nidhi510

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कविता अनुकृति

अपना अहम और कठोरता का त्याग कर इतना निर्मल हो जाना कि एक दूसरे में आत्मा के दर्शन कर लेना, ईश्वर को पा लेना है।

पगफेरा

अपनी बेटी को आर्थिक मानसिक व सामाजिक स्थिरता प्रदान करने के लिए एक माँ के संघर्ष की कहानी जहाँ दमाद सामाजिक मान्यताओं को तोड़ निभाता है बेटे होने का फर्ज ।

मौन

प्रेम तो स्वतः हो जाता है लेकिन उसका इजहार क्या उतना ही सरल है ?

अपेक्षाओं के बियाबान

मौत तो अटल सत्य है लेकिन एक प्रेम भरी तृप्त जिंदगी जी कर जाना और एक किसी के इज़हार का इंतज़ार करते हुए बिना कोई खूबसूरत याद लिए ,बिना कोई खूबसूरत याद दिए चले जाना, दोनों को एक दूसरे से जुदा करता है।

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