78
Share




@dawriter

उधार की जिंदगी

0 683       
rajmati777 by  
rajmati777

शादी का खुशनुमा माहौल, चारों तरफ शहनाई की गूंज से संगीत मय सुहानी शाम। दिशा अपने आप को इस माहौल में सामंजस्य स्थापित करने में थोड़ा अनकम्फर्टेबल फील कर रही थी।

दिशा के भाई की शादी थी। कितने दिनों से दिशा तैयारी में लगी हुई थी। सारी तैयारियां पूरी हो गई और वह अपने मायके शादी अटेंड करने पहुंची। यतिन बडे प्यार से उसको छोड़ने आया। दिशा बहुत खुश थी।

मायका में पैर रखते ही वह इतनी खुश लग रही थी। चिड़िया की तरह पंखों को फैला वह कभी इधर तो कभी उधर उछल कूद कर रही थी। अपनी सारी चिंता भूल हर लम्हा को वह जीना चाहती थी।

सुबह शादी की रस्में शुरू होने वाली थी, इसलिए वो रात को यतिन के साथ बाबुल के आंगन में जल्दी ही सो गई। पति का साथ हो तो कौन औरत ख़ुश नहीं होंगी। 

सुबह शादी की रस्में शुरू हुई। दिशा और यतिन अच्छे से तैयार हो कार्यक्रम में शामिल हुए। दोनों बहुत सुन्दर लग रहें थे। लाल साड़ी में लिपटी दिशा की खूबसूरती निखर कर सामने आ रही थी। तभी यतिन उसके पास आया, और बोला,"दिशा मैं आज ही यहां से निकल जाऊंगा, मुझे बहुत काम है, मैं शादी के रिसेप्शन में वापस आ जाऊंगा।"  ...."पर अभी क्या काम है वहां, आप कृपया रुक जाइए ना। आप के बगैर मुझे अच्छा नहीं लगेगा।"

  "नहीं मुझे जाना है, काम होते ही आ जाऊंगा।" दिशा की आंखों से अश्क बहने लगे, क्या करती, यतिन तो ज़िद पर बैठ गया। सबने रोकने की कोशिश की, पर वो नहीं माना।

दिशा गुमसुम हो गई, पर अपने आप को संभाल कर शाम की महिला संगीत की तैयारी में लग गयी। आज महिला संगीत का संचालन भी तो उसको ही करना था। दिशा की बहुत इच्छा थी कि यतिन उसकी डांस परफॉर्मेंस देखें, उसका संचालन देखें, पर ..............।

पर जो दिल की चाहत होती है वो कभी पूरी होती है क्या। कभी नहीं होती। दिशा का शाम का कार्यक्रम अच्छा रहा। वो बहुत खुश थी।

रात को बड़े आराम से बिना किसी टेंशन के सोई। कोई बात नहीं यतिन गया तो, उसने यतिन को डांस की वीडियो भेजी। यतिन का मैसेज आया, बहुत अच्छा डांस किया। तों वो इतनी खुश हुईं कि अपनी सब पीड़ा भूल गयी।

दूसरे दिन शादी की रात थी। सभी खुश थे। ढोल नगाड़ों की थाप से खुशियों की बहार फ़ैल रही थी। सभी अपनी धुन में मस्त हो नाच रहे थे।

तभी दिशा का फोन बजा, यतिन का था,"दिशा मैं दो बजे तक शादी में पहुंच जाऊंगा।"-----"पर तुम तो कल आने वाले थे, आज कैसे आ रहे हो।"

"बस, मैं आ रहा हूं,"....."पर तुम गये क्यों और आये क्यों ?"रुक ही जाते, अनावश्यक थकान हो गई।"

"तुम ये सब छोड़ो, मैं आ रहा हूं"। दिशा बहुत खुश हो रही थी। यतिन आया, बातों ही बातों से पता चला कि वो तो उसकी भाभी को छोड़ने गया था, इसलिए इधर आ गया। दिशा अन्दर ही अन्दर इतनी दुखी हुईं पर न तो रो सकती थी न कुछ बोल सकती थी। चुपचाप सब कुछ सहन कर सहमी सहमी सी उदास चेहरे पर नक़ली मुस्कान लिए सारे कार्यक्रम अटेंड किये‌।

यतिन की भाभी ने दिशा और यतिन की जिंदगी को बेरंग बना कर रख दिया था। यतिन भी दिशा की कोई बात नहीं मानता, कुछ कहती तो मना कर देता, पर उसकी भाभी की एक आवाज में उसके लिए तैयार हों जाता। दिशा के मन में विचार आता कि क्या रिश्ता है हमारा, शाय़द मैं तो उधार की जिंदगी जी रही हूं। न कुछ बोल सकती न कोई विरोध कर सकती।

 यतिन अपनी पत्नी से ज्यादा भाभी को महत्व देता। दिशा की हर बात पर बेइज्जती करता। वो किसी काम के लिए बोलती तो मना कर देता, पर भाभी का कोई काम मना नहीं करता। दिशा बहुत परेशान हो जाती, पर जिसका पति ही पत्नी का आदर नहीं करता, तो परिवार वाले भी उसका आदर नहीं करते हैं।

भाभी नाम के इस नाग ने इसकी जिन्दगी में जहर घोल दिया था।

दिशा यतिन से कुछ भी नहीं बोली, मन में दुःख था पर खुशी खुशी सारे कार्यक्रम अटेंड कर अपने मायके से विदा हो ससुराल आई। मन में यह संकल्प लेकर कि वो यतिन से इस विषय पर चर्चा नहीं करेंगी, पर उधार की जिंदगी भी नहीं जीयेगी।

अब अपने निर्णय स्वयं लेगी। और पति पत्नी का जो रिश्ता है, उस रिश्ते से बहुत दूर निकल अपने हिसाब से जिंदगी जियेगी।



Vote Add to library

COMMENT