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@dawriter

परिकल्पना - ( ओरिजिन )

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( नोट :- यह कहानी साइंस फिक्शन , इंडियन माइथोलॉजी और सुपरहीरो की अवधारणा पर आधारित है )
।।
साल 2050...
रात का समय है ,
बनारस के किसी खाली जगह पर एक बूढ़े बरगद का पेड़ है। उस पर बहुत सारे चिड़िया अपना घोंसला बना कर अपने परिवार के साथ रहती है।
तीसरी डाली पर रहने वाली “ट्यूनी” चिड़िया ने उस बूढ़े बरगद के पेड़ जिसका नाम “दाजु” है , उनसे बोली - दाजु दादू कोई कहानी सुनाये ना।।
दाजु ने पूछा - कौन सी कहानी सुनना चाहती हो तुम ?
इंसानों की - ट्यूनी ने कहा ,
ठीक है मैं एक असली कहानी सुनाता हूँ। जो एक इंसान और एक चिड़िया की दोस्ती की कहानी है। और वो चिड़िया किसी जमाने में इसी पेड़ पर रहा करती थी। और यह घटना दो भविष्यवाणी को सही साबित करने के लिए घटी थी। पहली भविष्यवाणी मेरे गुरुजी ने सन 1930 में कियें थे। और दूसरी भविष्यवाणी उस चिड़िया के पूर्वज द्वारा हुई थी। दोनों भविष्यवाणी को मैं कहानी सुनाते समय बताऊंगा।।
।।।।
साल 2017 ,,,
.....
वाराणसी के किसी हॉस्पिटल में ,,
सुबह छः बजे मृदंग उठा। बाकी दिनों की अपेक्षा वह आज अपने आप को एकदम हल्का महसूस कर रहा था। मानो ऐसा की वो रुई से भी हल्का हो गया था। उसने आसपास नज़र दौड़ाई , उसने अपने आप को हॉस्पिटल के किसी वार्ड में पाया। सामने एक नर्स दिखाई दी।
उसने नर्स से जा कर पूछा - सिस्टर मुझे क्या हुआ है ? मुझे हॉस्पिटल में क्यों रखा गया है ?
पर नर्स ने कुछ जवाब नहीं दिया , यहाँ तक की उस नर्स ने  पलट के मृदंग की तरफ देखा तक नहीं। मृदंग बार बार पूछते रहा , पर उस नर्स ने जवाब देना तो दूर मृदंग के तरफ देखा तक नहीं।

मृदंग को नर्स के इस व्यवहार से बुरा लगा। उसने उस वार्ड के और भी लोगों से बात करने की कोशिश की , पर किसी ने भी उसके सवालों का जवाब तक नहीं दिया। मानो ऐसा लग रहा था की मृदंग वहाँ था ही नहीं। मृदंग चुपचाप उदास मन से उस वार्ड के खिड़की के पास आ कर खड़ा हो गया। और बाहर की ओर देखने लगा , बाहर बरसात हो रही थी  । खिड़की के बाहर छज्जे पर एक चिड़िया बैठी थी , बारिश के कारण वो चिड़िया वहीं रुक गयी थी। तभी मृदंग ने अपने हाथ से उस चिड़िया को छूने की कोशिश की , चिड़िया एक तरफ उड़ के बैठ गयी।
“तुम मुझे यूँ परेशान नहीं कर सकते हो” - यह आवाज़ मृदंग को सुनाई दिया ,
उसने अपने आसपास देखा की ये किसने बोला। पर उसे कोई दिखाई नहीं दिया , जिसने यह बात बोला हो।
“इधर - उधर क्या देख रहे हो , मैं तुम्हारे सामने बैठी हूँ” - वो आवाज़ फिर आयी।
सामने केवल वही चिड़िया , मृदंग को दिखाई दी। मृदंग को कुछ समझ में नहीं आया।
हाँ मैं ही तुमसे बात कर रही हूँ - उस चिड़िया ने कहा ,
मृदंग को लगा वह अब बेहोश हो जाएगा। पर वह बेहोश हो  नहीं सका।
तभी वो छोटी चिड़िया ने दुबारा कहा - तुम बेहोश नहीं हो सकते हो , क्योंकि तुम पहले से ही बेहोश हो।
पहले से बेहोश हूँ मतलब ? - मृदंग ने उस छोटी चिड़िया को पूछा।
जाओ जरा बेड नंबर दस को देख कर आओ , और आ के बताओ तुमने वहाँ क्या देखा ? - छोटी चिड़िया ने कहा।

मृदंग बेड नंबर दस  के पास जा कर जो चीज़   देखा उसे उसपर विश्वास नहीं हुआ। वह तुरंत उस छोटी चिड़िया के पास गया , और बोला - उस बेड पर तो मैं खुद लेटा हुआ हूँ , और मैं यहाँ भी हूँ। क्या इसका मतलब मैं मर गया हूँ ? शायद इसलिए नर्स और बाकी लोग मेरे सवालों का जवाब नही दे रहे थे और मेरी ओर देख भी नहीं रहे थे।
तुम अभी मरे नहीं हो - छोटी चिड़िया ने कहा।
तुम्हें कैसे पता ? - मृदंग  ने उस छोटी चिड़िया से पूछा।

मैं तुम्हें सब बताती हूँ। सबसे पहले मेरा नाम “प्यूनी” है। मेरा घर यानी तुम्हारे हिसाब से मेरा घोसला वो सामने वाली गली  में जो पेड़ है उसपर है।

