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जिंदगी की परीक्षा

kavita   292 views   3 months ago

माँ की मृत्यु के उपरांत नितांत अकेले पिता द्वारा पुत्र के पालन पोषण में उभरती वस्तु स्थिति एवम पिता पुत्र के बीच के प्रेम का अनूठा वर्णन

निराशा

Rajeev Pundir   254 views   3 months ago

दूसरों की मजबूरियां किस तरह हमारी समझ में नहीं आती और हमारे लिए एक पहेली बन कर रह जाती है , पढ़िए इस कहानी में I

जीवन में विलेन ढूँढने की आदत (लेख)

Mohit Trendster   20 views   3 months ago

बचपन से हमें बुराई पर अच्छाई की जीत वाली कई गाथाओं का इस तरह रसपान करवाया जाता है तो कोई भी बुरा नहीं बनना चाहता। अब सवाल उठते हैं कि अगर कोई बुरा नहीं तो फिर समाज में फैली बुराई का स्रोत क्या है? दुनिया में सब अच्छे क्यों नहीं?

समूह वाली मानसिकता (लेख)

Mohit Trendster   2 views   3 months ago

समूहों की रेखाओं में उलझे समाज का विश्लेषण।

अपवित्रता??....... वो पाँच दिन (पीरियड्स)

Maneesha Gautam   64 views   3 months ago

जिस खून को लोग अपवित्र समझते हैं वे यह क्यों नहीं समझते कि 9 महीने तक माँ के पेट में उसी खून से उनका विकास और पालन पोषण होता है।

नार्मल डिलीवरी ही होनी चाहिए।

Maneesha Gautam   775 views   3 months ago

वो पिकं रेखाएं माँ बनने की परीक्षा में पास होने के संकेत थे। आंनद ,रमा का पति भी संपूर्णता की परीक्षा में सफल होकर गर्व महसूस कर रहा था।

अपशकुनी

kavita   115 views   3 months ago

समाज की घृणित सोच और गिरी हुई मानसिकता की शिकार एक युवती की कहानी

औरत का अस्तित्व

Mona Kapoor   8 views   3 months ago

औरत का हर रूप सम्मानीय है, उसे कमजोर ना समझते हुए उसकी इज्जत करें।

कंधो का बोझ

avinashsurajpur   172 views   4 months ago

पार्क की एक बेंच पर अपनी धर्मपत्नी के साथ बैठे शर्मा जी आज अपने कंधो को कुछ जादा भारी महसूस कर रहे थे। हालाँकि वो उम्र के उस पड़ाव पर थे जहाँ बहुत सी जिम्मेदारियों से मुक्ति मिल जाती है और कंधो का बोझ बहुत हद तक कम भी हो जाता है। लेकिन उनके कंधो पर इतना बोझ क्यों था??

धारा विरुद्ध

suneel   123 views   4 months ago

पर मैं सोच रही थी, कि हम लोगों ने जिस तरह अकारण ही बेटे के जन्म को उत्सव का पर्याय बना दिया है, अब उसे बदलने का वक्त आ गया है।

सबै सयाने एक मत

prakash   15 views   4 months ago

कई बार हम वास्तविकता जाने बगैर ही परिस्थितियों को दोष देते हैं। लेकिन कई बार केवल परिस्थितियाँ या साधन ही दोषी नहीं होते अपितु हमारी सोच मे ही कोई दोष रह जाता है , और हम आत्मविश्लेषण किए बगैर ही किसी को भी दोष देते फिरते हैं ।

ज़िंदगी जीत गई

kusumakardubey69   276 views   4 months ago

रोहित नामक एक युवक को अचानक ज्ञात होता है कि वह एच आई वी पॉजिटिव है। वह जीने की आशा छोड़ देता है। उसकी पारिवारिक परिस्थिति खराब हो जाती है। एक शुभचिंतक के सहयोग से वह अपनी ज़िंदगी की जंग जीत जाता है।

कर्मफल

prakash   57 views   4 months ago

क्या हमे इस जन्म मे भी पूर्व जन्म के कर्मों के फल भोगना होता है ? हमे इस जन्म मे मिलने वाले सुख या दुख का क्या पूर्व जन्म से भी कोई संबंध है या ये एक कोरी कल्पना मात्र है । ऐसी जिज्ञासा सदैव ही लोगों के मन मे बनी रहती है अतः एक छोटा स विश्लेषण .....

मुक्ति

Avinash Vyas   208 views   4 months ago

एक ऐसे अनाथ बच्चे की कहानी जिसे बाल श्रमिक के रूप में जूता फैक्ट्री से मुक्त करवाया गया और छोड़ दिया गया भूख से मरने के लिये।

WOMEN'S ARE NOT TO PLEASE YOU.

beingsheblog   8 views   4 months ago

A women, is not here to please everyone, by her look, by her body, she is also a human, and people need to understand that. @beingsheblog