rajesh

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उठती उंगलियाँ

तुम्हारी विवेचना का तो यह अर्थ हुआ कि लड़कियां सुसराल न जाकर पितागृह में ही अपने कर्तव्य को निभाती रहे।" इसबार उसका बहनोई अनिरुद्ध ढाल बनकर आगे आए।

मैं बिकूँगा नहीं

उस अजनबी का स्वर यकायक हिसंक हो उठा----"क्या अपनी पत्नी को भी दाँव पर.......... ।"

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