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स्तनपान

rishav   29 views   1 year ago

सामाजिक तबके कभी एक से दृष्टिकोण नहीं पाते! नज़र के साथ बदलते हैं। स्तनपान कराना क्या शर्म का मुद्दा है?

इन प्रतिकूल हवाओं में

sunilakash   28 views   5 months ago

आजकल के दौर में सच्चाई के साथ जीवन जी पाना कठिन हो गया है।

मूक दर्शक

poojaomdhoundiyal   29 views   7 months ago

कितनी बार होता है कि हम किसी अच्छाई या बुराई को देख कर उसे अनदेखा कर आगे बढ़ जाते हैं। या फिर रुकते तो हैं पर बस एक मनोरंजन की आशा से। अगर मनोरंजन हो तो अच्छा वरना मूक दर्शक बन आगे बढ़ जाते हैं। कितना सही है हमारा ये व्यवहार?

मनमर्ज़ी

Kavita Nagar   1.69K views   4 months ago

ये अचानक से रजनीश और उसकी बहू को घर छोड़कर क्यों जाना पड़ा, ऐसी भी क्या बात हुई।

चिट्ठी - दादाजी के नाम

abhi92dutta   663 views   5 months ago

यह चिट्ठी 2016 मैं अपने दादाजी के जन्मदिवस पर उनके याद में लिखा था । एक दिन में लिखने के कारण इसमें वर्तनी सम्बंधित काफी अशुद्धियाँ है । लेकिन मैं उन अशुद्धियाँ नहीं हटाना चाहता हूँ । मेरे लिए यह चिट्ठी कोई रचना नही थी , यह मेरे जज्बात है । और जज्बातों में कोई सुधार की आवश्यकता नहीं होती है

क्या आपके घर में भी कोई सौम्या है...???

rita1234   1.47K views   5 months ago

हमारे समाज में हम अपनी बेटियों को चाहें कितना भी पढ़ा लें हमारी बेटिया चाहें कितनी भी गुणी और सुसंस्कृत हों उनकी शादी देखते समय हम खुद को बहुत कम समझने लगते है...यह एक बहुत बड़ी विडंबना है जो आज भी देश के कई भागों में विशेष रूप से मध्यम वर्गीय समाज में प्रचलित है।

दादी की यादें .....!

nehabhardwaj123   143 views   10 months ago

एक यादों में खोई सी राशि जो बरबस ही अपनी दादी को याद करते हुए उनकी ही दुनिया मे खो जाती है !

माँ ! माँ! मेरी माँ

poojaomdhoundiyal   17 views   1 year ago

मृत्यु के लिए कई रास्ते हैं पर जन्म लेने के लिए सिर्फ एक ……..माँ !

उस गाँव की स्त्रियां

nidhi   222 views   7 months ago

इन क्षेत्रों में कुछ प्रतिशत ही परिवार हैं जो इस मानसिकता से दूररहते हैंपर ज्यादातर लोगो में ऐसी छोटी मानसिकता वाले कीड़े ही दिमाग में बिलबिलाते है।।।

दुनिया इतनी भी बुरी नहीं है

poojaomdhoundiyal   247 views   4 months ago

दुनिया जैसी देखती है या खुद को जैसा दिखती है वैसी है नहीं। जीवन और उसकी सच्चाई के कई पहलू हैं।

कैसी भूल..

Kavita Nagar   1.47K views   7 months ago

अपनी शिक्षा के सहज सम्मान की इच्छा लिए शिक्षा सपनों की ससुराल के ख्बाब देख रही थी

सिर्फ तुम

rajmati777   814 views   6 months ago

आज एक कार्यक्रम में शर्मा जी से मुलाकात हुई। उनके व्यक्तित्व को देख मैं बहुत अभिभूत हो गई। पर जब अनायास ही उनके घर जाना हुआ, और जो देखा तो दिमाग विचलित हो उठा।

Mohra

alok   18 views   1 year ago

अब मेरी हालत ख़राब हो गयी थी । इस कारण नहीं कि मुझे एक अप्रत्याशित खुशी नसीब हुई थी, बल्कि इसलिये कि मुझे अब यह महसूस हो गया था, कि मोहरों को चलाने वाले हाथ कभी मोहरा नहीं बना करते

सबै सयाने एक मत

prakash   18 views   10 months ago

कई बार हम वास्तविकता जाने बगैर ही परिस्थितियों को दोष देते हैं। लेकिन कई बार केवल परिस्थितियाँ या साधन ही दोषी नहीं होते अपितु हमारी सोच मे ही कोई दोष रह जाता है , और हम आत्मविश्लेषण किए बगैर ही किसी को भी दोष देते फिरते हैं ।

मोर्चा

sidd2812   144 views   1 year ago

रात एक बजे उस माँ को क्या सूझी कि कश्मीर में सोते अपने बेटे को जगा दिया। उस माँ को किसी अनहोनी की आशंका थी, जैसे कुछ बुरा होने वाला है