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सच्चा सैल्यूट

Mohit Trendster   172 views   3 weeks ago

विमलेश - "अच्छा, थाने के आस-पास ये बुढ़िया कौन घूमती रहती है? इतना मन से सैल्यूट तो सिपाही नहीं मारते जितने मन से वो सैल्यूट करती है।" दीवान - "अरे वो पागल है सर कुछ भी बड़बड़ाती रहती है। डेढ़ साल से तो मैं ही देख रहा हूँ..."

महिलाओं का पहनावा

nehabhardwaj123   1.54K views   5 months ago

ये कहानी है वंदना की, जो अपनी गर्भावस्था के कारण पूजा में साड़ी की जगह सूट पहन लेती है, लेकिन अपनी नन्द साक्षी के कारण अपनी सास को समझाने में भी सफल हो जाती है

माँ ! माँ! मेरी माँ

poojaomdhoundiyal   17 views   1 year ago

मृत्यु के लिए कई रास्ते हैं पर जन्म लेने के लिए सिर्फ एक ……..माँ !

आसान नहीं "माँ" बनना..

Kalpana Jain   459 views   1 month ago

बहुत मुश्किल हालतों से गुजरने के बाद एक नन्हीं ख़ुशी गोद में आई।

शांति निकुंज

kavita   1.29K views   1 month ago

वर्तमान युग मे अविश्वसनीय प्रेम की पराकाष्ठा को प्राप्त एक मार्मिक प्रेम कथा

उस गाँव की स्त्रियां

nidhi   222 views   6 months ago

इन क्षेत्रों में कुछ प्रतिशत ही परिवार हैं जो इस मानसिकता से दूररहते हैंपर ज्यादातर लोगो में ऐसी छोटी मानसिकता वाले कीड़े ही दिमाग में बिलबिलाते है।।।

निशा तुम डरती क्यों हो??

rita1234   1.08K views   6 months ago

ससुराल में अपनी जिम्मेदारियों को बखूभी निभाती निशा को सासु माँ से मायके जाने की इजाज़त लेने में बहुत डर लगता है

दुनिया इतनी भी बुरी नहीं है

poojaomdhoundiyal   247 views   3 months ago

दुनिया जैसी देखती है या खुद को जैसा दिखती है वैसी है नहीं। जीवन और उसकी सच्चाई के कई पहलू हैं।

कैसी भूल..

Kavita Nagar   1.47K views   6 months ago

अपनी शिक्षा के सहज सम्मान की इच्छा लिए शिक्षा सपनों की ससुराल के ख्बाब देख रही थी

सिर्फ तुम

rajmati777   814 views   5 months ago

आज एक कार्यक्रम में शर्मा जी से मुलाकात हुई। उनके व्यक्तित्व को देख मैं बहुत अभिभूत हो गई। पर जब अनायास ही उनके घर जाना हुआ, और जो देखा तो दिमाग विचलित हो उठा।

तू धूप है छम्म से बिखर

Pallavi Vinod   1.01K views   2 months ago

अपनी जवान होती बेटी को आधुनिकता के भटकाव से एक माँ ही निकाल सकती है।

Mohra

alok   18 views   1 year ago

अब मेरी हालत ख़राब हो गयी थी । इस कारण नहीं कि मुझे एक अप्रत्याशित खुशी नसीब हुई थी, बल्कि इसलिये कि मुझे अब यह महसूस हो गया था, कि मोहरों को चलाने वाले हाथ कभी मोहरा नहीं बना करते

सबै सयाने एक मत

prakash   18 views   9 months ago

कई बार हम वास्तविकता जाने बगैर ही परिस्थितियों को दोष देते हैं। लेकिन कई बार केवल परिस्थितियाँ या साधन ही दोषी नहीं होते अपितु हमारी सोच मे ही कोई दोष रह जाता है , और हम आत्मविश्लेषण किए बगैर ही किसी को भी दोष देते फिरते हैं ।

पश्चाताप की ज्वाला

sunita   1.20K views   2 months ago

" ‎अरे!! यह तो बिल्कुल तुम्हारी तरह लगता है रीया तुम भी बचपन में ऐसी ही थी , माँ को दिखाते हुए बोली ! है न रीया जैसा " !

चले जाओ

mmb   1.28K views   1 month ago

सात साल से पति की राह देखती पत्नी