अब तुम्हारे सवाल का जवाब देती हूँ। इस धरती पर हर जीव के शरीर में एक ऐसी चीज़ होती है , जिसके माध्यम से या तो वो सर्वशक्तिमान बन सकता है या इस दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा। और वो चीज़ होती है “दिमाग” , इसका सही इस्तेमाल करना चाइए। इंसानों के बारे में मुझे जितना पता है , उस हिसाब से एक बच्चे का दिमाग जन्म के वक़्त पचास प्रतिशत ( 50% ) के आसपास तक सक्रिय रहता है। पर जैसे ही वो बच्चा धीरे - धीरे बढ़ने लगता है उसके दिमाग की क्षमता कम होने लगती है और पूर्ण रूप से वयस्क होने पर उस दिमाग की क्षमता सिर्फ 10% -15% तक आ कर रुक जाती है। अब मैं बताती हूँ जानवरों , पक्षियों और पेड़ - पौधों के बारे में , यानी इंसानों के अलावा और जितनी भी प्रजाति इस धरती पर है , सबका दिमाग 30% के ऊपर ही सक्रिय होता है। किसी का 30% , किसी का 40% इत्यादि। अपने दिमाग की शक्ति के कारण हम वो देख सकते है जो मनुष्य नहीं देख सकता है , हम वो सुन सकते है जो मनुष्य नही सुन सकता , हम वो चीज़ महसूस कर सकते है जो मनुष्य नहीं महसूस कर सकता है।
अब तुमने मुझसे पूछा था , की तुम मरे हो या नही ? इसका जवाब है नहीं।

तुम मरे नहीं हो , बस तुम्हारा दिमाग एक आम इंसान के दिमाग से ज्यादा सक्रिय हो गया है। कितना अधिक सक्रिय हुआ है इसका पता तुमको खुद लगाना होगा। हाँ मैं केवल इतना बता सकती हूँ की तुम्हारा दिमाग अभी इतनी शक्तिशाली है की तुम्हारा आभासी रूप तुम्हारे उस मिट्टी के शरीर से बाहर आ - जा सकता है। उस आभासी रूप को इंसान “आत्मा” कह कर संबोधित करते है।
“आत्मा” यानी मेरा यह रूप आत्मा है , यानी मैं मर चुका हूँ - मृदंग के आभासी (वर्चुअल) रूप ने चौंकते हुए कहा।
मैंने कहा न तुम नहीं मरे हो , बस तुम्हारी दिमाग की शक्ति बढ़ चुकी है - प्यूनी ने कहा,
पर कैसे ? - मृदंग ने पूछा ,

इंसान तब मृत्य को प्राप्त करता है जब वह काल चक्र की प्रक्रिया को पूरी कर ले।  और उसके बाद उसकी आत्मा ईश्वरीय कण से मिल जाती है , उसके जीवन का मकसद पूर्ण हो जाता है। उसे पूरे ब्रह्मांड के राज पता चल जाता है , इसलिए उसे शून्य में मिल जाना होता है। जिस जीव की दिमाग 50% के ऊपर सक्रिय हो जाये वो दूसरे की आभासी रूप को देख सकता है , उससे बात कर सकता है  । पर ... - प्यूनी इतना बोल के चुप हो गयी।
पर ,क्या - मृदंग के आभासी रूप ने पूछा।
पर जिस किसी का दिमाग 100% पर आ जाता है तो , वह या तो मर जाता है  या अमर हो जाता है। और जो मर जाता है उसकी आत्मा में बात करने की शक्ति खत्म हो जाती है। क्योंकि उसके अंदर से इस दुनिया के लिए मोह - माया खत्म हो जाती है - प्यूनी ने बताया।
ओह , यानी मैं तुमसे बात कर रहा हूँ , इसका मतलब यह है की मेरा दिमाग 100% पर नहीं आया है। लेकिन एक आम इंसान की तुलना में ज्यादा सक्रिय हो चुका है। इसलिए मेरा शरीर बेहोश है और मेरी आत्मा इस धरती के राज जान रही है अपने नए दोस्त से - मृदंग के आभासी रूप ने प्यूनी के तरफ इशारा करते हुए कहा।
हाँ तुम अभी अपने शरीर के आभासी रूप हो , जिसका दिमाग आम मनुष्य के तुलना में ज्यादा शक्तिशाली है। पर तुम्हारा शरीर तुम्हारा साथ नहीं दे रहा है , तुम्हारा शरीर बेहोश है। और डॉक्टरों के हिसाब से तुम अभी कोमा में हो - प्यूनी ने कहा।
।।

मृदंग और प्यूनी में बात हो ही रही थी की तभी मृदंग के आभासी रूप को पार करते हुए एक और इंसान की आभासी रूप  प्यूनी के पास आया।
यह मृदंग के लिए एक और अजीब स्थिति थी।
आप कौन है ? - प्यूनी ने उस नए आभासी रूप से पूछा।
हाँ - हाँ आप कौन है ? और आप मुझमें आरपार कैसे हो गए - मृदंग ने भी पूछा।
मैं हूँ “नारायण शर्मा”। मैं पीछे से तुम दोनों की सारी बातें सुन रहा था - शर्मा जी के आभासी रूप ने दोनों को जवाब देते हुए कहा।
पर मुझे इंसानों में कोई नहीं देख सकता , या सुन सकता है - मृदंग ने कहा।
तुम भुल रहे हो मृदंग। अभी - अभी इन्होंने तुम्हारे आभासी रूप में आरपार हो कर गुज़र गए है। यानी इनका भी दिमाग भी एक आम इंसान के तुलना में अधिक सक्रिय हो गया है , और उस स्तिथि में की इनका आभासी रूप इनका शरीर छोड़ कर बाहर की दुनिया देख सकता है - प्यूनी ने दुबारा मृदंग को याद दिलाते हुए कहा।
क्या आपको याद है आप इस हॉस्पिटल में क्यों और कैसे आये ? मतलब आपके साथ क्या हुआ था ? - मृदंग (आभासी) ने शर्मा जी ( आभासी) से पूछा।

हाँ मुझे याद है। कल शाम मेरी  नोक - झोंक मेरे बेटे और बहू के साथ था , उसके बाद मुझे दिल का दौरा पड़ा। मैं बेहोश हो गया था। उसके बाद मेरा बेटा मुझे हॉस्पिटल ले आया। मैं बेहोश था , पर फिर भी मैं यह सब देख रहा था  । मैं उससे बात करना चाह रहा था , पर वो मेरी बात सुन नहीं पा रहा था। मुझे नहीं पता चल रहा था की मेरे साथ क्या हो रहा था। फिर डॉक्टरों को बोलते सुना की मैं कोमा में जा चुका हूँ , मुझे लगा डॉक्टर मेरे बेटे को लूटना चाहते है। जबकि जब उन्होंने कोमा वाली बात बोले थे तो उस वक़्त मैं वहीं पर खड़ा था। उस वक़्त मुझे नहीं पता था की वहाँ  मेरा आभासी रूप है। और आज तुम दोनों को बात करते सुना तब मुझे सब कुछ पता लग गया - शर्मा जी ( आभासी) ने कहा।

