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Untold Story of Indian Soldier

Vaishnavi Vaishnav   51 views   1 year ago

मिशन desert strom start now!.....

अनसुलझा चेहरा

gauravji   50 views   1 year ago

वो काली अंधेरी रात को पसंद करने लगा था अब।  जिसे रौशनी से नफरत करते मैं आज-कल देख रहा हूँ, वो जिंदगी में कुछ खास करेगा या ना करेगा ये तो कोइ नहीं जानता पर वो खुद में संपूर्ण है और सफल है ,ये उसने साबित कर दिया है

पापा तुम्हारे नाम एक खत

shashank25   50 views   2 years ago

पापा आप जानते हो मम्मी सुबेरे से चुप हो गयी है, कुछ खायी नई, कुछ बोलती नई । दिन भर आपको फोन करती रही आप फोन उठाये नई तो रोने लगी और आज तो टीवी में सिरियल की जगह न्यूज देखती रही । दादी भी चुप चाप बाहर वाले बरामदे में बैठी है जहाँ आपकी वो फ़ौजी ड्रेस वाली फोटो टंगी है ।

प्रेम भूत

dhirajjha123   49 views   2 years ago

प्रेम है भई ! उसका क्या भरोसा कब , कहाँ , किसके साथ और किस उम्र में किस उम्र से हो जाये | ये तय होता तो हर कोई अपने लिये हीरो हिरोईनों को ही चुनता | फिर गाँव की गुंजवा , नैनतरवा , खुसिया भी सलमान खान को अपना साझा पति बना लेतीं |

ए जिदंगी

Nidhi Bansal   48 views   1 year ago

हमेशा क्यो जिदंगी की सुने क्यों उसके हिसाब से चलें। आओ आज कुछ बातें जिदंगी के साथ करते है।आज अपनी खाली झोली में कुछ तारें और महताब भरतें है।।

कर्तव्य और अधिकार

utkrishtshukla   48 views   2 years ago

कर्तव्यों का ढिंढोरा पीटना एक मूर्खतापूर्ण​ कार्य है।

मेरे कंधे से ऊपर भी मैं हूँ!

shashankbhartiya   47 views   2 years ago

मेरे कंधे से ऊपर भी मैं ही हूँ, पर तुम देखते ही नहीं,

बड़ी तकलीफ होती है

Nidhi Bansal   46 views   1 year ago

माँ के आँचल की छाँव बमुश्किल नसीब होती है एक माँ ही तो है जो दिल के करीब होती है

औरत की जंग

kumarg   41 views   2 years ago

मच्छरहट्टे में दो किलो रेहू तौलाने के बाद विधायकजी के पोते ने पैसे देने से इनकार कर दिया तो गंगिया मलाहिन ने फांसुल चला दिया । दूर्योग से निशाना ऐसा चूका की नेताबीज जीवन भर के लिए बियाह से वंचित हो गये ।

दानी

sidd2812   40 views   2 years ago

उसके पास जागीरें थीं। और वो कंगाल हो गया। लेकिन उसके चेहरे से मुस्कराहट न हटी। क्योंकि जीत फिर भी उसी की हुई थी।

पिंजरा

sidd2812   40 views   2 years ago

उसको हर सोमवार के दिन आकर, पंछियों को स्वतंत्र करना सुहाता था। मुश्ताक़ की नज़र में वो बहुत भला आदमी था। पर भ्रम एक दिन सबके टूटते हैं।

Assumed Alive

troubleseeker11   38 views   1 year ago

This poem is about any oerson who is assumed alive but he/she is dead insided. This is a little dark. So enter at your own risk.

Headless man on the wall…

nischay   37 views   1 year ago

There is an old saying, “In the time of peace war-men attack themselves”, and hence remains no peace.

प्रसव पीड़ा

kumarg   36 views   2 years ago

छोटे किसान जब दलालों के चंगुल से बचने और अपनी फसल की उचित कीमत पाने की कोशिश में बाजार की तरफ बढ़ता है तो हर किसी को दिक्कत होने लगती है । ऐसे ही एक उत्पादक किसान की कहानी जो प्रचलित तरीके को छोड़ खुद अपनी फसल बेचने निकला है ।

बुर्का बेहया

Amritanshu Yadav   33 views   2 years ago

प्रचलित सामाजिक रूढ़ि एवं समाज मे फैली धार्मिक अराजकता पर तंज कसती हुई हिंदी के सबसे युवा रचनाकार की एक कृति..