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पिंजरा

sidd2812   40 views   2 years ago

उसको हर सोमवार के दिन आकर, पंछियों को स्वतंत्र करना सुहाता था। मुश्ताक़ की नज़र में वो बहुत भला आदमी था। पर भ्रम एक दिन सबके टूटते हैं।

ज़िन्दगी कभी न, मुस्कुराई फिर बचपन की तरह....

poojaomdhoundiyal   29 views   2 years ago

कभी कभी मन करता है फिर से बच्चे बन जाये। बचपन के वही पल वही मस्ती फिर से जी जाये । जब जब मौका मिला कोशिश भी की। वही सब करने की, जो वही बचपन वाली अनिभूति दे जाये। खुशी तो मिली लेकिन बचपन नहीं !!

दानी

sidd2812   40 views   2 years ago

उसके पास जागीरें थीं। और वो कंगाल हो गया। लेकिन उसके चेहरे से मुस्कराहट न हटी। क्योंकि जीत फिर भी उसी की हुई थी।

निराशा

Rajeev Pundir   263 views   1 year ago

दूसरों की मजबूरियां किस तरह हमारी समझ में नहीं आती और हमारे लिए एक पहेली बन कर रह जाती है , पढ़िए इस कहानी में I

मै टूटता जा रहा हूँ..

arn   23 views   2 years ago

हमेशा से बडे सपने पाने की चाह मे असफल शख्श के मन का दर्द

"…और हमने उसे पत्थरों से मारा!"

Mohit Trendster   12 views   2 years ago

"हैलो! आगरा फायर सर्विस स्टेशन।" "हैलो, यहाँ शाहगंज इलाके कि ट्रांजिट ईमारत मे लग गयी है आग..... जल्दी मदद भेजिए।" साइरन बजाती बढ़ रही थी फायर वैन, हर गुज़रते पल के साथ उसमे बैठे विकल का चैन, ईमारत वासियों पर गृहण सा लगा, उनकी उम्मीद का एकमात्र सहारा जाम में फंसा।

गुलटेन

mrinal   21 views   2 years ago

मालिक,चार सौ से ज्यादा हो गया है आपके यहाँ। दे दीजिए ना, बड़ा दिक्कत चल रहा है। तड़ाक की आवाज़ से चाय दुकान पर बैठे सब लोग सहम से गये और गाल सहलाते हुये गुलटेन बाकी ग्राहकों को चाय देने लगा।

विकिपीडिया और बिकाऊ मीडिया के पार की दुनिया

Mohit Trendster   65 views   2 years ago

हरीश शांत स्वर में मेघना को समझाने लगे - “चिंता मत कर मेघू बेटे! ऐसे करियर बर्बाद होने लगते तो मैं कबका एक्टिंग छोड़ चुका होता। तेरा वीडियो मैंने देखा है। एक पार्सल भेजा है तुझे, बाकी फ़ोन पर नहीं समझाऊंगा। अपने मैनेजर और टीम को बुला ले उन्हें समझा दिया है, उनकी बात ध्यान से सुनकर वैसा ही करना… ”

नियति

dks343   132 views   2 years ago

story of a poor family ,who could not save the life of their beloved sons inspite of there great efforts,they did all what they could do. बाहर लकदक टेंट लगे थे। नसबन्दी जैसे जुमले का हुस्न शबाब पर था। उसी शामियाने के पीछे उस गंदी इमारत पर तहरीर लिखी थी, ‘‘तत्काल लाभ, तुरंत भुगतान।

दो बेज़ुबान - चीकू और मैं।

nidhi   52 views   1 year ago

मुझे रोज़ चीकू याद आता है..उसकी बड़ी बड़ी लाल आँखें याद आती हैं जो चीख चीख कर मुझसे पूछ रही हैं तुमने मुझे आज़ाद क्यों नही कराया??

कंधो का बोझ

avinashsurajpur   175 views   1 year ago

पार्क की एक बेंच पर अपनी धर्मपत्नी के साथ बैठे शर्मा जी आज अपने कंधो को कुछ जादा भारी महसूस कर रहे थे। हालाँकि वो उम्र के उस पड़ाव पर थे जहाँ बहुत सी जिम्मेदारियों से मुक्ति मिल जाती है और कंधो का बोझ बहुत हद तक कम भी हो जाता है। लेकिन उनके कंधो पर इतना बोझ क्यों था??

जिंदगी की परीक्षा

kavita   299 views   1 year ago

माँ की मृत्यु के उपरांत नितांत अकेले पिता द्वारा पुत्र के पालन पोषण में उभरती वस्तु स्थिति एवम पिता पुत्र के बीच के प्रेम का अनूठा वर्णन

वो खत.... अहसासों के !

rgsverma   469 views   1 year ago

कुछ खतों में सिमट अहसास, और जीवन के साधारण से पलों की सहज व्याख्या है यह कहानी। और वह अहसास ओढ़ कर ही समझे जा सकते हैं। आइये, पढ़ें--

हां मैं स्त्रीलिंग हूं

poojaomdhoundiyal   85 views   1 year ago

क्या दोष है उस भ्रूण क्या? यही की वो स्त्रीलिंग है। यही की वो कुछ कमजोर और हीन मानसिकता के लोगो से जुडी है। जो एक स्त्रीलिंग को पनपने न देने में अपना पौरुष समझते हैं।क्या सोचता होगा वो भ्रूण जब वो ऐसी परिस्थितियों से गुजरता होगा। उसकी भावनाएं कैसी होती होंगी।वो क्या कहना और क्या सुनना चाहता होगा ।

क्यों करूँ करवाचौथ

Maneesha Gautam   191 views   1 year ago

आप करवाचौथ क्यों करती हैं ओर यदि नहीं करती तो क्यों नहीं....मुझे आपके जवाब का इंतजार रहेगा।