अच्छा ठीक है अभी मैं अपने घर जाती हूँ। तुम दोनों आज इस रूप का फायदा उठाओ , क्योंकि तुम दोनों को भी इंसान नहीं देख सकता है , लेकिन तुम दोनों सब कुछ देख सकते हो और सुन सकते हो।।
।।।।
दूसरे दिन ,,,
सवेरे में प्यूनी फिर हॉस्पिटल आयी।
क्या हुआ उदास लग रहे हो - प्यूनी ने मृदंग से पूछा ।
हाँ कल रात बहुत कुछ देखा मैंने ? - मृदंग ने जवाब दिया,
क्या देखा तुमने ? - प्यूनी ने पूछा।
कल मेरे शरीर में दो बोतल खून चढ़ाया गया। डॉक्टरों ने मेरे पापा से कहा की मेरा बचना मुश्किल है। मेरा दायां पैर एक्सीडेंट में पूरी तरह बेकार हो चुका है। मुझे पता भी नही मेरा एक्सीडेंट कब हुआ था। मैं जीना चाहता हूँ - मृदंग (आभासी) ने कहा।
अच्छा तुम्हें आखिरी बात क्या याद है , जब तुम अपने शरीर में थे - प्यूनी ने पूछा।
मुझे बस इतना याद है हम सब दोस्त बाइक से बंगलोर से पटना आ रहे थे - मृदंग (आभासी ) ने कहा।
ओह दोस्त से याद आया , मेरा दोस्त राघव कहाँ है , उसके बारे में मुझे कुछ नहीं पता है - मृदंग के आभासी रूप में बेचैनी साफ झलक रही थी।
अच्छा कोई बात नहीं सब याद आ जायेगा।
और शर्मा जी आपने कल रात को क्या - क्या देखा और महसूस किया - प्यूनी ने शर्मा जी के आभासी रूप से सवाल किया।
मुझे कल पता चला की मेरा बेटा कर्जा में है वो रात में अपनी बीवी को बता रहा था। उसके बाद मैं दीवालों में आरपार जा रहा था , बाकी सभी पेशेंट के बारे में जान रहा था , उड़ उड़ के - शर्मा जी ( आभासी ) ने कहा।
अच्छा मेरा एक सवाल है - शर्मा जी ( आभासी )ने प्यूनी से कहा।
क्या सवाल है आपका - प्यूनी ने कहा।
इस हॉस्पिटल में इतने मरीज है फिर भी केवल दो इंसान के ही आभासी रूप मौजूद है। बाकी के नहीं है क्या ? - शर्मा जी ( आभासी ) ने प्यूनी से सवाल किया ।
इस सवाल पर मृदंग भी हैरान था , मानो वह भी यही सवाल करना चाहता हो। सवाल सुन कर प्यूनी हँसने लगी।
मुझे इस सवाल का इंतजार कल ही था , खैर कोई नही देर आये दुरुस्त आये। इसका सीधा सा जवाब है बाकी पेशेंट में बहुत से पेशेंट बेहोश होंगे , कोमा में होंगे। लेकिन यह जरूरी नही सबका दिमाग की सक्रियता बढ़ी हो , आदमी ऐसे भी बेहोश हो सकता है। और तुम दोनों के साथ किसी घटना के कारण दिमाग की शक्ति बढ़ी है और बाकियों के साथ कुछ नहीं - प्यूनी ने कहा।
अच्छा यह सब बातें छोड़ो , चलो मेरे घर मैं अपने गुरुजी और अपने परिवार से तुम दोनों का परिचय करवाती हूँ - प्यूनी ने कहा।
तुम्हारे घर औऱ तुम्हारे गुरुजी ? - मृदंग (आभासी) ने पूछा।
हाँ मेरे घर , मुझे पता है हम चिड़ियों सब के घर को तुम इंसान लोग घोंसला बोलते हो। कल जब मैं अपने घर गयी तो यह सारी बातें अपने गुरुजी को बताई तो उन्होंने इच्छा जताई की वो तुम दोनों से मिलना चाहते है - प्यूनी ने कहा।
तुम्हारे गुरुजी ? चिड़ियों के भी गुरु होते है क्या - मृदंग ( आभासी) ने पूछा ,
क्यों हम चिड़ियों के गुरु नहीं हो सकते है क्या ? कितनी बार बोल चुकी हूँ हमारा दिमाग इंसानों की तुलना ज्यादा शक्तिशाली होता है - प्यूनी ने कहा ,
ठीक है ठीक है। पर हम तुम्हारे घर कैसे जाएंगे - मृदंग ( आभासी) ने पूछा।
अरे नादान इंसान , तुम उड़ के जाओगे , जैसे शर्मा जी का आभासी रूप उड़ रहा है - पीछे से दो छोटी चींटियों में से एक ने मृदंग ( आभासी ) से कहा।
मृदंग के आभासी रूप ने देखा की शर्मा जी का आभासी रूप हवा में उड़ रहा है।
मृदंग का भी आभासी रूप ने उड़ना शुरू किया। उसके बाद शर्मा जी और मृदंग प्यूनी के साथ उड़ कर चल पड़े।
पीछे वो दोनों चींटियां आपस में बात कर रही थी , “ये इंसान भी न , ना जाने कब अपनी शक्तियों को जानेंगे”।
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मृदंग और शर्मा जी का आभासी रूप प्यूनी के साथ हवा में उड़ चले थे।
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यह क्या है प्यूनी ? आसमान में दो सूरज - मृदंग और शर्मा जी के आभासी रूप ने प्यूनी से सवाल किया।
हाँ हमारे आकाशगंगा में हमेशा से दो सूरज रहा है - प्यूनी ने कहा।
पर हम सब केवल एक सूरज को देखते आये है - मृदंग ( आभासी) ने कहा।
इंसानों के देखने , सुनने और समझने की एक सीमित क्षमता होती है , इसलिए इंसान बहुत कुछ नही देख सकता है - प्यूनी ने कहा।
पर इंसानों ने इतने अविष्कार किये है उससे भी यह सूरज नही दिखाई दिया ? - मृदंग के आभासी रूप ने सवाल किया।
प्यूनी इस सवाल पर हँसने लगी और बोली इन सभी सवालों का जवाब मेरे गुरुजी “दाजु” देंगे।।
रास्ते मे उन सभी ने देखा की असल में आसमान नीला न हो कर हरा होता है। बादल आपस में नाच रहे है। जीवन की अनंत संभावनाओं से वो परिचित हो रहे है।।
।।।
अब तीनों कोई एक बरगद के पेड़ के पास आ कर रुके।।
देखो मृदंग , देखिए शर्मा जी इसी पेड़ पर मेरा घर है और यही मेरे गुरु “दाजु” है - प्यूनी ने कहा ,
ये पेड़ तुम्हारे गुरु है। पेड़ कभी बोलता है क्या - मृदंग ने पूछा।
इंसान , इंसान , इंसान इस धरती पर सबसे काबिल प्रजाति। लेकिन सबसे बड़ा मूर्ख - उस पेड़ में से आवाज़ आयी।
ये कौन बोला - मृदंग ने पूछा।
ये दाजु बोले है , यानी यह बरगद का पेड़। इनकी उम्र चार सौ पचपन ( 455 ) साल है - प्यूनी ने कहा।
एक पेड़ कैसे बोल सकता है - मृदंग के आभासी रूप ने पूछा।
ठीक वैसे ही , जैसे यह प्यूनी तुमसे बात कर रही है - दाजु ने कहा।
पर ..... - मृदंग की बात अधूरी रह गयी उससे पहले दाजु ने बोलना शुरू किया।
तुम जानते हो न तुम दोनों की दिमागी शक्ति बढ़ गयी है। इसलिए तुम वो चीज़े देख सकते हो सुन सकते और महसूस कर सकते हो , जो आज से पहले कभी नहीं किया था - दाजु ने उन दोनों से कहा।

