूँगा तो तुम मुझे हमेशा याद रखोगी।"

सिमरन ने मुस्कुराकर विकास के माथे से अपना माथा टकराकर कहा- "तुम्हें सन्देश के बारे में बताया हैं ना मैंने। उसे गये हुए इतने साल गुजर गये, तो क्या मैं सन्देश को भूल गई। उससे तो अब कभी बात भी नहीं कर सकती। तुमसे तो मैं जब चाहूँ बात कर सकती हूँ। टाइम निकाल कर मिलने के लिए राजस्थान भी आ सकती हूँ। अगर मैं ना आ सकूँ तो तुम्हें बुला सकती हूँ। हम्म...."

विकास चुप रहता हैं।

सिमरन- "अच्छा ये बताओ। इस बात की क्या गारन्टी हैं, तुम मेरे आस-पास रहोगे तो मैं तुम्हें नहीं भूलूंगी ?"

विकास कुछ नहीं बोला।

सिमरन- "हम्म....बोलो-बोलो। हैं कोई गारन्टी ? भुलने वाले तो पास क्या, एक घर में साथ रहकर भी भूल ही जाते हैं। मैंने कई ऐसे घर देखे हैं, जिनमें फैमिली मेम्बर्स को पता ही नहीं होता, घर में कोई उदास हैं, कोई परेशान हैं, कोई खुश हैं और तुम्हें मीलों दूर रहकर भी मेरी उदासी, मेरी खुशी का एहसास हो जाता हैं।"

विकास- "हम्म.....ये भी सही हैं। मतलब तुम कसम खाकर आई हो कि मुझे वापस भेजना ही भेजना हैं।"

सिमरन-"हाँ, लेकिन सिर्फ वापस भेजना हैं। मुझसे दूर नहीं भेजना। समझे।"

विकास ने नजरें फेरकर कहा- "समझ गया, मैं वापस चला जाऊँगा। अब ठीक हैं।"

सिमरन ने मुस्कुराकर कहा- "हम्म.....और मुझसे वादा करो, कभी खुद को अकैला नहीं समझोगे।"

विकास- "वादा।"

सिमरन- "कभी खुद को तकलीफ नहीं दोगें।"

विकास- "वादा।"

सिमरन- "कभी हिम्मत नहीं हारोगे।"

विकास- "वादा।"

सिमरन- "कुछ करके, कुछ बनकर दिखाओगे।"

विकास- "वादा।"

सिमरन- "कभी हार नहीं मानोगे, हमेशा आगे बढ़ने की कोशिश करते रहोगें।"

विकास- "वादा।"

सिमरन- "हम्म....."

विकास ने सिमरन की तरफ़ देखकर कहा- "और भी कोई वादा बाकी हैं, तो वो भी बता दो।"

सिमरन कुछ बोले बिना विकास को गले लगा लेती हैं।

विकास- "आई लव यू सिमरन।"

सिमरन- "लव यू टू। (आँखों में आँसू और नम आवाज़ में) कभी ये मत समझना कि मैं तुम्हें भूल गई।"

विकास- "(आँखों से बहते आँसुओं के साथ नम आवाज़ में) कभी नहीं। और तुम भी ये मत समझना, मैं हमेशा के लिए जा रहा हूँ। मैं सिर्फ तुमसे दूर जा रहा हूँ, तुम्हारी जिन्दगी से दूर नहीं जा रहा।"

सिमरन- "मेरी जिन्दगी से दूर मैं तुम्हें कभी जाने भी नहीं दूँगी।"

दोनों की आँखों से हल्के-हल्के आँसू बहते रहते हैं।

कुछ देर बाद विकास ने अलग होकर कहा- "अच्छा, अब चले। तुम्हें घर भी जाना होगा।"

सिमरन- "हम्म....मैं तुम्हें कॉल और मैसेज करती रहूँगी। तुम भी मिलने आते रहना। अगर सब ठीक रहा तो हम शैलेश को भी सब बता देंगे।"

विकास ने सिमरन के आँसू पोंछते हुए कहा- "तुम चिन्ता मत करो, तुम बस अब अपनी आने वाली जिन्दगी के बारे में सोचो। कभी मौका मिला तो शैलेश जी से जरूर मिलूँगा।"

सिमरन- "अच्छा, अब मैं चलती हूँ। तुम अपना ख्याल रखना।"

विकास- "तुम भी अपना ख्याल रखना और हमेशा खुश रहना।"

सिमरन और विकास दोनों एक-दूसरे आँसू पोंछते हुए पार्क से बाहर आते हैं और सिमरन बार-बार पलट कर विकास को देखते हुए आँखों में आँसू लिये बस स्टॉप की तरफ चली जाती हैं। विकास वहीं खड़ा रहकर नम आँखों से उसे जाते हुए देख रहा हैं।

**********
समाप्त
लेखक - वर्मन गढ़वाल



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