swappy

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सुमन, तुम अभागन हो ....

सच्ची कहानी सुमन की, जो अभागन का दाग लिए दुनिया में आई और आज तक अभागन बन कर ही जी रही है .न न्याय की उम्मीद है न किसी चमत्कार की आशा.

उस शाम की चाय की वो प्याली

पति की आदतें मैं जानती नहीं थी, बस ये जरूर समझ आया कि वो शाम की चाय नहीं पीते थे। दिन गुज़रने लगे, वो ऑफिस चले जाते, मैं घर के काम करके कोई किताब पढ़ने में लग जाती। शाम को आकर वो अखबार में डूबे रहते और में टीवी या किताबोंं में। किसी की ज़िंदगी में क्या चल रहा है, ये दोनों ही नहीं जानते थे।

हाँ वो मेरा भाई था

एक सच्ची कहानी ,रिश्तों का चीरहरण करती हुयी, विश्वास तोड़ती हुई । अपनी कमजोरी और नासमझी के कारण जो मैंने झेला वो मैं नहीं चाहती दुनिया का कोई भी बच्चा सहे। अपने बच्चों को सुने, उनसे बात करें उनको एक सुरक्षित, खूबसूरत बचपन दें। ये उनका हक है और आपकी जिम्मेदारी।

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