आपको कैसे पता की हमारी दिमागी शक्ति बढ़ चुकी है - मृदंग ने शर्मा जी के आभासी रूप की तरफ देखते हुए कहा।
क्या तुमने कभी किसी इंसान को एक पेड़ से बात करते सुना है या देखा है। नहीं न , और मैं तुमसे बात कर रहा हूँ  और तुम मुझसे , तो इसका क्या मतलब हुआ - दाजु ने कहा।
यही की हमारी दिमागी क्षमता औरों से अधिक है - शर्मा जी के आभासी रूप ने कहा।
बिल्कुल सही - प्यूनी ने कहा।

पर मुझे एक बात समझ नहीं आयी आसमान का हरा रंग होना , दो सूरज का चमकना। यह हम इंसानों को क्यों नहीं दिखाई देता है - मृदंग ( आभासी) ने पूछा।
एक इंसान की सीमित क्षमता होती है किसी चीज़ को देखने की और महसूस करने की। इसी कारण उन्हें सब कुछ दिखायी नहीं  देती है , वह कितने भी अविष्कार कर ले उन्हें यह दूसरा सूरज कभी  दिख नहीं सकता है। क्योंकि उस दूसरे सूरज को देखने के लिए इंसानों को अपनी “तीसरे आँख” की जरूरत पड़ती है। पर इंसान अपनी गलतियों के कारण अपनी तीसरी आँख की शक्ति को हमेशा दबाए रखता है। तुम इसलिए देख रहे हो , यह तुम्हारा आभासी रूप असल में तीसरी आँख का जागृत होने के कारण हुआ है - दाजु ने कहा ,
तीसरी आँख यानी “त्रिनेत्र” , यानी भगवान शंकर की शक्ति हम इंसानों में भी होती है - मृदंग ने पूछा ,

हा हा हा , तुम हर चीज़ों को केवल इंसानों से क्यों जोड़ कर देखते हो। इस धरती पर और भी जीव है और सभी के पास त्रिनेत्र की शक्ति होती है। बस इंसान उसका इस्तेमाल सही तरीका से नही करता है , लेकिन हम इसी शक्ति का इस्तेमाल सही चीज़ के लिए करते है। इसलिए जब कभी भूकंप या कोई प्रकृति आपदाएं आती है तो हमें पहले ही दिख जाता है - दाजु ने कहा।
औऱ हम इंसान इस त्रिनेत्र की शक्ति को कैसे और क्यों नही इस्तेमाल कर पाते है - मृदंग के आभसी रूप ने पूछा।

