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@dawriter

बुर्का बेहया

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अपने ही शहर की किसी अंजान सी सड़क के किनारे रोहित बेजान सा पड़ा हुआ है और वहीं कहीं आसपास उसके सपनों की जिंदा लाश कराह रही है...!!

वो 'सबा' है...इस वक़्त उसके बदन के पूरे कपड़ों को मिला दिया तो वो पूरे के आधे तो जरूर ही बन जाएंगे और वहीं पास में कुछ परिचित कुछ अपरिचित कपड़ों के चिथड़े पड़े हैं और कहीं कहीं खून के धब्बे भी बने हैं जो पूरी कहानी बयां कर रहे हैं...!!

एक खौफनाक कहानी..जो कोई सुनना नही चाहता है पर हम तो लेखक हैं सुनाएंगे...जरूर सुनाएंगे

बेसुध रोहित की कहानी
आधी नंगी पढ़ी सबा की कहानी और पास ही पड़े चीथड़ों में घुले एक बुर्के की कहानी..


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रोहित और सबा मिल गए थे...
पता नही कैसे मिल गए थे मगर मिल गए थे और फिर दोस्ती भी हो गयी..
दोस्ती कब इश्क़ विश्क़ में बदल गयी इसका तो कोई अंदाज़ा ही नही लगा सकते हैं..
दो अलग अलग मजहब के महबूब सारी दुनियादारी से मुक्त उड़ा करते थे...
उनके प्यार में न कोई साजिश थी और न ही कोई दिखावा..
ये परफेक्टली सच्ची वाली मुहब्बत थी..


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रोहित अक़्सर सबा से कहता था कि ये तुम क्या हमेशा बुर्का ओढ़ के चली आया करती हो.कितना अजीब लगता है लोगों के बीच में तुम थोड़ा ओल्ड एज्ड सबा बन जाती हो...

सबा हमेशा की तरह मुस्कुरा के जवाब देती कि जनाब ये बुर्का नही है...ये तो हया है हमारी अम्मी ने सिखाया था कि बुरका लगाने औरत और ज्यादा खूबसूरत लगने लगती है...अब अम्मी तो नही हैं मगर उन्होंने ज़न्नत से कहीं हमे बिना बुर्का के देखा तो हमे बेहया ही मानेंगी...!!
अपनी मरहूम अम्मी की यादों को हम ओढ़े रहते हैं तो इसमें क्या अजीब है...???

अमन एक प्रेमी की तरह खामोशी से घिरता है तो कह देता है कि एवें ही प्रवचन न सुनाया करो...

सबा बोल पड़ती प्रवचन क्या..???
अमन तुम भी तो यो गले में हनुमान जी की तस्वीर बांधे हो, हमने कभी मना किया क्या तुम्हें..??
तुम क्यों जताया करते हो कि हर रिलेशनशिप में मर्द ही मुख्तार होते हैं..

अमन कहता भी क्या आगे.
हनुमान जी को वो बीच बहस में थोड़े घसीटना चाहता था..

उनके रिलेशनशिप का यही खास स्टेटस था जो उनकी लव स्टोरी को खासम खास और अलग बनाता था..

फिर एक रोज़..


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सबा जिंदगी में पहली दफा रात को घर से बाहर जाने की परमिशन लायी है. उसकी बूढ़ी खालाजान इतनी ओल्डएज टाइप की हैं कि उसे घर से बाहर ही नही निकलने देना चाहती हैं मगर वो किसी तरह आज निकली है...

और वही प्रेमी प्रोफेशनल जोड़े की तरह बुद्धवार की शाम और मल्टीप्लेक्स में किसी पिच्चर के नाम...

निकल पड़े अमन और सबा एक ऐसे सफर पर जो सिनेमाघर तक जाकर ऐसे मुड़ रहा था कि बस दर्द ही दर्द था


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अमन और सबा जल्दी में थे कि आज सबा को खालाजान से बचा लें वरना अगर कहीं खाला ने अपने दिमाग का घोड़ा दौड़ाया तो उनकी मुहब्बत तो सेकंडों में हार जाएगी..

दोनों ने एक शार्ट कट मारा और पहुंच गए अनजान सड़क में...उसी अंजान सड़क में

कुछ स्वघोषित सांस्कृतिक रखवाले मिल गए रास्ते में..उनकी संस्कृति तो उनकी मुह की बास से समझ आ रही थी मगर फिर भी वो संस्कृति के रखवाले थे और ऊपर तक उनका पौव्वा था....

अब संस्कृति के रखवालो के दिमाग मे दारू घुसी हो और सुनसान सड़क में रात को कोई 11 बजे के आसपास हिजाब ओढ़े किसी अकेले लौंडे के साथ कोई लड़की दिख जाए वो भी अप्सरा की तरह खूबसूरत तो वो लार टपका ही देंगे...!!

कुछ नही तो कम से कम तफ्तीश करेंगे....कैसे लोग हैं दुनिया में जो उनकी इस तफ्तीश को भी छेड़खानी का नाम देते हैं..!!

सीधे पूछ बैठे मजहब सम्बंधी असहिष्णु टाइप के सवाल और अमन उनके सामने करे तो क्या करे..??
कुछ ज्यादा कहना मतलब कब्र खोद लेना और उनके त्रिनेत्र के सामने भस्म हो जाना है..
लाचार अमन ने हनुमान जी की लॉकेट को पकड़ लिया और धमाका हो गया....

भोले भाले हिन्दू लड़को को एक नमाजी लड़की ने फंसा लिया और रात को उसके साथ धर्मभ्रष्ट करने जा रही है...
अनिवार्यतः उसे सजा मिलनी चाहिए...

सूनसान सड़क में अब इस सजा का प्रतिकार कौन करता...??

करीना कपूर भी तो एक नमाजी के साथ है और आमिर खान और न जाने कितने ऊंचे लोग मुहब्बत के हाथों धर्म लुटाय बैठे हैं मगर सजा दो बेचारों को...

अमन ने प्रतिकार किया तो मारा पीटा गया और उसने आंखों के सामने अपनी सबा की अस्मत लूटते देखी और धर्म का नंगा तमाशा देखा...

घंटो ठेकेदार बदलते रहे और सबा चीखती रही...ये सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक सबा के शरीर का मांस ठंडा नही समझ आने लगा...

सबा तड़प रही है...
हाय! बुर्का कितना बेहया है....
इसी ने हंसती खेलती सबा को नरक भेज दिया...
अम्मी भी जन्नत से रो रही होंगी...!!


अफसोस की बात तो ये है कि लॉकेट वाले हनुमान जी भी नही आये उनकी सहायता को...!! 



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