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बड़ी तकलीफ होती है

Nidhi Bansal   45 views   6 months ago

माँ के आँचल की छाँव बमुश्किल नसीब होती है एक माँ ही तो है जो दिल के करीब होती है

बच्चों का बचपन जी लें...

rita1234   923 views   7 months ago

दैनिक जीवन की भागदौड़ भरी दिनचर्या में हम रोज़ बेहद कीमती पलों को नही जी पाते। वो है हमारे “बच्चो का बचपन” जिसकी कसक बाद में बेहद टीसती है।

खत: अजन्मे बच्चे के नाम

kavita   62 views   11 months ago

एक माँ की संवेदना भरी बातें ...जो वो अपने जिगर के टुकड़े से बोलना चाहती है..!

"फुर्सत के दो पल मिल जाते काश"......

vandita   406 views   8 months ago

आज के समय मे लोग इतना व्यस्त हो गए है कि उनके पास अपने लोगों के लिए वक्त नहीं है। ऐसा ही कुछ मेरी इस कहानी में आपको पढ़ने को मिलेगा।

नियति

dks343   132 views   11 months ago

story of a poor family ,who could not save the life of their beloved sons inspite of there great efforts,they did all what they could do. बाहर लकदक टेंट लगे थे। नसबन्दी जैसे जुमले का हुस्न शबाब पर था। उसी शामियाने के पीछे उस गंदी इमारत पर तहरीर लिखी थी, ‘‘तत्काल लाभ, तुरंत भुगतान।

दो बेज़ुबान - चीकू और मैं।

nidhi   52 views   8 months ago

मुझे रोज़ चीकू याद आता है..उसकी बड़ी बड़ी लाल आँखें याद आती हैं जो चीख चीख कर मुझसे पूछ रही हैं तुमने मुझे आज़ाद क्यों नही कराया??

कंधो का बोझ

avinashsurajpur   175 views   9 months ago

पार्क की एक बेंच पर अपनी धर्मपत्नी के साथ बैठे शर्मा जी आज अपने कंधो को कुछ जादा भारी महसूस कर रहे थे। हालाँकि वो उम्र के उस पड़ाव पर थे जहाँ बहुत सी जिम्मेदारियों से मुक्ति मिल जाती है और कंधो का बोझ बहुत हद तक कम भी हो जाता है। लेकिन उनके कंधो पर इतना बोझ क्यों था??

जिंदगी की परीक्षा

kavita   299 views   9 months ago

माँ की मृत्यु के उपरांत नितांत अकेले पिता द्वारा पुत्र के पालन पोषण में उभरती वस्तु स्थिति एवम पिता पुत्र के बीच के प्रेम का अनूठा वर्णन

वो खत.... अहसासों के !

rgsverma   469 views   6 months ago

कुछ खतों में सिमट अहसास, और जीवन के साधारण से पलों की सहज व्याख्या है यह कहानी। और वह अहसास ओढ़ कर ही समझे जा सकते हैं। आइये, पढ़ें--

बच्चो के राम, बड़ों के राम से अलग है..

shipratrivedi   19 views   1 year ago

राम की समझ आजकल बच्चो को बड़ों से ज्यादा है. बड़ों ने तो राम को एक समस्या बना दिया है जो कभी लोगो के बीच तो कभी कचहरियो मे सुनी जा रही है..

हां मैं स्त्रीलिंग हूं

poojaomdhoundiyal   85 views   8 months ago

क्या दोष है उस भ्रूण क्या? यही की वो स्त्रीलिंग है। यही की वो कुछ कमजोर और हीन मानसिकता के लोगो से जुडी है। जो एक स्त्रीलिंग को पनपने न देने में अपना पौरुष समझते हैं।क्या सोचता होगा वो भ्रूण जब वो ऐसी परिस्थितियों से गुजरता होगा। उसकी भावनाएं कैसी होती होंगी।वो क्या कहना और क्या सुनना चाहता होगा ।

ठूंठ

Maneesha Gautam   645 views   6 months ago

उस बिस्तर के कोने में, एक दिन में न जाने कितनी बार वो अपने पूरे जीवन को याद कर के जी लेती है।

ए जिदंगी

Nidhi Bansal   47 views   6 months ago

हमेशा क्यो जिदंगी की सुने क्यों उसके हिसाब से चलें। आओ आज कुछ बातें जिदंगी के साथ करते है।आज अपनी खाली झोली में कुछ तारें और महताब भरतें है।।

रंग का मोल

Mohit Trendster   8 views   1 year ago

आज भारत और नेपाल में हो रहीं 2 शादियों में एक अनोखा बंधन था।

प्रसव पीड़ा

kumarg   35 views   1 year ago

छोटे किसान जब दलालों के चंगुल से बचने और अपनी फसल की उचित कीमत पाने की कोशिश में बाजार की तरफ बढ़ता है तो हर किसी को दिक्कत होने लगती है । ऐसे ही एक उत्पादक किसान की कहानी जो प्रचलित तरीके को छोड़ खुद अपनी फसल बेचने निकला है ।