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@dawriter

प्रीत न करियो कोई

2 199       
rajmati777 by  
rajmati777

मै नादान परिंदे की तरह अपने घौंसले में बेफिक्र होकर रह रही थी।दूर देश से एक परिंदा मेरे घौंसले के इर्द गिर्द चक्कर लगाने लगा। वो शायद मुझ से कुछ कहना चाहता था। मैं नादान भले ही थी,पर अनजान परिंदों की तरफ नजर उठा कर भी नहीं देखती थी।

वाह परदेसी परिंदा हमेशा सुबह हो या शाम मुझे देखता रहता। अरे भाई डिजिटल जमाना है, तो मोबाइल पर मुझे संदेश भेजता। मैं कभी उसे जवाब नहीं देती।तो भी मुझे कभी अपनी फोटो भेजता कभी संदेश में प्यार की शायरियां भेजता।

वो परिंदा अब धीरे-धीरे मुझे कुछ ठीक लगने लगा। मैंने पूछा क्या चाहते हो मुझसे। तो बोला तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो। तुम्हारा चेहरा बहुत सुन्दर है। तुम्हारी आंखें बहुत नशीली है। तुम्हारे लब बहुत हसीन है।

मैंने कहा ऐसा कुछ नहीं है। अरे बाबा हों तुम बहुत अच्छी।

और ऐसे वो धीरे धीरे मुझसे प्यार करने लगा। मैंने कहा मैं तुमसे प्यार नहीं करती।...... मैं तो बहुत करता हूं।.... तुम करो मत करो।

क्या तुम मेरा जीवन भर साथ निभाओगे। कभी बीच राह में छोड़ोगे तो नहीं।.....ना बाबा, प्यार किया है दिल से,...... कोई खेल नहीं है।

एक दिन मैंने कहा मैं किसी पर विश्वास नहीं करती। मैं बहुत इमोशनल हूं। मुझे आज कल की लड़कियों की तरह नखरें करने भी नहीं आते।न उनकी तरह अंग्रेजी बोलने आती है। मैं तो साधारण सी दिखने वाली लड़की हूं,सीधी सादी। क्या तुम मुझे स्वीकार कर पाओगे।

और सुनो मैं तुम्हारी सोसायटी की तरह हाई फाई भी नहीं हूं। क्या तुम मुझे समझ पाओगे। मुझे तो आम लड़कियों की तरह अदाओं से दीवाना बनाना भी नहीं आता। क्या तुम मुझे अपना बना पाओगे।

हां बाबा हां, तुम बहुत अच्छी हो, साफ़ दिल की, मैं सच मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं।

.......... और उस परदेसी परिंदे के प्रेम पाश में उलझ गयी। वो और मैं घंटों प्यार की बातें करतें। कभी अपने दिल की बात शेयर करते। वो परिंदा मुझे अब अपनी जान से भी ज्यादा प्यारा लगने लगा था। उसके नाम से ही दिल की धड़कन बढ़ जाती थी। वो बात करता तो मन में उत्साह बना रहता। प्यार चीज़ ही ऐसी है। जीवन में खुशियां, ऊर्जा भर देती है।

........सब कुछ अच्छा चल रहा था,.....पर अब ..... वो धीरे धीरे.... परिवर्तित होता दिखाई दिया। पहले जितना अटेंशन देता था, अब कम हो गया। मैंने पूछा आजकल बात क्यो नही करते मुझसे। तो बोला....हनी थोड़ा बिज़ी हूं। मैंने भी मान ली उसकी बात। क्यों की मैंने तो उससे बहुत प्यार किया था। और अब भी करती हूं। मैं किसी के साथ नहीं जुड़ती पर उसके साथ......।

अब तो हद ही कर दी, पूरा दिन इंतजार करती पर वो बात नहीं करता। मेरे आंखों से अश्क बहने लगते। बहुत रोती, उसको याद कर के।

एकं दिन मैंने पूछा... मुझसे नाराज़ हो गये क्या... नहीं बाबा काम बहुत है। पर जब तुम ने प्यार की शुरुआत की तब तो तुम बिज़ी नहीं रहते थे। अब ऐसा क्या काम आ गया। सारे प्रश्नों के जवाब देने वाला कोई नहीं था।

मैं अपने नींद में जा उसके ख्वाबो में खो इंतजार करती रहती।......... घंटे बीत गए,.....दिन बीत गए, और महीने बीत गए..... कोई संदेशा नहीं आया। मैं इंतजार में अश्कों की नदियां बहा दिल को तन्हा कर रूलाती रही।

मैंने परदेसी परिंदे को पहले ही बोला था, मैं बहुत इमोशनल हूं, मेरे दिल के साथ खिलवाड़ मत करना।.....पर‌ वो परिंदा मेरे अरमानों के पंख काट आसमान में उड़ान भर बादलों की ओट में छिप गया।। और मुझे दे गया बस आंसू और छिन ली मेरी मुस्कान।

और दिल में यही विचार आने लगा....

रब की बनाई हुई में एक प्यारा से किरदार थी,

परदेसी परिंदे के प्रेम पाश में अपने को भूल गयी थी,

इश्क मोहब्बत प्यार प्रीत सब जहान में दिखावा है,

नहीं चाहिए प्यार मैं अपने घोसले में ही अच्छी थी। ‌‌‌



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