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@dawriter

बेईमान था मौसम बेईमान से तुम थे

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बेईमान था मौसम बेईमान से तुम थे,        सुरुर था कुछ चढ़ा, डगमगाये कदम थे !!

मौसमों ने भी उनसे की थी कुछ छेडखानी,
बदला-बदला मिजाज, बदले से तुम थे !!

हवाओं ने भी कर दी थी शरारत कुछ उनसे,
उड रहा था दुपट्टा, ज़ुल्फ उड रही थे !!

गुलफ़म सी हसीना, गुलमोहर लग रही थी,
खुबसूरत से वो, अजन्ता की मुरत लग रही थी!!

हम तुम्हें तुम हमे देख रहे थे,
नज़रें मिल गयी थी, अब दिल मिल रहे थे !!

मौसमों ने मिल के साजिशें रच रहे थे,
उस शरमाती हुई को, बेशरम कर रहा थे !!

सहसा सुर्ख सी रेखा आसमान मे खिच गई,
बादलों की गर्जना फिर जोर से हुई ‌!!

डर गयी थी वो, थोड़ा सहम सी गये थे,
बिन बताये मुझको बाहों मे भर चुके थे !!

मौसम था बेईमान, अब हम भी हो चुके थे,
वो मेरी हो चुकी थी, हम उनके हो चुके थे !!

चन्द्र प्रताप सिंह 



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