chandrasingh
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बेईमान मौसम

मौसमों ने मिल के साजिशें रच रहे थे, उस शरमाती हुई को, बेशरम कर रहा थे !!

ख्याल क्यों है.....!

मै बोला गर करता हो, बेवफाई तो मेरे लिये ये ख्याल क्यों है.?

तेरा मेरा प्यार....!

जब लहरे मुझे थोड़ा भीगो के कुछ कहने लगी, तो मै भी निःशब्द होकर खो गया कुछ यूं ही उनमें।

तुम रो लो परदेश में , नहीं भीगेगा माँ का प्यार....!

माँ एक पवित्र भावना है, संवेदना है, कोमल अहसास है। तपती दोपहरी में मीठे पानी का झरना है। एक खुशबु है। वो माँ जो कभी मिटती नहीं। देह मिट भी जाये तो अपने बच्चों की देह में रूह बन कर सिमट जाती है।

जिन्दगी से कोई वादा तो नहीं था..!

तुम बिन जीने का इरादा नहीं था जिन्दगी। पर मैं अब तुम बिन ही जीना चाहता हूँ। अब मुझे तुम्हारी जरुरत भी नहीं | इस बार जिन्दगी बड़ी मायूस होकर मेरे पास से चली गयी। जिन्दगी तुमसे कोई वादा नहीं था मेरा। हाँ लेकिन तेरे बिना जीने का अब इरादा है मेरा। सुबह हो गया।

अनकहा दर्द ।

आखिर ये नयी सदी मे जी रहे लोगो की मानसिकता कब तक ये दहेज रूपी गुलामी की जंजीरों को झेलेगी इसे तोड़ना होगा और शुरुवात करनी होगी एक दहेज मानसिकता मुक्त समाज की । ताकि किसी तनिशा का फिर से अन्त न हो । अब हमे लड़ना हो, जागना होना नही तो अगली तनिशा हमारे घर से भी हो सकती है ।

कागा सब तन खाइयो........!

दुनियाँ के वे तमाम रिश्तें जो स्वार्थ , जरुरत , पर टिके हैं जो आपसे हमेशा कुछ ना कुछ लेने की बाँट ही जोहते हैं।

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