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उम्मीदों की कश्ती-६

abhidha   48 views   1 year ago

अगली सुबह से हम लोग अलख के अंडर ट्रेनिंग में थे। कर्नल साहब आर्मी में थे और मैं खुद भी एक बार एवरेस्ट की आधी चढ़ाई चढ़ चुका था इसलिए हमें कोई परेशानी नहीं होती। अलख के नए पैरों की वजह से उसे पहले छोटे-छोटे रास्तों पर ट्रैकिंग करवानी थी जिससे उसके पैरों को पहाड़ी रास्तों की आदत हो जाये।

नियति

dks343   132 views   8 months ago

story of a poor family ,who could not save the life of their beloved sons inspite of there great efforts,they did all what they could do. बाहर लकदक टेंट लगे थे। नसबन्दी जैसे जुमले का हुस्न शबाब पर था। उसी शामियाने के पीछे उस गंदी इमारत पर तहरीर लिखी थी, ‘‘तत्काल लाभ, तुरंत भुगतान।

मोर्चा

sidd2812   143 views   9 months ago

रात एक बजे उस माँ को क्या सूझी कि कश्मीर में सोते अपने बेटे को जगा दिया। उस माँ को किसी अनहोनी की आशंका थी, जैसे कुछ बुरा होने वाला है

Mother-God In Flesh

troubleseeker11   11 views   10 months ago

A mother's feelings about her child as she grows old. The bond is described here.

ज़िंदगी रोटी से चलती है, गोलियों से नहीं

harish999   12 views   10 months ago

हर कोई अपनी बीन ऐसे बजा रहा है जैसे जनता सांप हो और वो नासमझ खुद अभी अभी आसमान से टपका हो. चाहे कितना भी हंगामा कर लीजिये,

बच्चो के राम, बड़ों के राम से अलग है..

shipratrivedi   19 views   10 months ago

राम की समझ आजकल बच्चो को बड़ों से ज्यादा है. बड़ों ने तो राम को एक समस्या बना दिया है जो कभी लोगो के बीच तो कभी कचहरियो मे सुनी जा रही है..

दानी

sidd2812   39 views   11 months ago

उसके पास जागीरें थीं। और वो कंगाल हो गया। लेकिन उसके चेहरे से मुस्कराहट न हटी। क्योंकि जीत फिर भी उसी की हुई थी।

मेरे कंधे से ऊपर भी मैं हूँ!

shashankbhartiya   47 views   11 months ago

मेरे कंधे से ऊपर भी मैं ही हूँ, पर तुम देखते ही नहीं,

Come here again

arahman   8 views   10 months ago

It's just an outcome of my thoughts on people leaving this world and leaving us alone.

vivaah: ek nayi shuruaat

shashankbhartiya   55 views   10 months ago

एक टूटा हुवा दिल,और उस टूटे हुवे दिल से प्यार करने वाली,उम्मीदों से भरी,आँखों में सपने सजाये हुवे एक नवविवाहिता...

तरसता मातृत्व

kavita   119 views   8 months ago

एक व्यथित माँ की कहानी...बेटे के लिए तड़पता हृदय और अंतरात्मा... की दिल को छू लेने वाली कहानी

प्रसव पीड़ा

kumarg   35 views   10 months ago

छोटे किसान जब दलालों के चंगुल से बचने और अपनी फसल की उचित कीमत पाने की कोशिश में बाजार की तरफ बढ़ता है तो हर किसी को दिक्कत होने लगती है । ऐसे ही एक उत्पादक किसान की कहानी जो प्रचलित तरीके को छोड़ खुद अपनी फसल बेचने निकला है ।

औरत की जंग

kumarg   39 views   10 months ago

मच्छरहट्टे में दो किलो रेहू तौलाने के बाद विधायकजी के पोते ने पैसे देने से इनकार कर दिया तो गंगिया मलाहिन ने फांसुल चला दिया । दूर्योग से निशाना ऐसा चूका की नेताबीज जीवन भर के लिए बियाह से वंचित हो गये ।

उम्मीदों की कश्ती- अंतिम भाग

abhidha   56 views   1 year ago

बहुत दूर तक साथ चलते-चलते अब वक़्त हो चला था कि घर की ओर जाया जाए। अपनी आँखों में उदासी के घने बादल लिए हम दोनों अपने-अपने कमरे में पहुँच गए।अलख रसोई में जाकर आज खुद अपने हाथों से पकोड़े और अदरक वाली चाय बना रही थी मेरे लिए।

जिन्दगी से कोई वादा तो नहीं था..!

chandrasingh   28 views   11 months ago

तुम बिन जीने का इरादा नहीं था जिन्दगी। पर मैं अब तुम बिन ही जीना चाहता हूँ। अब मुझे तुम्हारी जरुरत भी नहीं | इस बार जिन्दगी बड़ी मायूस होकर मेरे पास से चली गयी। जिन्दगी तुमसे कोई वादा नहीं था मेरा। हाँ लेकिन तेरे बिना जीने का अब इरादा है मेरा। सुबह हो गया।