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उम्मीदों की कश्ती- अंतिम भाग

abhidha   78 views   2 years ago

बहुत दूर तक साथ चलते-चलते अब वक़्त हो चला था कि घर की ओर जाया जाए। अपनी आँखों में उदासी के घने बादल लिए हम दोनों अपने-अपने कमरे में पहुँच गए।अलख रसोई में जाकर आज खुद अपने हाथों से पकोड़े और अदरक वाली चाय बना रही थी मेरे लिए।

रामरस

kumarg   441 views   1 year ago

गरीब के पेट पर लात पड़ती है तो सांप की तरफ फुंफकारता है गजोधर भी फुंफकारे। लेकिन ढ़ोरबा सांप से कौन डरता है । कुछ ही देर में कुचाकर चोखा बन गए ।

नालायक बेटा !!

nehabhardwaj123   1.18K views   1 year ago

ये कहानी है रमा की और उसके बेटे राकेश की जो एक बीमारी से ग्रस्त है

A DATE WITH DEPRESSION

mehakmirzaprabhu   26 views   1 year ago

I am so sleepy. Eye lids are heavy as wet winter blankets. Phone is ringing. I forgot to keep it off hook and I have only myself to blame for that. I have only myself to blame for many more things.

“मन के हारे हार है मन के जीते जीत”

poojaomdhoundiyal   303 views   1 year ago

डिप्रेशन चुप चाप दबे पाँव आकर कब हमारे दिल और दिमाग को अपने काबू में कर लेता है हमे पता ही नहीं चलता। जब पता चलता है तब तक हम हार चुके होते हैं। अपने अपनों से, दोस्तों से समाज से दूर हो चुके होते हैं।

दिल की सुनो, दिमाग से चलो

harish999   26 views   1 year ago

दिल की बात सुनते हुए दिमाग से काम किया जाए तो सफलता की उम्मीद बहुत ज्यादा रहती है. दोनों ही हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है.

नई पीढ़ी नये रंग

Manju Singh   281 views   1 year ago

तब और अब का अन्तर हमेशा रहा है किन्तु यदिथोदी सी समझदारी दिखाई जाये तो शायद हम इस अन्तर को समाप्त कर सकते हैं।

कागा सब तन खाइयो........!

chandrasingh   86 views   1 year ago

दुनियाँ के वे तमाम रिश्तें जो स्वार्थ , जरुरत , पर टिके हैं जो आपसे हमेशा कुछ ना कुछ लेने की बाँट ही जोहते हैं।

कैसी भूल..

Kavita Nagar   1.49K views   1 year ago

अपनी शिक्षा के सहज सम्मान की इच्छा लिए शिक्षा सपनों की ससुराल के ख्बाब देख रही थी

चीनी

kumarg   851 views   1 year ago

चीनी फज्र की नमाज के बाद खाँ साहब गणेशी के चाय की थड़ी पर अखबार पढ़ने बैठ गये। अभी भट्टी गरम होने में कुछ समय था ग्राहक इंतजार से ऊब चले न जाएं इसलिए गणेशी ने टीवी ऑन कर दिया। समाचार आ रहे थे जवानों से भरी बस में हुआ विस्फोट।

सबै सयाने एक मत

prakash   20 views   1 year ago

कई बार हम वास्तविकता जाने बगैर ही परिस्थितियों को दोष देते हैं। लेकिन कई बार केवल परिस्थितियाँ या साधन ही दोषी नहीं होते अपितु हमारी सोच मे ही कोई दोष रह जाता है , और हम आत्मविश्लेषण किए बगैर ही किसी को भी दोष देते फिरते हैं ।

मुक्ति

Avinash Vyas   213 views   1 year ago

एक ऐसे अनाथ बच्चे की कहानी जिसे बाल श्रमिक के रूप में जूता फैक्ट्री से मुक्त करवाया गया और छोड़ दिया गया भूख से मरने के लिये।

उठती उंगलियाँ

rajesh   1.13K views   1 year ago

तुम्हारी विवेचना का तो यह अर्थ हुआ कि लड़कियां सुसराल न जाकर पितागृह में ही अपने कर्तव्य को निभाती रहे।" इसबार उसका बहनोई अनिरुद्ध ढाल बनकर आगे आए।

वो चेहरा कहीं खो गया।

rita1234   526 views   1 year ago

माँ का महत्व हम सब को मालूम है। बचपन से लेकर हर अवस्था में हमे माँ के स्नेह और प्रेम की जरूरत होती है

चले जाओ

mmb   1.33K views   11 months ago

सात साल से पति की राह देखती पत्नी