Utkrisht shukla

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जिंदगी

जिंदगी तेरी बस यही कहानी कुछ नया नहीं है अब इसमें .........

मेला

मेले में मां बाप से बिछड़ने का दर्द सिर्फ वही जानता है जो कभी बिछड़ा हो....

आजादी

काश मेरी आजादी ऐसी हो..............

नज़र

उसकी नज़र से नज़र कौन मिलाए, जिससे नज़र खुद ख़ुदा न मिलाए।

कुछ पंक्तियां

ग़म का साथी शराब है और तन का साथी शब़ाब

घरेलू हिंसा: एक संकीर्ण सोच

........हमें महिलाओं के प्रति अपनी संकीर्ण सोच बदलनी होगी और बाहर निकलना होगा ऐसी रूढ़िवादी परम्पराओं से जो उन्हें सम्मान व बराबरी का दर्जा नहीं दे सकती हैं।..........

आत्मा-परमात्मा

भगवान हमारे आस पास ही है बस जरूरत है तो उसे महसूस करने की......

मुंतजिर

इंतज़ार करना हर शख्श के लिए आसान नहीं ......

कायनात

ये कायनात मुझसे है या मैं इस कायनात से हूं।

गुलाब

सदियों से इज़हार-ए-इश्क और मुहब्बत की दुनिया में गुलाब ने अपना वर्चस्व कायम रखा है।

सहर

कई बार हम जल्दबाजी में गलत फ़ैसले ले लेते हैं।

दोस्त

कुछ दोस्त जिंदगी के हसीन पलों में जिंदगी की तरह होते हैं।

Some info about Utkrisht shukla

  • Male
  • 10/02/1992

Become a 'Good Citizen'. नागरिकता संविधान का जबकि अच्छा नागरिक गुणों का विषय है।

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