इंसान का जब जन्म होता है तो उसका दिमाग 50% तक सक्रिय रहता है। उसे इस धरती के बारे में बहुत कुछ पता रहता है। पर धीरे - धीरे वह बच्चा बड़ा होता है और इंसानों की बनाई भौतिक दुनिया में चला जाता है और वहाँ से वो सीखता है हिंसा , क्रोध , पाप करना , दूसरों जीवों पर अत्याचार , प्रकृति के साथ छेड़छाड़। वो दिन प्रति दिन और महत्वाकांक्षि बनते जाता है , उसे और चाइए की लालसा उसे अपने अंदर छिपी ईश्वरीय कण से दूर करते जाती है। वह नित प्रति दिन नए नए अविष्कार करती है , ईश्वरीय सिद्धान्त को चुनौती देने में लगा रहता है। धरती पर सभी संसाधनों का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ अपने लिए करना चाहता है। जब तक इंसान ऐसे ही पाप करता रहेगा तब तक उसकी दिमाग की शक्ति ऐसे ही कम होते रहेगी। जानते हो अगर इंसान अपने शरीर मे रहते हुए अपने दिमाग को 100% तक सक्रिय कर ले तो वह “अमर” हो जाएगा। पर क्या उसका अमर होना इस धरती के लिए उचित होगा। जरा सोचो एक आम इंसान जिसकी दिमाग की क्षमता केवल 12% - 15% तक ही होती है , तब वो इंसान इतना ज्यादा शैतानी करता है , ईश्वर को चुनौती देते रहता है , भगवान के बनाये नियम को तोड़ने में लगा रहता है। तो वैसे इंसान का क्या भरोसा जब उसका दिमाग शरीर के साथ 100% पर चला जाये। वो महामानव बनने की जगह इस धरती के लिए दैत्य बन जायेगा और खुद को ईश्वर साबित करने लग जायेगा। इंसान पाप करना छोड़ दे , औऱ उन “चार रास्तों” में से किसी एक रास्ता पर चलना सिख ले तो वह शरीर के साथ होते हुए अपने दिमाग की क्षमता बढ़ा सकता है - दाजु ने कहा ,
कौन सा चार रास्ता - मृदंग और शर्मा जी दोनों के आभासी रूप ने एक साथ सवाल पूछा।
वो चार रास्ता यह है :-
1. योग या तपस्या ,
2. संगीत ,
3. नृत्य ,
4. नशा ,
- दाजु ने कहा ,
जरा विस्तार से बताइये - शर्मा जी के आभासी रूप  ने कहा।
इन चारों चीज़ में जो इंसान , अपने शरीर के साथ रहते सिद्धि प्राप्त कर लेता है वह इंसान अपने दिमाग को सौ प्रतिशत कर ले तो वह या तो अमर हो जाएगा या मर जायेगा। और जो अमर हो जाता है वो भी इस कालचक्र से परे हो जाता है - दाजु ने कहा।
बाकी तीन का तो समझ में आया , लेकिन यह नशा वाला समझ नहीं आया - मृदंग के आभासी रूप ने कहा।
तुमने देखा होगा जो नशेड़ी होते है , वो अजीब - अजीब बातें करते हुए पाए जाते है। वह असल में नशा के वक़्त अपने दिमाग की क्षमता को बढ़ाता है। दरसल नशा कर के लोग अपने शरीर के बाकी अंग खराब करते जाता है और अपने को मौत के करीब आते जाता है। नशा वाले व्यक्ति ज़्यादातर पागल होने लगता है , क्योंकि नशा के वक़्त उसके दिमाग की क्षमता बढ़ती है तो उसे ब्रह्मांड और ईश्वरीय कण की जानकारी मिलने लगती है , औऱ यही सब चीज़ वो नशे की हालत में बोलता है। तो उस समय बाकी लोग उसे पागल और नशेड़ी समझते है। पर उस वक़्त वह ईश्वर से जुड़ा हुआ रहता है। जब उसका नशा उतरता है तो उसका सर भारी रहता है क्योंकि वह तो एक आम इंसान ही है ,  पर नशा के कारण दिमाग की शक्ति बढ़ा लेता है और बाकी अंग कमजोर हो जाता है और होश में आने पर थकावट महसूस करता है। इसको तुम ऐसे समझ सकते हो जब इंसान का मोबाइल हैंग कर जाता है तो फिर उसको शुरू होने में समय लगता है। यह नशा वाला तरीका से आप ईश्वरीय कण से मिल तो सकते है लेकिन मर के , न की अमर हो के - दाजु ने कहा।
और बाकी तीन तरीके जो आपने बताएं है उससे क्या इंसान अमर हो सकता है ? - शर्मा जी के आभासी रूप ने सवाल किया।
हाँ बिल्कुल हो सकते है। और भी एक - दो कारणों से इंसान अमर हो जाते है - दाजु ने कहा।
कहीं मैं सपना तो नहीं न देख रहा हूँ ? - मृदंग के आभासी रूप ने अपने आप को चूंटी काटते हुए कहा।
पर वह चूंटी काट नहीं पाया। वह शायद भूल गया था यह उसका आभासी रूप है उसका शरीर तो अभी भी हॉस्पिटल में है।
हाँ हाँ देखा आप सभी ने , मैं अपने आप को चूंटी नही काट पाया इसका मतलब यह है की मेरा शरीर अभी सपना देख रहा है - मृदंग के आभासी रूप ने कहा।
सपनों की एक अपनी अलग दुनिया होती है - दाजु ने मुस्कुराते हुए कहा।
क्या मतलब ? - शर्मा जी और मृदंग ने दोनों ने एक साथ पूछा।
सपने कही प्रकार के होते है। सपनों से पहले तुम दोनों को “समांतर ब्रह्मांड” के बारे में बताता हूँ - दाजु ने कहा।
“समांतर ब्रह्मांड” , अब यह क्या है ? - मृदंग ( आभसी ) ने पूछा।

समांतर ब्रह्मांड का मतलब है की इस ब्रह्मण्ड में केवल एक ही धरती नहीं है , ऐसे हज़ारो लाखों धरती मौजूद है। और सभी धरती पर मृदंग होंगे , शर्मा जी होंगे ,मैं भी औऱ यह प्यूनी भी होगी। बस उस धरती के काल चक्र , परिस्थिति अलग होगी। और ऐसा इसलिए होता है की जो इच्छा हमारी मन मे दबी रह गयी है , वह उस धरती पर हमारा रूप के द्वारा पूरा हो रहा होगा। अब मान लो तुम्हें इस धरती पर एक डॉक्टर बनने की चाह रही होगी , जो तुम बन नहीं पाए। तो दूसरे धरती पर तुम्हारा रूप डॉक्टर बन कर मरीजों का इलाज कर रहा होगा। तो अब ऐसे समझो जिस दिन जो हमारी इच्छा मन में आती है तो हम उस दिन उसी से जुड़ा सपना देखते है। मतलब हमारा आभासी रूप उस दूसरे ब्रह्माण्ड के धरती पर मौजूद रहता है  और सब कुछ देखते है। हमारा आभासी रूप होने के कारण उस धरती के लोग हमें नही देख पाते है।  जब हम नींद से जागते है तो लगता है की सपना झूठा था , लेकिन नही ऐसा नही होता है सपनों में दिखी चीज़ किसी और धरती पर हुई घटना को दिखाती है - दाजु ने कहा।
मृदंग , शर्मा जी और प्यूनी तीनों  मूक दर्शक बने हुए थे।
हो सकता है किसी और धरती के मृदंग यह सपना देख रहा हो। और जब वह जागेगा तो उसे यह चीज़ झूठ लगेगा। पर अभी के लिए तो यह बिल्कुल सत्य है - दाजु ने कहा।
और जो मृत्य व्यक्ति हमें सपने में दिखाई देते है उनका क्या ? - मृदंग के आभासी रूप ने सवाल किया।

