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बच्चों का बचपन जी लें...

rita1234   912 views   1 month ago

दैनिक जीवन की भागदौड़ भरी दिनचर्या में हम रोज़ बेहद कीमती पलों को नही जी पाते। वो है हमारे “बच्चो का बचपन” जिसकी कसक बाद में बेहद टीसती है।

निशा तुम डरती क्यों हो??

rita1234   1.05K views   1 month ago

ससुराल में अपनी जिम्मेदारियों को बखूभी निभाती निशा को सासु माँ से मायके जाने की इजाज़त लेने में बहुत डर लगता है

उस गाँव की स्त्रियां

nidhi   217 views   1 month ago

इन क्षेत्रों में कुछ प्रतिशत ही परिवार हैं जो इस मानसिकता से दूररहते हैंपर ज्यादातर लोगो में ऐसी छोटी मानसिकता वाले कीड़े ही दिमाग में बिलबिलाते है।।।

नारी

Nidhi Bansal   53 views   1 month ago

अधूरी अभिलाषाओ और अनजानी जिम्मेदारी में उलझी एक नारी का अपनी नई पहचान बनाने की कोशिश

कैसी भूल..

Kavita Nagar   1.36K views   1 month ago

अपनी शिक्षा के सहज सम्मान की इच्छा लिए शिक्षा सपनों की ससुराल के ख्बाब देख रही थी

मूक दर्शक

poojaomdhoundiyal   28 views   1 month ago

कितनी बार होता है कि हम किसी अच्छाई या बुराई को देख कर उसे अनदेखा कर आगे बढ़ जाते हैं। या फिर रुकते तो हैं पर बस एक मनोरंजन की आशा से। अगर मनोरंजन हो तो अच्छा वरना मूक दर्शक बन आगे बढ़ जाते हैं। कितना सही है हमारा ये व्यवहार?

हां मैं स्त्रीलिंग हूं

poojaomdhoundiyal   84 views   2 months ago

क्या दोष है उस भ्रूण क्या? यही की वो स्त्रीलिंग है। यही की वो कुछ कमजोर और हीन मानसिकता के लोगो से जुडी है। जो एक स्त्रीलिंग को पनपने न देने में अपना पौरुष समझते हैं।क्या सोचता होगा वो भ्रूण जब वो ऐसी परिस्थितियों से गुजरता होगा। उसकी भावनाएं कैसी होती होंगी।वो क्या कहना और क्या सुनना चाहता होगा ।

श्रद्धा-सुमन

falguniparikh   141 views   2 months ago

कभी कभी खुदकी गलती ही हमें जीने नहीं देती

યાદ

pravinakadkia   165 views   2 months ago

એક માતાનાં મનોભાવની વાત છે. હૃદય્સ્પર્શીવાર્તા જરૂરથી વાંચશો.

खौफ की खाल (नज़्म)

Mohit Trendster   1 views   2 months ago

खौफ की खाल उतारनी रह गयी, रुदाली अपनी बोली कह गयी... रौनक कहाँ खो गयी? तानो को सह लिया, बानो को बुन लिया। कमरे के कोने में खुस-पुस शिकवों को गिन लिया।

"फुर्सत के दो पल मिल जाते काश"......

vandita   402 views   2 months ago

आज के समय मे लोग इतना व्यस्त हो गए है कि उनके पास अपने लोगों के लिए वक्त नहीं है। ऐसा ही कुछ मेरी इस कहानी में आपको पढ़ने को मिलेगा।

अनसुलझा चेहरा

gauravji   41 views   2 months ago

वो काली अंधेरी रात को पसंद करने लगा था अब।  जिसे रौशनी से नफरत करते मैं आज-कल देख रहा हूँ, वो जिंदगी में कुछ खास करेगा या ना करेगा ये तो कोइ नहीं जानता पर वो खुद में संपूर्ण है और सफल है ,ये उसने साबित कर दिया है

दो बेज़ुबान - चीकू और मैं।

nidhi   47 views   2 months ago

मुझे रोज़ चीकू याद आता है..उसकी बड़ी बड़ी लाल आँखें याद आती हैं जो चीख चीख कर मुझसे पूछ रही हैं तुमने मुझे आज़ाद क्यों नही कराया??

ख्वाहिशों वाली खिड़की

avinashsurajpur   208 views   3 months ago

"आसमान में आज काले काले बदल थे, न तारो के कोई निशान थे न चाँद था. फैली थी अंदर से चीखती हुई, अनंत सी ख़ामोशी. और बेजान सी हो गयी थी, ख्वाहिशों कि खिड़की भी."

क्यों करूँ करवाचौथ

Maneesha Gautam   183 views   3 months ago

आप करवाचौथ क्यों करती हैं ओर यदि नहीं करती तो क्यों नहीं....मुझे आपके जवाब का इंतजार रहेगा।