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कर्मफल

prakash   58 views   7 months ago

क्या हमे इस जन्म मे भी पूर्व जन्म के कर्मों के फल भोगना होता है ? हमे इस जन्म मे मिलने वाले सुख या दुख का क्या पूर्व जन्म से भी कोई संबंध है या ये एक कोरी कल्पना मात्र है । ऐसी जिज्ञासा सदैव ही लोगों के मन मे बनी रहती है अतः एक छोटा स विश्लेषण .....

दर्द-ए-वेलेंगटाइन

arn   25 views   1 year ago

और सोचने लगा की दो साल कालेज मे खपाने के बाद भी किसी भी लड़की ने उस जैसे हैंण्सम को अपना बायफ्रेंड क्यो नही बनाया...........

सबै सयाने एक मत

prakash   17 views   7 months ago

कई बार हम वास्तविकता जाने बगैर ही परिस्थितियों को दोष देते हैं। लेकिन कई बार केवल परिस्थितियाँ या साधन ही दोषी नहीं होते अपितु हमारी सोच मे ही कोई दोष रह जाता है , और हम आत्मविश्लेषण किए बगैर ही किसी को भी दोष देते फिरते हैं ।

बुर्का बेहया

Amritanshu Yadav   22 views   1 year ago

प्रचलित सामाजिक रूढ़ि एवं समाज मे फैली धार्मिक अराजकता पर तंज कसती हुई हिंदी के सबसे युवा रचनाकार की एक कृति..

औरत का अस्तित्व

Mona Kapoor   10 views   7 months ago

औरत का हर रूप सम्मानीय है, उसे कमजोर ना समझते हुए उसकी इज्जत करें।

अपशकुनी

kavita   117 views   7 months ago

समाज की घृणित सोच और गिरी हुई मानसिकता की शिकार एक युवती की कहानी

बरगद

Amritanshu Yadav   6 views   1 year ago

एक कविता है जो समसायिक विश्व में स्वार्थीपन पर तंज कसती है...

नार्मल डिलीवरी ही होनी चाहिए।

Maneesha Gautam   870 views   6 months ago

वो पिकं रेखाएं माँ बनने की परीक्षा में पास होने के संकेत थे। आंनद ,रमा का पति भी संपूर्णता की परीक्षा में सफल होकर गर्व महसूस कर रहा था।

अपवित्रता??....... वो पाँच दिन (पीरियड्स)

Maneesha Gautam   74 views   6 months ago

जिस खून को लोग अपवित्र समझते हैं वे यह क्यों नहीं समझते कि 9 महीने तक माँ के पेट में उसी खून से उनका विकास और पालन पोषण होता है।

समूह वाली मानसिकता (लेख)

Mohit Trendster   2 views   6 months ago

समूहों की रेखाओं में उलझे समाज का विश्लेषण।

हमको उठा लो भगबान (कहानी जैसा ही कुछ)

dhirajjha123   6 views   1 year ago

अच्छा सिला दिया तुने मेरे प्यार का यार ने ही लूट लिया घर यार का” ई गीत 36वीं बार बज रहा था । चाईना का फोन, कान फाड़ू अबाज, लोराएल झोराएल आँख के सामने खुलल दस रुपया में ली हुई दर्द भरी सायरी के किताब आ अँटा चालने वाला चलनी के जैइसे छलनी हुआ रमजनमा के दिल । दू महीना हो गया फूलबतिया के सादी हुए ।

स्तनपान

rishav   28 views   1 year ago

सामाजिक तबके कभी एक से दृष्टिकोण नहीं पाते! नज़र के साथ बदलते हैं। स्तनपान कराना क्या शर्म का मुद्दा है?

घूंघरू

kumarg   51 views   10 months ago

आजकल उसके घूंघरूओं से न जाने माँ को क्यों चिढ़ होने लगी है । जबकि अब तो जब चलती है तो घूंघरूओं की छनकार सुन हर आता जाता उसे कितनी हसरत से निहारता है । माँ बाप के सपने से इतर उसने भी एक सपना देखा सिल्वर स्क्रीन पर चमकने का । माँ को समझा बुझाकर पिता को बिना बताये वो बम्बई पहुंच गई ।

जीवन में विलेन ढूँढने की आदत (लेख)

Mohit Trendster   20 views   6 months ago

बचपन से हमें बुराई पर अच्छाई की जीत वाली कई गाथाओं का इस तरह रसपान करवाया जाता है तो कोई भी बुरा नहीं बनना चाहता। अब सवाल उठते हैं कि अगर कोई बुरा नहीं तो फिर समाज में फैली बुराई का स्रोत क्या है? दुनिया में सब अच्छे क्यों नहीं?

मुंबई कॉलिंग

kumarg   26 views   10 months ago

ट्रकवाला ओवरटेक करने लगा तो ड्राईवर ने गाड़ी का एक चक्का साइड में उतार दिया । बगल से गुजरती लड़कियां साइकिल रोककर खड़ी हो गई । गाड़ी पास आते ही सब ने एक साथ हाथ हिलाया "बाय बाय " एक गर्व भरी मुस्कान मूंछों के नीचे छुपाते हुए बाबूजी बोले "वहाँ लफंगई थोड़ा कम करिएगा । "