वह किसी और धरती पर उनका रूप जीवित होगा हमें वही दिखाई देते होंगे - शर्मा जी के आभासी रूप ने सोचते हुए जवाब दिए।
बिल्कुल सही शर्मा जी। कभी कभी तो हमारा आभासी रूप तो एक साथ दो - तीन धरती के आयाम द्वार में प्रवेश कर जाता है नींद में - दाजु ने कहा,
यह “आयाम द्वार” क्या होता है ? - मृदंग के आभासी रूप ने फिर एक सवाल किया ।
आयाम द्वार मतलब दूसरे धरती पर जाने का रास्ता। जो हर धरती पर मौजूद होता है , लेकिन सभी को नहीं दिखता है। जिनकी दिमागी क्षमता आम मनुष्य से अधिक रहती है वह इंसान आयाम द्वार को देख सकता है - दाजु ने कहा।
और दूसरे जीव जंतु देख सकते है या नहीं ? - मृदंग ( आभासी ) ने पूछा।
एकदम देख सकते है। क्योंकि उनकी दिमागी क्षमता इंसानों से अधिक होती है - दाजु ने कहा।
तो क्या आयाम द्वार से इस धरती से उस धरती जाया जा सकता है - मृदंग ( आभासी ) ने सवाल किया।

नहीं उस द्वार को केवल देखा जा सकता है , उसे पार नही किया जा सकता है। उसको पार करने के लिए दिमागी क्षमता अपने उत्कृष्ट स्थिति होना चाइए। मतलब सौ प्रतिशत तक। तब आयाम द्वार को पार किया जा सकता है - दाजु ने कहा।
अब समझ में आ गया। जिसकी दिमागी क्षमता सौ प्रतिशत पर चली जाती है वह ऐसे ही समय के कालचक्र से मुक्त हो जाता है। वह कहीं भी आ जा सकता है - मृदंग ने कहा।
हाँ , अब तुम समझ गए - दाजु ने कहा।
पर मेरे मन में एक सवाल और है - मृदंग ( आभासी )ने कहा।
पूछो - दाजु ने कहा।
इंसान जब सोता है तो उसकी दिमाग की शक्ति इतनी बढ़ कैसे जाती है जो आयाम द्वारों को आर पार चला जाता है - मृदंग के आभासी रूप ने दाजु से सवाल किया।
नींद में इंसान का कोई दूसरा रूप नहीं होता है। वह जैसा असलियत में है वैसा ही वह नींद में रहता है और उस वक़्त दिमाग पर दूसरे कामों का जोर नही रहता है। इसलिए नींद में इंसान का दिमाग पचास प्रतिशत के ऊपर तक सक्रिय हो जाता है। जब पचास प्रतिशत से अधिक होता है तो आभासी रूप बाहर निकल जाता है और दूसरी दुनिया सब से घूम आता है - दाजु ने कहा।

एक बात और रात्रि प्रहर में रात के 2 बजे से 3 बजे के बीच काल का प्रहर होता है। इसी समय इंसान का दिमाग कभी - कभी नब्बे प्रतिशत तक सक्रिय हो जाता है। इसी कारण सबसे ज्यादा मृत्य इसी समय में होता है। इस दौरान दूसरों के दिमाग के अंदर जाया जा सकता है - दाजु ने कहा।
अच्छा , लेकिन क्या विज्ञान की मदद से दूसरे धरती पर नहीं जाया जा सकता है ? - इस बार सवाल शर्मा जी के आभासी रूप के तरफ से था।
हाँ बिल्कुल , लेकिन विज्ञान को दूसरी धरती को खोजने में ही दो सौ से तीन सौ साल लग जाएंगे। जबकि दूसरी धरती पर जाने का रास्ता तो हर धरती पर मौजूद है। पर दूसरी धरती पर शशरीर जाना सृष्टि के नियम को चुनौती देने जैसा हो जाएगा - दाजु ने कहा।
।।

इतनी बातें आपको कैसे पता है - मृदंग ( आभासी )ने सवाल किया।
मुझे इतनी बाते इसलिए पता है की मेरी उम्र चार सौ पचपन साल है तो इतने सालों में काफी कुछ सीखने को मिला ,और मेरा दिमाग की क्षमता अस्सी प्रतिशत तक सक्रिय है। साथ में मेरे जो गुरु है उनसे मैंने जो शिक्षा पाई है यह उसी का असर है , जो मुझे इतनी ज्ञान की प्राप्ति हुई - दाजु ने मुस्कुराते हुए कहा।
आपके गुरु कौन है - शर्मा जी ने पूछा ,
मेरे गुरु का नाम सभी जानते है। वह अमर है - दाजु ने कहा।
मतलब यह जो कोई भी है उनका दिमाग सौ प्रतिशत पर जा चुकी है वह भी शरीर के साथ - शर्मा जी के आभासी रूप ने कहा।
हाँ , बिल्कुल - दाजु ने कहा।
तो यह कौन है। मतलब इंसान या और कोई जीव ? - मृदंग के आभासी रूप कहा।
वह इंसान है - दाजु ने कहा।
क्या इंसान ? मतलब कोई इंसान अपने शरीर के साथ अमर हो सकता है। अगर हो सकता है तो कौन है वह इंसान ? - मृदंग के आभासी रूप ने सवाल किया।
हाँ इंसानों को ईश्वर की बनाई सबसे उत्कृष्ट रचना मानी गयी है। क्योंकि इंसान अपनी क्षमता से अपने आप को अमर कर सकता है - दाजु ने कहा।
तो कौन है वह इंसान ?  - शर्मा जी ( आभासी )ने पूछा।
इस धरती पर सात ऐसे इंसान है जो अमर है। जरूरी नही की वह उन “चार रास्तों” पर चल कर अमर हुए हो। उन सभी का कारण अलग - अलग है। “चार रास्तों” वाला तरीका आम इंसानों के लिए होता है , जो वह करते नहीं है। अब मैं उन सात इंसानों का नाम बताता हूँ जो अपने शरीर के साथ होते हुए अमर हो गए और इस कालचक्र से परे हो गए और इंसान की योनि से निकल कर ईश्वर के दूत बन गए। उनके दर्शन मात्र से मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। लेकिन वह सभी को अपना दर्शन नहीं देते है , क्योंकि वह जानते है इस युग का मनुष्य इन बातों पर कभी विश्वास नही करेगा।।
उनका सात “महामानवों” का नाम है :-
1. हनुमान
2. कृपाचार्य
3. महाबली
4. अस्वाथमा
5. परशुराम
6. विभीषण
7. व्यास
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अब आप मजाक कर रहे है। यह सभी पात्र तो काल्पनिक है - मृदंग के आभासी रूप ने कहा।

