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@dawriter

बाबुल की दुआएँ लेती जा

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मेंहदी है रचने वाली, हाथो में गहरी लाली...

ढोलक पे बजते गाने, मेंहदी की खूशबू से महकता हुआ घर, जिस कोने पे भी नजर जाये बस मेहमान ही नजर आ रहे थे.झिलमिल झालरो की बीच जगमागता घर, और मेंहदी के लिबास में अकीरा..

दूर से अपनी लाडो अकीरा को नम आँखो से देखती माँ निधी....  अकीरा की नजर भी अपनी माँ पर गयी....

बेटियों को ऊपरवाला दिल में थोडा़ सा ज्यादा लाड़ और दिमाग में थोडी सी ज्यादा समझदारी डालकर भेजता है दो घरों को सम्हालना होता है न इसलिए.

अकीरा भी समझ गयी कि माँ अपनी बिटिया की आने वाली विदाई को सोचकर लाड़ की बारिश आँखों से कर रही है.

माँ यहाँ आओ न देखो मेंहदी कैसी लगी है...

निधी जी को महसूस हुआ कि आज भी अकीरा तीन साल की ही है और वैसी ही मासूमयित से बुला रही है जैसे उस वक्त कहती थी मम्मा आओ न मेरे साथ खेलो...

निधी जी ने आँसू छुपाते हुए चेहरे पे मुस्कुराहट लाते हुए अकीरा के पास आई  कितनी सुंदर मेहदी....बहुत अच्छी...

माँ आजतक आपने मुझे हर परीक्षा के एक दिन पहले कुछ नया सिखाया है कल मेरी शादी है एक और परीक्षा की शुरुआत क्या इस बार कुछ नही सिखाऐगीं.

निधी जी ने भरे गले से कहाँ...हाँ कल शादी है और परसो ....विदाई....

अरे भाई ऐसे न रोओ बेटी दुखी हो जायेगी..पंकज जी अकीरा के पिता ने कहा...

हाँ माँ आज भी कुछ सिखाओ न...

हाँ मेरे बच्चा मेंहदी लगवा मै बताती हूँ.

हर व्यक्ति को अपने जीवन में दो पढाई पढ़नी होती है पहली जो उसे स्कूल में मिलती है और दूसरी जो उसे जीवन सिखाता है...शादी के बाद औरत को घर गृहस्थी की पढा़ई भी पढ़नी पड़ती है...और ये कुछ कुछ स्कूल कॉलेज की पढा़ई जैसी ही होती है शादी के बाद नये घर में ऐसा लगता है कि जैसे जंग का मैदान सामने है. तुमे याद है तुम सबसे ज्यादा इतिहास से डरती थी क्योंकि तुम उसे अपने अनुसार बदल नही सकती थी, हमेशा कहती थी अकबर औऱ 1857 की कांति से हमे क्या लेना देना पर तब मैं तुम्हें क्या कहती थी.

आप कहती थी माँ कि यदि हमने इतिहास नही पढा तो पता कैसे चलेगा कि हम यहाँ तक कैसे पहुंचे, 1857 हमारी आजादी मिलने का संघर्ष है.

हाँ मेरी गुडिया ऐसा ही इतिहास तुम्हें अपनी ससुराल में सास का पढ़ने को मिलेगा, कि हमारे जमाने में ये होता था, वो होता था, हो सकता है ये सुनना हो हम तो घूंघट में रहते थे, ये कर नही सकते थे और वो नही कर सकते थे. तब उनके पक्ष को भी समझना और उन्हे प्यार से कहना "माँ आप ने हमारे लिए वो सब कुछ सहा तब तो आपकी बहू को वो सब कुछ नही करना पड़ रहा , थैक्यू ममा"

अकीरा ने मुस्कारते हुए कहा हाँ मम्मा जरूर....  

भूगोल तुमने पढा़ दुनिया को समझने के लिए, कौन सा देश कहाँ है किसकी क्या वास्तु स्थिति है, हो सकता है तुम्हे अपने नये घर का भूगोल पंसद ना आये पर सांइस का जडत्व का नियम हमेशा याद रखना जैसे वस्तु अपनी स्थिति में ही रहना चाहती है यदि हमे उसे बदलना है तो उस पे फोर्स लगाना होगा, वैसे ही रिश्ते होते है, बुजुर्ग होते है वो जिस स्थिति में रहते है वो उसे बदलना नही चाहते, यदि हमे उन्हे बदलना है  तो प्यार और आदर से भरे फोर्स का प्रयोग करो.

ओके मम्मा

कैमेस्ट्री का बहुत महत्व है बेटा गृहस्थी में, हो सकता है घर के सभी सदस्यो साथ पाजिटिव रिऐक्शन वाले रिजल्ट न आए निगेटिव रिजल्ट न आए इसकी पूरी कोशिश करना. ये भी याद रखना हमेशा दो और दो चार नही होते , गृहस्थी के सिलेबस में यदि दो अच्छे है तो दो से बीस भी हो सकते है और दो अच्छे नही है तो जीरो भी.

पर हमेशा याद रखना गलत को गलत बोलना और सही को सही बोलना अच्छी बात है पर बोलने का लहेजा, सामनेवाले बंदे और माहौल पे निभ्रर करता है.

तुम्हारे पापा इतने अच्छे इन्सान हैं जिन्होंने मेरे जीवन के हर एक सबजेक्ट को पास होने मे मेरी मदद की। जब एक सांस चढती है और दूसरी उतरती है उसमे प्राण बसे होते है ये दोनो सांसों का जोड़ा है पति पत्नी, दोनो तभी खुशनुमा जीवन जी सकते हैं जब दोनों टीम की तरह काम करें. दोनों समझें कि एकदूसरे से जीतने के बजाय मिल कर जीतना जरूरी है. 

 



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