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@dawriter

मै टूटता जा रहा हूँ..

2 20       
arn by  
Arun Gaud

 

 

मै अंदर ही अंदर टूटता जा रहा हूं

जमाना बढ गया है बहुत आगे

और मै

पीछे छूटता जा रहा हूं

वक्त की रेत को

हाथो से भऱने की एक नाकाम सी

कोशिश मे लगा हूं मै

रात की काली श्याह के बाद

एक नयी किरण की

उम्मीद लिये जगा हूं मै

ना ही वक्त थम रहा है मुझसे

ना ही कोई

उजली किरण मेरे अंधेरे को हटा रही है

नाकमी की इस

कभी ना खत्म होने वाली रात मे

मै घुटता ही जा रहा हूं

मै अंदर ही अंदर टूटता जा रहा हूं

मै पीछे छूटता जा रहा हूं..।

जो संगी साथी कभी थे बहुत पीछे मुझसे

बडे कौतहुल से मुझे देखते थे

वो दौड़कर तो कुछ रेंग कर

आगे निकल गये है

खुद को आगे देख आज

कुछ तरस खा रहे है मुझपर

तो कुछ हसी उड़ा रहे हैं

उन सबसे आँखे फेर

हमेशा की तरह

उड़ने की चाह लिये अभी भी खड़ा हूं मै

सफलता का एक झोखा आये

और मुझे उड़ाकर सबसे आगे ले जाये

इस उम्मीद पर अब भी अड़ा हूं मै

पर अब उम्मीदे भी मुझको मुह चिढ़ा रही हैं

वो भी मेरा मजाक बना रही हैं

उनकी तेज हसी के आगे

मै झुकता ही जा रहा हूँ.

अंदर ही अंदर टूटता जा रहा हूं

मै पीछे छूटता जा रहा हूं........।

 



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