LIFE

खत: अजन्मे बच्चे के नाम

kavita   60 views   4 months ago

एक माँ की संवेदना भरी बातें ...जो वो अपने जिगर के टुकड़े से बोलना चाहती है..!

That Lady

nischay   17 views   7 months ago

It always wondered me that what it's like to be the old person, who just waits for death to engulf his/her tedious and painful life.

उम्मीदों की कश्ती- १

abhidha   92 views   8 months ago

पिछली बारिश पहाड़ों से घिरे छोटे से कस्बे में मैं एक स्टडी टूर पर था, कुछ जड़ी-बूटियाँ खोजने गया था।यूथ हॉस्टल से सुबह-सुबह निकल पड़ता मैं।अभी अपने कमरे से बाहर ही आया था कि केयर टेकर ने आवाज़ दी- 'साब जी वो जन्तो के यहाँ पकोड़े बहुत अच्छे बनते हैं, लौटते में खाते आना, खाने में देर हो जाएगी

the Truth

shivangi   61 views   8 months ago

life is unpredictable. It reflects different shades but certainly no phase is permanent. Life is more about how you see it. Truth and darkness are parts of it and the one who swims out in every situations is the real winner

​चले आओ

dhirajjha123   14 views   8 months ago

तेजाबी बूंदों ने बना दिया है थोड़ा सा बदसूरत जो छटपटा रही है इस अनचेते हमले से

उम्मीदों की कश्ती-५

abhidha   55 views   8 months ago

सारी रात मुझे नींद नहीं आई। देर रात मैं उठकर कागज़ पर कुछ लिखकर कश्तियाँ बना रहा था। अगली सुबह मैं झरने की ओर भागा देखा तो अलख नहीं थी।

A DATE WITH DEPRESSION

mehakmirzaprabhu   14 views   7 months ago

I am so sleepy. Eye lids are heavy as wet winter blankets. Phone is ringing. I forgot to keep it off hook and I have only myself to blame for that. I have only myself to blame for many more things.

माँ ! माँ! मेरी माँ

poojaomdhoundiyal   14 views   7 months ago

मृत्यु के लिए कई रास्ते हैं पर जन्म लेने के लिए सिर्फ एक ……..माँ !

झुलसी दुआ (कहानी) #ज़हन

Mohit Trendster   130 views   5 months ago

उसकी दिनभर की थकान नींद से कम बल्कि घरवालों से घंटे-आधा घंटे बातें कर ज़्यादा ख़त्म होती थी। अक्सर उसने कितने लोगो को कैसे बचाया, कैसे बीमारी में भी स्टेशन आने वालो में सबसे पहला वो था, कैसे घायल पीड़ित के परिजन उस से लिपट गए...

उम्मीदों की कश्ती-६

abhidha   42 views   8 months ago

अगली सुबह से हम लोग अलख के अंडर ट्रेनिंग में थे। कर्नल साहब आर्मी में थे और मैं खुद भी एक बार एवरेस्ट की आधी चढ़ाई चढ़ चुका था इसलिए हमें कोई परेशानी नहीं होती। अलख के नए पैरों की वजह से उसे पहले छोटे-छोटे रास्तों पर ट्रैकिंग करवानी थी जिससे उसके पैरों को पहाड़ी रास्तों की आदत हो जाये।

पापा तुम्हारे नाम एक खत

shashank25   39 views   7 months ago

पापा आप जानते हो मम्मी सुबेरे से चुप हो गयी है, कुछ खायी नई, कुछ बोलती नई । दिन भर आपको फोन करती रही आप फोन उठाये नई तो रोने लगी और आज तो टीवी में सिरियल की जगह न्यूज देखती रही । दादी भी चुप चाप बाहर वाले बरामदे में बैठी है जहाँ आपकी वो फ़ौजी ड्रेस वाली फोटो टंगी है ।

जब जड़ों में पनपता हो भेदभाव

harish999   9 views   7 months ago

भारत को डिजिटल इंडिया बनाने पहले कुछ सवालों के सकारात्मक जवाब तलाशने होंगे।

कागा सब तन खाइयो........!

chandrasingh   46 views   7 months ago

दुनियाँ के वे तमाम रिश्तें जो स्वार्थ , जरुरत , पर टिके हैं जो आपसे हमेशा कुछ ना कुछ लेने की बाँट ही जोहते हैं।

