Nidhi khare

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सुनो, उल्टी आती है मुझे तुम्हारी सोच ।

ये सब सुनकर ही मैं अवाक् रह गयी...गुस्सा,दुःख, तरस,घिन ना जाने कितने भाव तूफ़ान की तेजी से मन में आने जाने लगे...पर मैं मुँह से कुछ नही बोल पायी ।।

प्रेम

बोलो करोगे ना मुझसे प्रेम मेरे बिखर जाने तक या मेरे संवर जाने तक।। करोगे ना मुझसे प्रेम जब प्रेम करने की कोई वजह नही होगी? क्या करोगे मुझसे इतना प्रेम कि मैं सिर्फ प्रेम का एहसास रख सकू दिल में... बोलो है साहस? मुझसे प्रेम करने का?

तलाश

नादान है वो लोग सारे जो तुम्हे मेरी कहानियों में तलाश करते हैं....

उस गाँव की स्त्रियां

इन क्षेत्रों में कुछ प्रतिशत ही परिवार हैं जो इस मानसिकता से दूररहते हैंपर ज्यादातर लोगो में ऐसी छोटी मानसिकता वाले कीड़े ही दिमाग में बिलबिलाते है।।।

दो बेज़ुबान - चीकू और मैं।

मुझे रोज़ चीकू याद आता है..उसकी बड़ी बड़ी लाल आँखें याद आती हैं जो चीख चीख कर मुझसे पूछ रही हैं तुमने मुझे आज़ाद क्यों नही कराया??

वो मैला सा आदमी

उसका आत्मसम्मान और ईमानदारी मुझे किसी पढ़े लिखे इंसान से ज्यादा प्रभावित कर रही थी।। हमारी दिखावटी पीढ़ी में कुछ लोग उस आदमी के मैले कपड़ो से भी ज्यादा मैले मन लेकर घुमते हैं

क्या मौत ज़िन्दगी से ज्यादा खूबसूरत है?

छोटी छोटी कहानियों से बना ये लेख आपको जिंदगी और मौत दोनों पर मिलने वाले ख़ुशी के पलों का एहसास दिलाएगा।

Some info about Nidhi khare

  • Female
  • 7/11/1992

बिल्कुल साधारण, खुद जितनी खामोश हूँ मेरे लफ्ज़ उतना ही शोर करते हैं।बस ऐसी ही हूँ

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