sunita

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पश्चाताप की ज्वाला- (अन्तिम भाग )

एक दिन जीया की तबियत कुछ संभली तो रवीश ने कहा वह थोडी देर के लिए ऑफिस हो आते है , जीया की आँख भर आयी , “ तुम्हे मुझसे ज्यादी नौकरी की पडी है।” रवीश ने जीया की हालत देख कहा तुम नही चाहती तो नही जाऊंगा नौकरी करने , यही रहुंगा तुम्हारे पास थका हारा रवीश .......जीया के बेड पर ही सर रख सो गया।

पश्चाताप की ज्वाला -6

जीया को होश आ गया नर्स ने एक इन्जेक्शन लगाया ...डॉ0 ने कहा , “ अब यह थोडा ठीक है लेकिन यहाँ बिलकुल भी शोर न हो न ही इनसे ज्यादा बात की जाये यदि ऐसा हुआ तो इनकी हालत बिगड जायेगी ” , “ मै ख्याल रखुगा डॉ0 ” ....इसी कहानी में

पश्चाताप की ज्वाला -5

जीया रीया के पास ही रही उसे अपनी छोटी बहन के लिए दुख हो रहा था उसे यह उम्मीद न थी कि अब दीपक इतना गिर जायेगा कि पैसे न मिलने पर अपनी पत्नी को ही मारेगा , जीया के दिमाग पर तनाव हावी हे रहा था उधर नन्नू निक्कू के माँ -बाप का रोल निभा थपकी देकर लोरियां सुना रहा था।

पश्चाताप की ज्वाला -4

जीया ने यह बात छिपा ली थी कि दीपक ने उसे कितना टॉर्चर किया था अब वह जब भी सामने आता , जीया को वही सब याद आने लगता उस घूर्त की मक्कारी को देख जीया अपमानित महसुस करती और उस घडी को कोसती जब.....इसी कहानी में

पश्चाताप की ज्वाला -3

' तुम सही कह रहे हो कालू , लेकिन मै दीपक की कही हुई जगह पर नही जाना चाहता था। मैने जीया के लिए बहुत ही बडे डॉ0 से बात की थी लेकिन मेरी नही सुनी मेरी गैरहाजिर में इसने जरा क्या ध्यान रखा खुद को बडा हीरों बन रहा है , जबरन मेरे परिवार का सदस्य बन बैठा । ”

भीगा मन

आज शनिवार था सोचा था रचना को घुमाने ले जाऊगा पर इसने ऑफिस तक आना भी जरूरी न समझा एक बार आ जाती काश !

पश्चाताप की ज्वाला पार्ट-2

रिश्तों के भंवर में डूबती उतरती रिया और जीया दो बहनों की कहानी .....

पहली पत्नी

तुम्ही बताओ ननदियां तोहार भैया को छोड काहे चली गयी ..अब कहाँ है ओ का कौन पता बताये दे तो पूछेगे ओ से काहे छोड दिया बाबू को तोको कितना चाहे रहे ...जबसे

फिल्म

'अरे घनचक्कर चल कही हाथ साफ करते है बिलकुल फिल्म की माफिक ऐश करेगा अपुन दोनो बोल क्या करेगा ...क्यो नही दोस्त के लिए तो जान भी हाजिर तो फिर चल कल दोपहर नयी बिल्डिंग के पास में आना ........

हसीन बला -2

वो तुम्हे चाहती थी ! क्या ! कबीर आश्चर्य चकित !! “ अगर वह मुझे चाहती थी तो उसने कभी कहा क्यों नही मै तो उसी ऑफिस में था उससे हंसी मजाक करता रहता था उसने तो कभी जाहिर नही किया।”

पश्चाताप की ज्वाला

" ‎अरे!! यह तो बिल्कुल तुम्हारी तरह लगता है रीया तुम भी बचपन में ऐसी ही थी , माँ को दिखाते हुए बोली ! है न रीया जैसा " !

हसीन बला

"शुक्रिया..." कहते हुए झटपट उतर चल पडी पीछे मुड कर भी न देखा बारिश लगभग रूक सी गयी कौन थी वो हसीनं बला मै सिर्फ सोचता ही रहा उसके ख्यालों में डूबा कब घर के कारिडोर तक जा पहुचाँ पता ही न चला..

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