इस धरती पर कुछ भी काल्पनिक नहीं है। जिस समय जो दिख जाए वही असलियत है। और मेरे जो गुरु उनका नाम है “हनुमान” - दाजु ने कहा।
हनुमान , रामायण वाले। क्या वह अभी तक जीवित है ? - मृदंग के आभासी रूप ने पूछा।

हाँ केवल हनुमान ही नहीं , बाकी के वह छः इंसान भी जीवित है। वह सभी अपने शरीर के साथ अपनी दिमाग को सौ प्रतिशत पर ला चुके है। वह सातों मानव से महामानव की श्रेणी में आ चुके है। यानी वह सातों इंसान अमरत्व पा चुके है - दाजु ने कहा।
सन 1930 ईस्वी में प्रभु हनुमान वाराणसी की पावन धरती पर आए थे। और एक रात उन्होंने मेरे नीचे विश्राम किया था। और उसी रात उन्होंने मुझे यह ज्ञान दिया था - दाजु ने कहा।
और जानते हो , मृदंग तुम्हारा यहाँ आना , मतलब इस तरह आभासी रूप में यह कोई संयोगवश नहीं है। इसकी भविष्यवाणी 1930 में प्रभु हनुमान ने ही कर दी थी - दाजु ने कहा।
मतलब - मृदंग के आभासी रूप ने आश्चर्यचकित होते हुए कहा।

हाँ , जब उन्होंने मुझे ज्ञान दिया तो उसके बाद मैंने उनसे अपने भविष्य के बारे में पूछा। तो उन्होंने कहा था की मैं बीस साल की तपस्या करूँगा और ईश्वर के नजदीक जाऊँगा पर उस तपस्या से पहले मुझे इंसान योनि जन्मे किसी को दीक्षा देनी होगी - दाजु ने कहा।
मतलब जिस किसी का दिमाग सौ प्रतिशत सक्रिय हो जाये , तो वह भविष्य देख सकता है ? - मृदंग ( आभासी ) ने सवाल किया।
नहीं भविष्य तो कोई नहीं देख सकता। भविष्य तो हमारे कर्मों से आधारित होती है। परंतु जो महामानवों की श्रेणी में चला जाता है वह भविष्य में होने वाली घटनाओं का अनुमान लगा सकता है। और यह तो सभी जानते है अनुमान या तो सत्य होते है या फिर झूठ। लेकिन महामानवों सब के द्वारा की गयी अभी तक की भविष्यवाणी लगभग सत्य साबित हुई है - दाजु ने कहा।
तो आपको क्या लगा था , की उनकी की गई भविष्यवाणी सही साबित होगी - मृदंग ने पूछा।

शुरू में लगा था , लेकिन सन 90 के बाद मैं इस भविष्यवाणी को भूलने लगा था। लेकिन तुमको याद होगा तुम्हारा जन्म यहीं वाराणसी में हुआ था। वह साल था 1997 , तुम्हारे जन्म के बाद तुम्हारी माँ दो दिन तक बेहोश थी। तब इसी पेड़ पर रहने वाली एक चिड़िया “रूनी” , दो दिन तक तुम्हें लोरी सुनाती रही थी। और तुम्हें जो ज्ञान आज मिला था , वह सारा ज्ञान तुम्हें तुम्हारे जन्म के समय ही तुमको रूनी से मिल चुका था। रूनी के लोरी के कारण ही तुम्हारी  माँ को दो दिन बाद होश आ चुका था। तब उस दिन रूनी ने तुमसे वादा लिया था की भविष्य में तुम उस पेड़ के पास आओगे जिस पेड़ पर वह रहती थी। और तुमको पता है जिस पेड़ की बात रूनी ने की थी यह वही पेड़ है , यानी की मैं - दाजु ने कहा।
पर मुझे कुछ याद नहीं है - मृदंग ( आभासी )ने कहा ।

कैसे याद होगा , उस समय तुम सिर्फ दो दिन के थे। पर तुम्हारा दिमाग पचास प्रतिशत से अधिक सक्रिय था। तुम जानवरों और पक्षियों की भाषा उस समय जानते थे। पर धीरे - धीरे तुम बड़े होते गए और बाकी इंसानो की तरह दिमागी क्षमता कम होते गयी। अब तुम आँखे बंद करो तुम्हें सब याद आ जायेगा - दाजु ने कहा।
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मृदंग के आभासी रूप ने , दाजु के कहे अनुसार अपनी आँखें बंद की। कुछ देर बाद उसने अपनी आँखें खोली।
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मुझे सब याद आ गया। पर मुझे रूनी से मिलना है - मृदंग ने कहा ।
रूनी तो सन 2000 में ही इस दुनिया से जा चुकी है। और यह प्यूनी उसी के वंश की है - दाजु ने प्यूनी के तरफ इशारा करते हुए कहा।
ओह नहीं , मैं रोना चाहता हूँ। लेकिन मैं रो क्यों नही पा रहा हूँ ? - मृदंग के आभासी रूप ने पूछा।

