72
Share




@dawriter

एकाधिकार

0 888       

नौकरीशुदा महिमा शादीशुदा भी थी।
एकल परिवार था तो बच्चे के जन्म के समय पति को भी छुट्टी लेनी पड़ी। लेकिन जॉब की प्रकृति ऐसी थी की ज्यादा लंबी छुट्टी संभव न थी। इधर महिमा की हालत ऐसी न थी की वो अकेले खुद और बच्चे की देखभाल कर सके।
नतीजन नौकरी छोड़नी पड़ी।
छह महीने बाद महिमा तो नौकरी पर वापस चली गई। लेकिन पति को उनके उच्चवर्गीय पोस्ट के कारण जॉब मिलने में दिक्कत आ रही थी।
ये अंतराल साल भर का हो गया। यों उसकी अनुपस्थिति में पति महाराज बेबी को अच्छे से संभाल लेते थे जिससे वो निश्चिंत होकर ड्यूटी कर पा रही थी।
आज का दिन कुछ बुरा था एसी खराब था तो बेबी रोए जा रही थी। महिमा अभी अभी ऑफिस से आई थी उसने दूध पिलाकर चुप कराना चाहा लेकिन गर्मी से परेशान दोनों खीझ चुके थे। बेबी के रोने का वाल्यूम और बढ़ गया।

पतिदेव ने बेबी को लेने के लिए हाथ बढ़ाया "लाओ मुझे दो इसे और तुम चाय बना लो। "
गर्मी महिमा के सर पर चढ़ गई "हाँ दिन भर नौकरी करो, बच्चे पालो और फिर तुम्हारी चाय भी बनाओ। "
उसने बच्चे को ले लिया और उसकी आँखों में आग देखकर चुप हो गया। फिर हिम्मत कर बोला "फ्रिज में रसना रखा है पी लो। "
रसना थोड़ी राहत दे गया तो उसने धीरे से उसके कंधे पर हाथ रखा "ऑ एम सॉरी राकेश "
राकेश का स्वर सर्द हो गया "नहीं तुम बताओ बेबी सिर्फ मेरी है। क्या ये सच नहीं की नौकरी तुम घर चलाने के लिए नहीं अपने अहं की संतुष्टि के लिए करती हो। "
उसने माहौल को हल्का करने की कोशिश की " ओह्हो तो ये बात है जनाब का मेल ईगो हर्ट हो गया। "
तीखे बोलों को सुनकर बेबी रोना भूल दोनों को टुकुर टुकुर ताकने लगी।
राकेश उसे चूमते हुए मुस्कुराया " क्यों सम्मान पर महिलाओं का एकाधिकार है क्या। "



Vote Add to library

COMMENT