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@dawriter

पैसे की खनक या किस्मत की मार ??

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हर 'क्यों' का जवाब नही होता, पर कुछ बातें जीवन मे 'क्यों' पर आके अटक जाती है जैसे। आखिर ऐसा क्यों हुआ या होता हैं, पूछो तो जवाब न होने पर जवाब मिलता हैं सब 'नसीब का खेल हैं', या उसके 'कर्मों का फल' है या 'उसकी किस्मत'। या कहते पैसा सब करवा सकता है।

मैं आज किसी के मन को ठेस या किसी पर कोई व्यंग्य या कटाक्ष के कारण नही लिख रही हूं। मैं तो बस अपने आसपास होने वाली घटनाओं ,किस्सों को सुन देख मन मे आये सवाल 'क्यों' के बारे में बताना चाह रही हूं क्या पता आपको उस 'क्यों' का जवाब पता हो।

एक आदमी दिन -रात मेहनत करता है। ईमानदारी से रुपया कमाता है । कई बार लोग उसे काम जल्दी करवा दो इसलिए ज्यादा रुपये भी देने की बात करते, पर वो अपनी फीस से एक रुपया ज्यादा नहीं लेता । और काम भी सही समय पर करता । वही दूसरा आदमी काम भी आराम और देरी से करता । अपनी फीस से दोगुनी कमाई भी करता।

वो आदमी आज सफल और बड़े लोगों में गिना जाता है। बहुत मेहनत से यह सफलता प्राप्त की ऐसी तारीफ़े सुनता ।  ऐसा क्यों??

एक प्रसिद्ध मंदिर के दो भक्त। एक भक्त जो अपने घर मे भी रोज सुबह -शाम पूजा पाठ करता है। औऱ जब मौका मिलता हैं,उस प्रसिद्ध मंदिर में पहले ट्रैन फिर कुछ दूर बस और पैदल जाता । ज्यादा दान देने को पैसे नही होते पर कुछ राशि जरूर दान पेटी में डालता है। और पूरे मन से भक्ति पूजा करता है।

वही दूसरा भक्त अपनी खुद की गाड़ी में उस दिन प्रसिद्ध मंदिर पहुँचता है। जिस दिन भीड़ ज्यादा हो और अपना नाम लिखवाकर दान करता । भोजन करवाता,बोर्ड पर अपना नाम लिखवाता। और मंदिर के पुजारी भी पहली आरती के लिये उसका इंतज़ार करते, और वही भक्त आरती करता। सब उसे बड़ा भक्त बड़ा दानी कहते है वहाँ।  ऐसा क्यों??

स्कूल में डांस सिलेक्शन के वक़्त जो लड़की बहुत अच्छा डांस करती हैं पर दिखने में साँवली है। उसको पीछे खड़ा किया जाता है। और जो डांस अच्छा नही करती पर दिखने में बहुत सुंदर है,उसे सबसे आगे खड़ा किया गया।  ऐसा क्यों?? 

एक भाई -भाभी जिनके पास रुपये भले कम हो ,पर जब बहनें उनके घर आती है कुछ दिन रहने को तो, भाई अपनी बहनों और उनके बच्चों के साथ खूब वक़्त बिताता। और भाभी भी खूब खातेदारी करती । पर महंगे तोहफे नहीं दे पाते ।

वही दूसरे भाई - भाभी के जब बहनें जाती। भाई के पास इतना टाइम नहीं होता । पर डाइवर को भेज शहर जरूर घुमाता । भाभी बस महंगे तोहफे जरूर देती पर उनके आने से खुश नहीं होती।

बहनें भी जो भाई महंगे तोहफे देता उनके बच्चों के लिए बढ़िया तोहफे ले जाती । और दूसरे भाई के कुछ नही ले जाती । और जो वक़्त भी नहीं देता उनकी खूब तारीफ़ भी करती ।   ऐसा क्यों??

एक विद्यार्थी दिन -रात मेहनत करता है। खूब मन लगाकर पढ़ाई करता है । और परीक्षा में कुछ अच्छे नम्बरों से पास भी हो जाता है । वही दूसरा विद्यार्थी नकल करता है,पेपर खरीदता हैं। और एक रात पढ़ परीक्षा में अव्वल आता है ।  ऐसा क्यों??

 एक बहु घर का हर छोटा -मोटा काम करती है। ना किसी से शिकायत करती है, ना ही अपने किये काम गिनवाती है । अपना घर समझ काम करती है। वही दूसरी बहु दिखावे का काम करती है । बस एक कोई डिश बनाकर सबको खुश करती है। या कोई गिफ्ट देकर या चापलूसी करती हैं । वो अच्छी बहु कहलाती है ।  ऐसा क्यों??

एक भाई अपनी कमाई का हर हिस्सा घर के खर्चों जैसे - राशन ,बिजली बिल, दवाइयां इत्यादि में लगा देता है। और खुद के पास कुछ नहीं रखता। वही दूसरा भाई अपने ऐशोआराम में खर्च करता है। और जब सब रिश्तेदार परिवार इकट्ठा होते तो खर्चा करता है उनपर।

मतलब जो दिखाई दे दुनिया को वहाँ रुपये लगाता है। और सब की नज़रों में अच्छा बेटा/भाई /इंसान बनता है। सब उसी की वाह वाही करते है।  ऐसा क्यों??

यह आज के समाज का सच है या समाज सच देखना नहीं चाहता । यह पैसों की खनक है या किस्मत की मार। क्या आपके मन में भी "ऐसा क्यों??" जैसा सवाल आता है??



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