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@dawriter

ये कैसी मानसिकता

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"बहुत बहुत बधाई, डॉ चीया" कार्यक्रम में शामिल होने आए सभी चीया को और उसके पापा मम्मी को बधाई दें रहे थे। चीया भी आज बहुत खुश थी। चिड़िया की तरह इधर उधर भाग रही थी। कभी अपने दोस्तों के साथ तो कभी अपने परिवार के साथ आ आ कर खुशियां के इन खुबसूरत लम्हों को कैमरे में तों कभी अपने मोबाइल में कैद कर रही थी।

मुझे याद आ रहें थे वो पुराने दिन। पापा की बहुत इच्छा थी कि मेरी एक बेटी डाक्टर बने। पर उस समय मां बाप बेटियों को पढ़ाने के लिए बाहर कहा जाने देते थे। घर बैठ कर पढ़ाई करो। और ज्यादा हों तो समूह में लड़कियों को ट्यूशन के लिए बाहर भेजते थे। उचित माहौल न मिलने के कारण पापा का सपना अधूरा ही रह गया। पर आज तो सभी खुश थे। और इस खुशी की घड़ी में पापा मम्मी की याद आ गई तो बरबस ही सभी के आंखों से अश्क बहने लगे।

आज तो समाज की दशा ही परिवर्तित हो गई। बेटियों के लिए कितनी नयी राहें बन गई है और वह ऊंचे-ऊंचे पदों पर नियुक्त हैं।

‌‌‌तभी मेरे कानों में एक आवाज आई जो कुछ जानी पहचानी सी लग रही थी।"चीया बहुत बहुत बधाई, नहीं नहीं, डॉ चीया बहुत बहुत बधाई।"....धन्यवाद अंकल आपका"।...."मेडिकल में प्रवेश हो गया, बहुत अच्छी बात है, तुम तो अब से ही डॉक्टर लगाना शुरू कर दो।"

" नहीं अंकल अभी तो मेरा सैकंड ईयर है।"..."तो क्या हुआ,अब तुम चार साल में डाक्टर बनो,या दस साल में, प्रवेश हो गया है इसमें तो डाक्टर बन कर ही निकलोगी।"

मुझे ये सुन इतना अजीब लगा और गुस्सा भी आया। पर मैं अपने संस्कारों की वजह नहीं बोल पाई।

इतना ही नहीं उसे एक किस्सा बताने लगे। हमारे पड़ोस में एक लड़का है। उसका इंजीनियरिंग में प्रवेश हो गया। गिरते पड़ते उसने दस साल में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर ली।

मेरे मन में विचार आया कि ये चीया को बधाई दें रहे कि‌ उसके हौसले को नीचा कर रहे हैं। ये कैसी गन्दी मानसिकता है, लोगों की। बेटियां दिन रात मेहनत कर के अपनी मंजिलों को हासिल करती है। पर कुछ निम्न मानसिकता रखने वाले लोग हैं समाज में।जो बेटियों को प्रोत्साहित करने के बजाय उनको अपनी बुलंदियों तक पहुंचाने में राह के कांटे बन उभर आते हैं।

आप को मेरी ये कहानी पसंद आई हो तो अपने विचार मेरे साथ सांझा करें।



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