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क्रियाकर्म

kumarg   87 views   10 months ago

एकमुश्त इतनी मौतें प्रशासन की परेशानी की वजह न बन जाए इसलिए रातों रात उन्हें बोरी में भर प्रशासन ने स्टीमर से दूसरी तरफ चोरगांव में फिंकवा दिया और वहाँ के मुखिया को कुछ पैसे देते हुए कहा इन लाशों को चुपचाप ठिकाने लगा दो और मुँह खोला तो गाँव में कोई न बचेगा ।

घर का भेदी लंका ढहाए

harish999   23 views   1 year ago

दोस्त हमेशा पराया और दुश्मन हमेशा अपना ही निकलता है. उसकी दुश्मनी की वजह भी साफ होती है. कभी एक ही रास्ते के हम राही जब एक-दूसरों की जरूरत या उम्मीदों पर खरा नहीं उतरते, तो वह आपस में दुश्मनी की शक्ल में अख्तियार कर लेते है.

क्यों करूँ करवाचौथ

Maneesha Gautam   191 views   9 months ago

आप करवाचौथ क्यों करती हैं ओर यदि नहीं करती तो क्यों नहीं....मुझे आपके जवाब का इंतजार रहेगा।

​तुम्हारे बिना वो खुद खुद का भी नहीं

dhirajjha123   16 views   1 year ago

हर बात पर रूठना और रूठ कर कह देना कि अब जा रहा हूँ मैं

Adiue

uddipta321   15 views   1 year ago

"Adieu" is a poem about students saying goodbye to their college after spending some memorable years in it. AS they bid each other farewell, they recall how they would fight, argue but sort it out in the end. They sigh that they wont be able to roam across its alleys again.

औरत का अस्तित्व

Mona Kapoor   10 views   9 months ago

औरत का हर रूप सम्मानीय है, उसे कमजोर ना समझते हुए उसकी इज्जत करें।

मेरा‌ ‌वजूद है भी ‌या ‌नहीं????

Anonymous
  197 views   11 months ago

वजूद के सवालों में घिरी जिन्दगी....

MY NAME IS SHANTI AND I AM AN ANGRY GODDESS

poojaomdhoundiyal   61 views   10 months ago

THIS STORY IS ABOUT A LADY, WHO FIGHT FOR HERSELF, FOR HER DIGNITY, FOR HER IDENTITY. WHO GIVE A BIG FIGHTS TO ALREADY ESTABLISHED NOTIONS IN A SOCIETY. HER STORY TELLS SOCIETY, ITS NOT NAME THAT DOES MATTERS ITS ACTS THAT HAS THE MEANING AND IDENTITY.

That Lady

nischay   19 views   1 year ago

It always wondered me that what it's like to be the old person, who just waits for death to engulf his/her tedious and painful life.

मां का नायाब मोती

swa   101 views   1 year ago

वो झांककर बंगले में देखने की कोशिश कर रहा था, चार चक्कर लगा चुका था अगल-बगल पूरे बंगले के।

घूंघरू

kumarg   51 views   1 year ago

आजकल उसके घूंघरूओं से न जाने माँ को क्यों चिढ़ होने लगी है । जबकि अब तो जब चलती है तो घूंघरूओं की छनकार सुन हर आता जाता उसे कितनी हसरत से निहारता है । माँ बाप के सपने से इतर उसने भी एक सपना देखा सिल्वर स्क्रीन पर चमकने का । माँ को समझा बुझाकर पिता को बिना बताये वो बम्बई पहुंच गई ।

बहू या अलादीन का चिराग

harish999   62 views   10 months ago

पति को भगवान मानने वाले समाज में आखिर कब बहू-बेटियों को इस मानसिक, शारीरिक उत्पीडऩ से मुक्ति मिलेगी, यह सवाल हर समय हमको परेशान रखता है. आखिर ऐसा क्यों होता है और कब तक होता रहेगा?

अपवित्रता??....... वो पाँच दिन (पीरियड्स)

Maneesha Gautam   74 views   9 months ago

जिस खून को लोग अपवित्र समझते हैं वे यह क्यों नहीं समझते कि 9 महीने तक माँ के पेट में उसी खून से उनका विकास और पालन पोषण होता है।

दिल की सुनो, दिमाग से चलो

harish999   23 views   1 year ago

दिल की बात सुनते हुए दिमाग से काम किया जाए तो सफलता की उम्मीद बहुत ज्यादा रहती है. दोनों ही हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है.

" ब्लू व्हेल :- मौत की सौदागर "

Neha Neh   69 views   11 months ago

आत्महत्या करनें वालों के पास सबसे ज्यादा अपनों की कमी होती है। उस अपने की जिससे वो दिल की बात कह सके। कोशिश किजिये अगर किसी अपने के व्यवहार में अचानक से परिवर्तन आया है। तो आप उसके दिल की बात जान सके। यकीन माने आत्महत्या बहुत कम हो सकती है ,पर एक दोस्त एक हमदर्द अगर साथ हो तो ......