nis1985
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मेरे अंदर का शून्य

मेरे अंदर का शून्य उस अनंत की ओर जाना चाहता है

यही तो इश्क है भाग-८

मंदिरी और आनंद की वो इश्क वाली नोकझोंक चल ही रही थी, हाय! उससे इश्क का रंग और भी गहरा हो रहा था दोनों के बीच

यही तो इश्क है भाग-७

"मंदिरी और आनंद दिल मे मोह्हबत के दिये जलाये अपने-अपने घर को चल तो दिये,लेकिन दोनों के दिल और और दिमाग मे अब शायद किसी और के लिए जगह ही नही बची थी,की कुछ और भी सुनाई दे,सिवाय एक दूसरे की धड़कनों के।

यही तो इश्क है भाग-६

"उफ्फ! क्या नजारा था, मानो ये पल बस यही रुक जाए, बस यही पर रुक जाए!!!

अंत्येष्टि

भावनाये गर शून्य हो जाये, उनकी अंत्येष्टि कर देना श्रेष्ठ है......

घरेलू हिंसा

आज भी हमारे देश में न जाने कितने कमलू जैसे दरिंदे भरे पड़े है जो दारु पीकर अपनी औरतो को प्रताड़ित करते है बेटा न पैदा करने पे, ये घटिया मानसिकता अभी भी १००% ख़त्म नहीं हुई है

यही तो इश्क है भाग-५

◆"इश्क के रंग में सराबोर होकर फाइनली मन्दिरी और आनंद माँ के साथ शॉपिंग को निकल पड़े।

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