sunita

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पहली पत्नी

तुम्ही बताओ ननदियां तोहार भैया को छोड काहे चली गयी ..अब कहाँ है ओ का कौन पता बताये दे तो पूछेगे ओ से काहे छोड दिया बाबू को तोको कितना चाहे रहे ...जबसे

फिल्म

'अरे घनचक्कर चल कही हाथ साफ करते है बिलकुल फिल्म की माफिक ऐश करेगा अपुन दोनो बोल क्या करेगा ...क्यो नही दोस्त के लिए तो जान भी हाजिर तो फिर चल कल दोपहर नयी बिल्डिंग के पास में आना ........

हसीन बला -2

वो तुम्हे चाहती थी ! क्या ! कबीर आश्चर्य चकित !! “ अगर वह मुझे चाहती थी तो उसने कभी कहा क्यों नही मै तो उसी ऑफिस में था उससे हंसी मजाक करता रहता था उसने तो कभी जाहिर नही किया |”

पश्चाताप की ज्वाला

" ‎अरे!! यह तो बिल्कुल तुम्हारी तरह लगता है रीया तुम भी बचपन में ऐसी ही थी , माँ को दिखाते हुए बोली ! है न रीया जैसा " !

हसीन बला

"शुक्रिया..." कहते हुए झटपट उतर चल पडी पीछे मुड कर भी न देखा बारिश लगभग रूक सी गयी कौन थी वो हसीनं बला मै सिर्फ सोचता ही रहा उसके ख्यालों में डूबा कब घर के कारिडोर तक जा पहुचाँ पता ही न चला..

पश्चाताप...(कहानी भाग-1)

"क्या हुआ तू बताती क्यो नही माँ चीख रही थी माँ को ऐसे देख जीया ने बताया कि रीया ने दीपक से शादी कर ली है और वह उसके साथ उसके घर जा रही है तुम कभी उसकी शादी दीपक से नही करते इसलिए दोनों ने चुचचाप कोर्ट मैरिज कर ली है अगर वह उसको खुश देखना चाहते.........इसी कहानी में

लाल चुनरिया

एक नन्ही बच्ची की कहानी जिसे लाल चुनर से बहुत प्यार था पर एक दिन ........

जोगन-2

मैने जीवन में प्रभु को ही सबकुछ माना पर प्रभु ने मुझे माया में फंसा दिया मेरी जीवन नैय्या मझधार में है माता !! मै क्या करूं इतनी बेकल तो मै कभी न हुई कितनी बार लोगों के व्यंगों का सामना किया समाज से परे जा कर भी।

जोगन

एक दिन निम्मी ने देखा जोगन घर के बाहर खडी गीत गा रही है निम्मी को उसे देख क्रोध आया पहले की तरह प्यार नही। आज अच्छा मौका है निम्मी जल्दी से बाहर जा पंहुची , "ऐ जोगन यहां क्या शोर मचा रही हो जाओ कही ओर जाकर मांगों "

प्यार है तुमसे

हूं सो रही है नकचढी , चुपचाप बिस्तर के कोने में जा पडा कब नींद आयी पता ही नही चला रात को अजीब सी आवाज कान में पडी लाइट जलायी तो देखा रीना के मुंह से झाग निकल रहे थे उसे मुंह से अजीब सी आवाज आ रही थी ...... इसी कहानी से

खंडहर

एक बार मै बुखार में तड़प रहा था, वो शहर से दूर अपने किसी करीब की शादी में शामिल होने गयी थी मै घर पर अकेले था मां पहले ही मुझे छोड़ गांव में चली गयी थी। मेरी खांसी रुकने का नाम न लेती थी लगता मानो जान ही जायेगी पर उसे मेरी कोई परवाह न थी। Read more in the story.

वापसी

चल पड़े महाकाल से मिलने वहां पहुचें तो देखा माँ अादि शक्ति महाकाल के आगे हाथ जोड़ कर कड़ी उनसे विनती कर रही हैं.. "हे महाकाल आप तो काल के भी काल है !"

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