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बच्चो के राम, बड़ों के राम से अलग है..

shipratrivedi   23 views   1 year ago

राम की समझ आजकल बच्चो को बड़ों से ज्यादा है. बड़ों ने तो राम को एक समस्या बना दिया है जो कभी लोगो के बीच तो कभी कचहरियो मे सुनी जा रही है..

तेरा ज़िक्र हो रहा है इबादत की तरह

Maneesha Gautam   1.46K views   9 months ago

ख्याल रखिये अपनी पत्नियों का, अपने घर में रहने वाली महिलाओं का, वो आपका ख्याल रखते- रखते अपने आप से दूर हो जाती है. आपके मकान को घर बनाने के लिए अपने शरीर को मशीन बना देती है

उम्मीदों की कश्ती- अंतिम भाग

abhidha   68 views   1 year ago

बहुत दूर तक साथ चलते-चलते अब वक़्त हो चला था कि घर की ओर जाया जाए। अपनी आँखों में उदासी के घने बादल लिए हम दोनों अपने-अपने कमरे में पहुँच गए।अलख रसोई में जाकर आज खुद अपने हाथों से पकोड़े और अदरक वाली चाय बना रही थी मेरे लिए।

उम्मीदों की कश्ती-७

abhidha   53 views   1 year ago

बर्फीले तूफ़ान के गुज़रते ही हमने अपनी चढ़ाई शुरू की। अब धीरे-धीरे जैसे-जैसे हम ऊपर चढ़ रहे थे हमें ऑक्सीजन की कमी महसूस रही थी परन्तु अलख में पता नहीं कहाँ से एक नयी ऊर्जा का संचार हो गया था

उम्मीदों की कश्ती-६

abhidha   56 views   1 year ago

अगली सुबह से हम लोग अलख के अंडर ट्रेनिंग में थे। कर्नल साहब आर्मी में थे और मैं खुद भी एक बार एवरेस्ट की आधी चढ़ाई चढ़ चुका था इसलिए हमें कोई परेशानी नहीं होती। अलख के नए पैरों की वजह से उसे पहले छोटे-छोटे रास्तों पर ट्रैकिंग करवानी थी जिससे उसके पैरों को पहाड़ी रास्तों की आदत हो जाये।

उम्मीदों की कश्ती-५

abhidha   67 views   1 year ago

सारी रात मुझे नींद नहीं आई। देर रात मैं उठकर कागज़ पर कुछ लिखकर कश्तियाँ बना रहा था। अगली सुबह मैं झरने की ओर भागा देखा तो अलख नहीं थी।

उम्मीदों की कश्ती-४

abhidha   69 views   1 year ago

अलख के साथ जब मैं घर पहुँचा तो कर्नल साहब और तृप्ति जी मुझे हैरानी से देख रही थीं।

उम्मीदों की कश्ती-३

abhidha   79 views   1 year ago

'शायद मेरी शादी का ख्याल दिल में आया है, इसीलिए मम्मी ने तेरी मुझे चाय पर बुलाया है'

उम्मीदों की कश्ती-२

abhidha   89 views   1 year ago

यूथ हॉस्टल पहुँचकर जूता एक तरफ फेंक केयर टेकर को आवाज़ दी- काका खाने में क्या है? वो बोला- साब,आज तो जीरा आलू, रोटी और दाल तड़का ही है

उम्मीदों की कश्ती- १

abhidha   116 views   1 year ago

पिछली बारिश पहाड़ों से घिरे छोटे से कस्बे में मैं एक स्टडी टूर पर था, कुछ जड़ी-बूटियाँ खोजने गया था।यूथ हॉस्टल से सुबह-सुबह निकल पड़ता मैं।अभी अपने कमरे से बाहर ही आया था कि केयर टेकर ने आवाज़ दी- 'साब जी वो जन्तो के यहाँ पकोड़े बहुत अच्छे बनते हैं, लौटते में खाते आना, खाने में देर हो जाएगी

Prayer To Death

AJAY AMITABH SUMAN   11 views   2 months ago

This is a poem about a soul, who always tried to evade death by citing various reasons.

कर्तव्य और अधिकार

utkrishtshukla   47 views   1 year ago

कर्तव्यों का ढिंढोरा पीटना एक मूर्खतापूर्ण​ कार्य है।

चले जाओ

mmb   1.33K views   7 months ago

सात साल से पति की राह देखती पत्नी

MY NAME IS SHANTI AND I AM AN ANGRY GODDESS

poojaomdhoundiyal   64 views   1 year ago

THIS STORY IS ABOUT A LADY, WHO FIGHT FOR HERSELF, FOR HER DIGNITY, FOR HER IDENTITY. WHO GIVE A BIG FIGHTS TO ALREADY ESTABLISHED NOTIONS IN A SOCIETY. HER STORY TELLS SOCIETY, ITS NOT NAME THAT DOES MATTERS ITS ACTS THAT HAS THE MEANING AND IDENTITY.

अंत

mmb   1.20K views   6 months ago

उसको अपने अंत का अहसास होने लगा था