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उम्मीदों की कश्ती- १

abhidha   123 views   2 years ago

पिछली बारिश पहाड़ों से घिरे छोटे से कस्बे में मैं एक स्टडी टूर पर था, कुछ जड़ी-बूटियाँ खोजने गया था।यूथ हॉस्टल से सुबह-सुबह निकल पड़ता मैं।अभी अपने कमरे से बाहर ही आया था कि केयर टेकर ने आवाज़ दी- 'साब जी वो जन्तो के यहाँ पकोड़े बहुत अच्छे बनते हैं, लौटते में खाते आना, खाने में देर हो जाएगी

तरसता मातृत्व

kavita   123 views   2 years ago

एक व्यथित माँ की कहानी...बेटे के लिए तड़पता हृदय और अंतरात्मा... की दिल को छू लेने वाली कहानी

अपशकुनी

kavita   118 views   1 year ago

समाज की घृणित सोच और गिरी हुई मानसिकता की शिकार एक युवती की कहानी

और फिर मनीशंकर भाग गया (एक कहानी युवाओं की)

dhirajjha123   117 views   2 years ago

अब वो अपने दायित्वों के निर्वाह से बिल्कुल नहीं डरता था और ना ही कहीं भाग जाने के बारे में सोचता था । कुल मिला कर वह अपनी उलझनों से बाहर निकल चुका था ।

कागा सब तन खाइयो........!

chandrasingh   112 views   2 years ago

दुनियाँ के वे तमाम रिश्तें जो स्वार्थ , जरुरत , पर टिके हैं जो आपसे हमेशा कुछ ना कुछ लेने की बाँट ही जोहते हैं।

मां का नायाब मोती

swa   103 views   2 years ago

वो झांककर बंगले में देखने की कोशिश कर रहा था, चार चक्कर लगा चुका था अगल-बगल पूरे बंगले के।

उम्मीदों की कश्ती-२

abhidha   96 views   2 years ago

यूथ हॉस्टल पहुँचकर जूता एक तरफ फेंक केयर टेकर को आवाज़ दी- काका खाने में क्या है? वो बोला- साब,आज तो जीरा आलू, रोटी और दाल तड़का ही है

क्रियाकर्म

kumarg   89 views   2 years ago

एकमुश्त इतनी मौतें प्रशासन की परेशानी की वजह न बन जाए इसलिए रातों रात उन्हें बोरी में भर प्रशासन ने स्टीमर से दूसरी तरफ चोरगांव में फिंकवा दिया और वहाँ के मुखिया को कुछ पैसे देते हुए कहा इन लाशों को चुपचाप ठिकाने लगा दो और मुँह खोला तो गाँव में कोई न बचेगा ।

उम्मीदों की कश्ती-३

abhidha   87 views   2 years ago

'शायद मेरी शादी का ख्याल दिल में आया है, इसीलिए मम्मी ने तेरी मुझे चाय पर बुलाया है'

हां मैं स्त्रीलिंग हूं

poojaomdhoundiyal   85 views   1 year ago

क्या दोष है उस भ्रूण क्या? यही की वो स्त्रीलिंग है। यही की वो कुछ कमजोर और हीन मानसिकता के लोगो से जुडी है। जो एक स्त्रीलिंग को पनपने न देने में अपना पौरुष समझते हैं।क्या सोचता होगा वो भ्रूण जब वो ऐसी परिस्थितियों से गुजरता होगा। उसकी भावनाएं कैसी होती होंगी।वो क्या कहना और क्या सुनना चाहता होगा ।

उम्मीदों की कश्ती- अंतिम भाग

abhidha   83 views   2 years ago

बहुत दूर तक साथ चलते-चलते अब वक़्त हो चला था कि घर की ओर जाया जाए। अपनी आँखों में उदासी के घने बादल लिए हम दोनों अपने-अपने कमरे में पहुँच गए।अलख रसोई में जाकर आज खुद अपने हाथों से पकोड़े और अदरक वाली चाय बना रही थी मेरे लिए।

उम्मीदों की कश्ती-४

abhidha   79 views   2 years ago

अलख के साथ जब मैं घर पहुँचा तो कर्नल साहब और तृप्ति जी मुझे हैरानी से देख रही थीं।

उम्मीदों की कश्ती-५

abhidha   78 views   2 years ago

सारी रात मुझे नींद नहीं आई। देर रात मैं उठकर कागज़ पर कुछ लिखकर कश्तियाँ बना रहा था। अगली सुबह मैं झरने की ओर भागा देखा तो अलख नहीं थी।

पैसे की खनक या किस्मत की मार ??

Kalpana Jain   75 views   1 year ago

आज रुपये दे कर कहीँ भी कुछ भी करवाया जा सकता है या फिर किस्मत तेज़ होती हैं।

अपवित्रता??....... वो पाँच दिन (पीरियड्स)

Maneesha Gautam   74 views   1 year ago

जिस खून को लोग अपवित्र समझते हैं वे यह क्यों नहीं समझते कि 9 महीने तक माँ के पेट में उसी खून से उनका विकास और पालन पोषण होता है।