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क्यों करूँ करवाचौथ

Maneesha Gautam   191 views   1 year ago

आप करवाचौथ क्यों करती हैं ओर यदि नहीं करती तो क्यों नहीं....मुझे आपके जवाब का इंतजार रहेगा।

मैं नहीं भेजूगी अपनी बेटी को ससुराल..

Kalpana Jain   175 views   1 year ago

एक माँ की अपनी बेटी की जुदाई के दर्द की दास्तान है।

कंधो का बोझ

avinashsurajpur   175 views   1 year ago

पार्क की एक बेंच पर अपनी धर्मपत्नी के साथ बैठे शर्मा जी आज अपने कंधो को कुछ जादा भारी महसूस कर रहे थे। हालाँकि वो उम्र के उस पड़ाव पर थे जहाँ बहुत सी जिम्मेदारियों से मुक्ति मिल जाती है और कंधो का बोझ बहुत हद तक कम भी हो जाता है। लेकिन उनके कंधो पर इतना बोझ क्यों था??

યાદ

pravinakadkia   169 views   1 year ago

એક માતાનાં મનોભાવની વાત છે. હૃદય્સ્પર્શીવાર્તા જરૂરથી વાંચશો.

श्रद्धा-सुमन

falguniparikh   150 views   1 year ago

कभी कभी खुदकी गलती ही हमें जीने नहीं देती

दादी की यादें .....!

nehabhardwaj123   150 views   2 years ago

एक यादों में खोई सी राशि जो बरबस ही अपनी दादी को याद करते हुए उनकी ही दुनिया मे खो जाती है !

झुलसी दुआ (कहानी) #ज़हन

Mohit Trendster   147 views   2 years ago

उसकी दिनभर की थकान नींद से कम बल्कि घरवालों से घंटे-आधा घंटे बातें कर ज़्यादा ख़त्म होती थी। अक्सर उसने कितने लोगो को कैसे बचाया, कैसे बीमारी में भी स्टेशन आने वालो में सबसे पहला वो था, कैसे घायल पीड़ित के परिजन उस से लिपट गए...

मोर्चा

sidd2812   146 views   2 years ago

रात एक बजे उस माँ को क्या सूझी कि कश्मीर में सोते अपने बेटे को जगा दिया। उस माँ को किसी अनहोनी की आशंका थी, जैसे कुछ बुरा होने वाला है

अधूरे रिश्ते

chandrasingh   139 views   2 years ago

“आँखों में जल रहा है क्यों…? बुझता नहीं धुंआ..! उठता तो घटा सा है बरसता नहीं धुंआ”

तर्पण

kumarg   137 views   2 years ago

वो दौड़कर कटोरी में गंगाजल ले आई । बटेसर सर पर हाथ धड़े वहीं बैठे रहे । भौजाई सुरक्षित दूरी से दुआरी पर खड़े होकर रमेसर से इहलोक से प्रस्थान का आग्रह कर रही थी और वीर रस की कविताओं से दलन के इस कंटक को मिटा डालने का आवाहन ।

नियति

dks343   132 views   2 years ago

story of a poor family ,who could not save the life of their beloved sons inspite of there great efforts,they did all what they could do. बाहर लकदक टेंट लगे थे। नसबन्दी जैसे जुमले का हुस्न शबाब पर था। उसी शामियाने के पीछे उस गंदी इमारत पर तहरीर लिखी थी, ‘‘तत्काल लाभ, तुरंत भुगतान।

No man can bring my visor to the ground

krishangisarma27   130 views   2 years ago

A poem based on the struggles that a woman goes through during her lifetime and how she handles everything

शेषनाग

sunilakash   129 views   2 years ago

"नई रोशनी" दैनिक की प्रेस में अखबार की स्थापना से लेकर आज तक, पचास वर्षों में ऐसा कभी नहीं हुआ था।

धारा विरुद्ध

suneel   127 views   2 years ago

पर मैं सोच रही थी, कि हम लोगों ने जिस तरह अकारण ही बेटे के जन्म को उत्सव का पर्याय बना दिया है, अब उसे बदलने का वक्त आ गया है।

कलरब्लाइंड साजन

Mohit Trendster   126 views   2 years ago

हॉस्पिटल में हुई जांच में रूही को पता चला कि आशीष को झूठ बोलना आता है। वो कई महीनों से छोटा मर्ज़ मान कर अपने फेफड़ों के कैंसर के लक्षण छुपा रहा था, जो अब बढ़ कर अन्य अंगो में फैल कर अंतिम लाइलाज चरण में आ गया था। अब आशीष के पास कुछ महीनों का वक़्त बचा था। दोनों अस्पताल से लौट आये।