और फिर मनीशंकर भाग गया (एक कहानी युवाओं की)

dhirajjha123   113 views   7 months ago

अब वो अपने दायित्वों के निर्वाह से बिल्कुल नहीं डरता था और ना ही कहीं भाग जाने के बारे में सोचता था । कुल मिला कर वह अपनी उलझनों से बाहर निकल चुका था ।

गरीबी की दिल कचोटती तस्वीर

rashmi   25 views   5 months ago

जहाँ अमीरों के बच्चों के कई शौक और इच्छाएँ पूरे करने में दिन बीतते है वही गरीब बच्चों का पूरा दिन केवल खाने की तलाश में बीत जाता है. फिर जो कुछ भी मिलता है उसे भी मिल बाँट कर खाते है. ये गरीब बच्चें भी दिल के बड़े अमीर होते है. बस ऐसी ही कुछ स्थिति को अल्फाज़ देने की एक कोशिश.

दिल की सुनो, दिमाग से चलो

harish999   20 views   7 months ago

दिल की बात सुनते हुए दिमाग से काम किया जाए तो सफलता की उम्मीद बहुत ज्यादा रहती है. दोनों ही हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है.

तर्पण

kumarg   129 views   5 months ago

वो दौड़कर कटोरी में गंगाजल ले आई । बटेसर सर पर हाथ धड़े वहीं बैठे रहे । भौजाई सुरक्षित दूरी से दुआरी पर खड़े होकर रमेसर से इहलोक से प्रस्थान का आग्रह कर रही थी और वीर रस की कविताओं से दलन के इस कंटक को मिटा डालने का आवाहन ।

मां का नायाब मोती

swa   96 views   5 months ago

वो झांककर बंगले में देखने की कोशिश कर रहा था, चार चक्कर लगा चुका था अगल-बगल पूरे बंगले के।

उम्मीदों की कश्ती-७

abhidha   38 views   8 months ago

बर्फीले तूफ़ान के गुज़रते ही हमने अपनी चढ़ाई शुरू की। अब धीरे-धीरे जैसे-जैसे हम ऊपर चढ़ रहे थे हमें ऑक्सीजन की कमी महसूस रही थी परन्तु अलख में पता नहीं कहाँ से एक नयी ऊर्जा का संचार हो गया था

मरणोपरांत आशीर्वाद

Mohit Trendster   27 views   7 months ago

बीमा एजेंट के अनुसार रविन्दु सामंत के सुसाइड नोट की लिखावट उनकी राइटिंग से पूरी तरह नहीं मिलती थी। पुलिस टीम द्वारा जांच के लिए कुछ सामग्री जप्त की गयी और थोड़े दिन के बाद नतीजे की पुष्टि की बात हुई।

खलनायिका

swa   24 views   7 months ago

रिनी कभी अपनी मां को मां नहीं समझ पाई। जिस मां को उसकी मां के स्थान पर लाया गया था। उसने हमेशा सरला को एक सबसे बड़ी खलनायिका समझा और सरला कभी अपने आप को चाह कर भी अच्छी मां साबित नहीं कर पाई।

" ब्लू व्हेल :- मौत की सौदागर "

Neha Neh   67 views   4 months ago

आत्महत्या करनें वालों के पास सबसे ज्यादा अपनों की कमी होती है। उस अपने की जिससे वो दिल की बात कह सके। कोशिश किजिये अगर किसी अपने के व्यवहार में अचानक से परिवर्तन आया है। तो आप उसके दिल की बात जान सके। यकीन माने आत्महत्या बहुत कम हो सकती है ,पर एक दोस्त एक हमदर्द अगर साथ हो तो ......

पिंजरा

sidd2812   36 views   7 months ago

उसको हर सोमवार के दिन आकर, पंछियों को स्वतंत्र करना सुहाता था। मुश्ताक़ की नज़र में वो बहुत भला आदमी था। पर भ्रम एक दिन सबके टूटते हैं।

जिन्दगी से कोई वादा तो नहीं था..!

chandrasingh   25 views   6 months ago

तुम बिन जीने का इरादा नहीं था जिन्दगी। पर मैं अब तुम बिन ही जीना चाहता हूँ। अब मुझे तुम्हारी जरुरत भी नहीं | इस बार जिन्दगी बड़ी मायूस होकर मेरे पास से चली गयी। जिन्दगी तुमसे कोई वादा नहीं था मेरा। हाँ लेकिन तेरे बिना जीने का अब इरादा है मेरा। सुबह हो गया।