Siddharth Arora Sahar

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कौन आज़ाद है?

वो लाहौर से भागा तो अमृतसर में जा फंसा, उसपर बेटी के साथ बलात्कार का आरोप था। और वो अपनी बेटी से मिलने के लिए बेताब हुआ जा रहा था।

मोर्चा

रात एक बजे उस माँ को क्या सूझी कि कश्मीर में सोते अपने बेटे को जगा दिया। उस माँ को किसी अनहोनी की आशंका थी, जैसे कुछ बुरा होने वाला है

बौड़मसिंह मर गया

बौड़म जलेबी खाने से मर गया? वाकई?

कुलच्छनी

रमा आदतन गुस्से वाली थी, उसे गलत होता कुछ भी बर्दाश्त नहीं होता. वहीँ अपनी अल्हड़ मिजाजी की वजह से उसकी ताई उसे कुलच्छनी बुलाती थी. एक दिन जब उसने ताई के लड़के को अपनी छोटी बहन के होंठ चूमते देखा तो......

उलटी चप्पलें

मुसीबत घने कोहरे सी थी। चारों ओर नक्सलियों से घिरा एक पुलिस थाना, जिसमें इंचार्ज से लेकर सिपाही तक सब नई भर्ती। पिछले सारे पुलिसिए एक नक्सली हमले में ख़त्म हो चुके थे। सिवाए एक हवलदार के।

पिंजरा

उसको हर सोमवार के दिन आकर, पंछियों को स्वतंत्र करना सुहाता था। मुश्ताक़ की नज़र में वो बहुत भला आदमी था। पर भ्रम एक दिन सबके टूटते हैं।

दानी

उसके पास जागीरें थीं। और वो कंगाल हो गया। लेकिन उसके चेहरे से मुस्कराहट न हटी। क्योंकि जीत फिर भी उसी की हुई थी।

सगी

जहालत की ज़िन्दगी से वो तंग आ गयी थी। माँ हमेशा कहती थी कि तू अठरा की हो जाए तो तेरी शादी कर दूंगी, तेरे बाबूजी सीधे हैं, तेरी चाची चालाक है, तेरे चाचा बहुत अच्छे हैं; न जाने क्या-क्या समझाती रहती थी लेकिन, तीन साल पहले ही चली गयी।

Some info about Siddharth Arora Sahar

  • Male
  • 28/12/1992

सिद्धार्थ करीब दस साल से पढ़ने और लिखने के शौक को काम की तरह करते हैं। तीन साल से अपना लिखा ब्लॉग पर पहुँचाने लगे हैं। खुद को अति-प्रैक्टिकल मानते हैं इसलिए इनकी कहानियों में भी प्रैक्टिकल ज्ञान साफ़ झलकता है। प्राइवेट कंपनी में एडमिनिस्ट्रेटर हैं और अपने घर में कंटेंट राइटर। शार्ट स्टोरीज़ लिखते हैं, गज़लें लिखते थे, अब इन दिनों उपन्यास लिख रहे हैं। आगे क्या लिखेंगे इसका कतई कोई ज्ञान नहीं पर लिखते रहेंगे, इसका भरोसा है।

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