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@dawriter

हमको उठा लो भगबान (कहानी जैसा ही कुछ)

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dhirajjha123 by  
Dhiraj Jha

हमको उठा लो भगबान ( कहानी जैसा ही कुछ)
“अच्छा सिला दिया तुने मेरे प्यार का यार ने ही लूट लिया घर यार का” ई गीत 36वीं बार बज रहा था । चाईना का फोन, कान फाड़ू अबाज, लोराएल झोराएल आँख के सामने खुलल दस रुपया में ली हुई दर्द भरी सायरी के किताब आ अँटा चालने वाला चलनी के जैइसे छलनी हुआ रमजनमा के दिल । दू महीना हो गया फूलबतिया के सादी हुए । मगर रमजनमा के जखम अभी तक नही भरा । पंजाब से जेतना पईसा लाया था सबका दारू पी कर भगवान से गुहार लगाया कि हे भगवान हमको उठा लो । 
पर भगवान बखत से पहिले किसको उठाया है जो इसको उठाता । मगर रोज रोज का इसका “हमको उठा लो” वाला अलाप सुन के भगवान का भी कनवा पक्क गया था । रोज दारू पी के देर सवेर भगवान को डिस्टरब करने लगा । एक दिन इसके अलाप से दुखी हो कर भगवान मौत बाबा को बुलाए आ बोले के ” जाओ आ ई ससुरा को नानी परनानी सब याद करादो जिससे ई फिर हमको परसान ना करे, हाँ पर इसका आयु समाप्त नही हुआ तो धेयान रहे कि ई ससुरा मरे ना ।” मौत बाबा भी भगवान का हुकुम बजाए और चल दिए अपना मिसन पर । 
रमजनमा अपना दलान में लेटा सायरी पढ़ रहा था आ रो रहा था । तभी मौत बाबा उहवाँ पहुँच गए आ मुतकुरा के उसकी तरफ देखे आ उनके देखते ही रमजनमा को लगा जईसे कोनो गला दबा रहा है । रमजनबा पहिले सोचा देसी पाऊच के असर होगा पर जोर जोर से सांस लेने पर ठीक हो जाएगा । मगर ई का साँस आ ही नही रहा कोनो रस्ता से नही, बेचैनी बढ़ते जा रही है आँख से कुछो लऊकिए नही रहा । रमजनमा घिरनी के तरह घूम रहा है इधर से उधर पर कोनो फरक नही । चाची यहाँ जाता है चाची अपना दुखड़ा पसार देती हैं कोई भईसी को नजरिया दिया तो चच्चा आज कल उन पर धियान नही दे रहे । रमजनमा आऊर कनफयूज अब भईंसी आ चाची के सौन्दर्य का बिसलेसन सुने कि अपनी बेचैनी संभाले । जब चाची का एस्पीकर बंद नही हुआ तो रमजनमा नदी की तरफ भागा । 
तब उसको खयाल आया कि अरे साला ई तो दुआ कबूल हो रहा है । हम तो साला मर रहे हैं पर हमको नभी मरना हमको का पता था कि मौत साला अइसे मारेगा हमारी । लगा महादेव को गुहार लगाने “ए महादेब एमकी बचालो अब से कहिओ नही कहेंगे मौत देने के लिए । नादान थे गलती हो गया । अब नही करेंगे । ” एतना कह के ऊ नदी में कूद गया । आ दस मिनट पानिए में चुभुक्ता रहा । मौत बाबा सामने मज़े से हंस रहे थे । अब उनको लगा इससे जादा ई सह नही पाएगा तो छोड़ दिए उसका प्रान आ प्रान छोड़ते ही रमजनमा पानी में से भुल करके निकला । अब सांस भी आ रहा था बेचैनी भी गायब थी । मौत बाबा की तरफ हाथ जोड़ के बोला ” गलती हो गया बाबा अब नही बुलाऐंगे तुमको, अब जब मन हो तभिए आना ।” मौत बाबा जोर का ठहाका लगाते चले गए । 
उसके बाद रमजनमा कभी नही कहा की हमको मरना है । मरना एतना आसान होता तो रोज अपनी परेशानियों से लड़ रहे लोग यही रास्ता अपनाते । ज़िंदगी छोटी है इसके हर पल में ज़िंदगी है बस उसे देखने के लिए अलग से खुशी भरे नज़रिए की ज़रूरत है । कभी ऐसा ख़याल आए तो मौत के भय को पहले याद कर लीजिएगा । 
धीरज झा



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