Kumar Gourav

Kumar Gourav
Verified Profile

This is a verified account of top writer.

2

Most recent posts

ललक

नाक सिकोड़ते हुए बोली "ठीक है कल से कापी पेंसिल लेकर आ जाना। " बड़े ने प्रतिवाद किया "उसमें बहुत खर्चा है ऐसे ही आप जो बोर्ड पर लिखेंगी वही पढ़ लेगा। ज्यादा नहीं पढ़ना है हिसाब बाड़ी लायक पढ़ जाए बस। "

व्यापार वर्धक यंत्र

इस बरसात में लकड़ियों के खरीदार मिल रहे हैं । पहले तो मुझे लग रहा था श्मशानघाट पर दुकान खोलकर गलती कर दी। लेकिन भला हो उन पंडितजी का अब तो धंधा चौचक हो रहा है पिछले दो घंटे में बारिश के बावजूद लोग घाट की दुकानें छोड़कर मेरे पास आ रहे हैं । "

क्रियाकर्म

एकमुश्त इतनी मौतें प्रशासन की परेशानी की वजह न बन जाए इसलिए रातों रात उन्हें बोरी में भर प्रशासन ने स्टीमर से दूसरी तरफ चोरगांव में फिंकवा दिया और वहाँ के मुखिया को कुछ पैसे देते हुए कहा इन लाशों को चुपचाप ठिकाने लगा दो और मुँह खोला तो गाँव में कोई न बचेगा ।

दधीचि

जमाने से उलट बेटी को कान्वेंट में डाला और बेटे को सरकारी स्कूल में। पत्नी ने आपत्ति की तो उसको समझाया दोनों कान्वेंट में पढ़े इतनी हमारी हैसियत नहीं है और बेटे का क्या है नहीं भी पढ़ेगा तो मजदूरी करके जी लेगा। बेटी जात है समय को देखते हुए उसका पढ़ा लिखा होना जरुरी है।

इश्तहार

इश्तहार तीन दिन से लगातार हो रही बूंदाबांदी से बाजार में कीचड़ ही कीचड़ हो रहा है ग्राहकी तो दूर रहवासी भी दरवाजा खोलकर नहीं झांकते। ऐसे माहौल में ग्राहक का आना किसी देवदर्शन से कम सुख नहीं देता । लेकिन आनेवाले ग्राहक को देखकर बाई एकदम से ठस्स हो गई

डाकटिकट

डाकटिकट शाम की सैर से जब लौटा तो दरवाजे पर कुछ रंगीन लिफाफे रखे थे । उठाकर देखा तो लगभग सभी मेरे द्वारा ही भेजे गए थे । वैसे ही बंद थे जैसे मैंने किया था । हां एक गुलाबी लिफाफा जो कदरन नया था वो मेरे पते पर भेजा गया था ।

तर्पण

वो दौड़कर कटोरी में गंगाजल ले आई । बटेसर सर पर हाथ धड़े वहीं बैठे रहे । भौजाई सुरक्षित दूरी से दुआरी पर खड़े होकर रमेसर से इहलोक से प्रस्थान का आग्रह कर रही थी और वीर रस की कविताओं से दलन के इस कंटक को मिटा डालने का आवाहन ।

प्रसव पीड़ा

छोटे किसान जब दलालों के चंगुल से बचने और अपनी फसल की उचित कीमत पाने की कोशिश में बाजार की तरफ बढ़ता है तो हर किसी को दिक्कत होने लगती है । ऐसे ही एक उत्पादक किसान की कहानी जो प्रचलित तरीके को छोड़ खुद अपनी फसल बेचने निकला है ।

अरेंज मैरिज

" बधाई हो आप बाप बनने वाले हैं। " सुनकर उसकी खुशी का ठिकाना न रहा उसने उत्साह से पूछा "कब? " डॉक्टर मुस्कुराते हुए बोली " बस चार महीने और इंतजार। " उसकी खुशी जाती रही उसने धीरे से पूछा " अगर हम अभी न चाहें तो। "

इत्रसाज की बेटी

खाला सुबह ही धमका गई है अम्मी को ,अब चालीस रोज घर से बाहर मत निकलना । वो दिन चढ़े चुपचाप लेटी रही की शायद खाना बन जाने के बाद अम्मी उठ जाने की चिरौरी करेगी । लेकिन दस बजे के करीब अम्मी भी बगल में आकर लेट गई । कुछ देर में ही अम्मी के खर्राटे गुंजने लगे ।

मुंबई कॉलिंग

ट्रकवाला ओवरटेक करने लगा तो ड्राईवर ने गाड़ी का एक चक्का साइड में उतार दिया । बगल से गुजरती लड़कियां साइकिल रोककर खड़ी हो गई । गाड़ी पास आते ही सब ने एक साथ हाथ हिलाया "बाय बाय " एक गर्व भरी मुस्कान मूंछों के नीचे छुपाते हुए बाबूजी बोले "वहाँ लफंगई थोड़ा कम करिएगा । "

घूंघरू

आजकल उसके घूंघरूओं से न जाने माँ को क्यों चिढ़ होने लगी है । जबकि अब तो जब चलती है तो घूंघरूओं की छनकार सुन हर आता जाता उसे कितनी हसरत से निहारता है । माँ बाप के सपने से इतर उसने भी एक सपना देखा सिल्वर स्क्रीन पर चमकने का । माँ को समझा बुझाकर पिता को बिना बताये वो बम्बई पहुंच गई ।

Some info about Kumar Gourav

  • Male
  • 01/03/89

EDIT PROFILE
E-mail
FullName
PHONE
BIRTHDAY
GENDER
INTERESTED IN
ABOUT ME