तुम हर बार यह क्यों भूल जाते हो यह तुम्हारा आभासी रूप है। आँख में आँसू बनने की सभी जरूरी तत्व तुम्हारे शरीर में है। और तुम्हारा शरीर हॉस्पिटल के बेड पर है - दाजु ने कहा।
अच्छा , दाजु मेरा एक सवाल है - मृदंग ( आभासी ) ने कहा।
तुम्हारे पास सवाल खत्म नहीं होते। पूछो क्या पूछना है - दाजु ने कहा।
जब मैं सिर्फ दो दिन का था तो उस समय की सारी बातें मुझे याद आ गयी। लेकिन मेरे साथ क्या हुआ जिस कारण से मैं हॉस्पिटल में हूँ , यह क्यों नहीं याद आ रहा है - मृदंग ने कहा।
अच्छा सवाल किया तुमने। इसका जवाब है “नींद” , तुम्हें केवल वही बातें याद होंगी जिस वक्त तुम्हारा आँख खुला था। और जब तुम सो रहे होंगे उस वक़्त की बातें तुम्हे याद नहीं होगी। लेकिन तुम चिंता मत करो , इंसान का दिमाग उसके पूरे जीवनचक्र के एक - एक पल को अपने अंदर सुरक्षित रखता है। उसको कोई मायने नही रखता है की इंसान सो रहा है या नहीं - दाजु ने कहा।

इंसान के दिमाग के अंदर दो रोशनी होती है “उजली रोशनी” और “काली रोशनी”। तुमको अपने दिमाग के अंदर की उजली रोशनी को बाहर निकालना होगा। वह तुम्हें उस दिन की जानकारी दे सकता है की क्या हुआ था तुम्हारे साथ। उजली रोशनी को रात के 2 से 3 बजे के बीच में बात करने की कोशिश करना , उस वक़्त वह जल्दी तुम्हारी बात सुनेगा - दाजु ने कहा ।
और दूसरी रोशनी जो है काली रोशनी उसका क्या - मृदंग के आभासी रूप ने कहा।
वह जीवन के बाद के दूसरे चरण में जागृत होती है - दाजु ने कहा।
दूसरा चरण ? यह क्या है ? - शर्मा जी के आभासी रूप ने पूछा।
जीवन के बाद इंसानो के दो चरण होते है। सामान्यतः इंसान मरने के बाद सीधे दूसरे चरण में चला जाता है। कुछ ही लोग प्रथम चरण में जाते है। जैसे की तुम और शर्मा जी अभी प्रथम चरण में हो। और दूसरा चरण का मतलब होता है “मौत और पुनर्जन्म के बीच का समय” - दाजु ने कहा।

इन दोनों चरणों मे अंतर क्या होता है ? - मृदंग ( आभासी )ने सवाल किया ।
पहले चरण में जो मनुष्य होता है वह अपनी इच्छाशक्ति से अपने पुराने जीवन में लौट सकता है। लेकिन दूसरे चरण में इंसान मर जाता है , उसके बाद वह या तो ईश्वरीय कण में जा कर मिल जाएगा नहीं तो पुनर्जन्म लेकर दूसरा शरीर धारण करेगा - दाजु ने कहा।।
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अब आप दोनों जाइये। अपने - अपने शरीर के पास और फैसला कीजिये की अपने इस जीवन मे वापस जाना है या दूसरे चरण में आगे जाना है। और मृदंग तुम अपनी उजली रोशनी से बात जरूर करना। तुम्हारे बाकी सवालों के जवाब वहीं से मिलेंगे - दाजु ने कहा।
अब मैं आप दोनों से विदा लेता हूँ। जीवन रहा तो फिर कभी मुलाकात होगी - दाजु ने कहा।
अब आप क्या करेंगे ? - मृदंग के आभासी रूप ने सवाल किया।
बीस साल की तपस्या - दाजु ने कहा,
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उसके बाद मृदंग और शर्मा जी के आभासी रूप ने दाजु से विदा लिया। और प्यूनी क साथ हॉस्पिटल को लौट आये।।
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रात का समय हो रहा है। दो बजने में सिर्फ कुछ मिनट बचे है। मृदंग का आभासी रूप अपने शरीर के पास बैठा हुआ है। अब वह अपने दिमाग के अंदर “उजली रोशनी” से संपर्क साधने जा ही रहा था , की तभी अचानक उसकी नज़र शर्मा जी के आभासी रूप पर पड़ी। शर्मा जी का आभासी रूप किसी काले साये के साथ कहीं जा रहा थे।।
अरे शर्मा जी आप कहाँ जा रहे है , और यह काला साया आपके साथ कौन है - मृदंग के आभासी रूप ने पूछा।
शर्मा जी ने कोई जवाब नहीं दिया और उस काले साये के साथ चले गए।
सुबह हो चुकी थी। मृदंग के आभासी रूप ने हॉस्पिटल के डॉक्टर और हॉस्पिटल के स्टाफों के मुँह से यह सुन लिया था की शर्मा जी रात में करीब दो से तीन बजे के आसपास अपनी अंतिम सांस ली , और वह स्वर्गवास हो गए।
तभी हॉस्पिटल के खिड़की पर प्यूनी आयी। उसने मृदंग से पूछा - क्या हुआ मृदंग , इतने परेशान क्यों हो ?
अरे कल रात जब मैं अपनी उजली रोशनी को जगाने जा रहा था , तभी मैंने देखा की शर्मा जी के आभासी रूप को एक काले साये के साथ जाते देखा। मैंने उनको टोका भी पर उन्होंने मेरे बात को अनसुना कर के उस काल साये के साथ चले गए। अभी सुबह - सुबह पता चला की शर्मा जी अब इस दुनिया में नहीं रहे। कुछ समझ नहीं आ रहा है - मृदंग ( आभासी) ने प्यूनी से कहा।
तुमने उनको काले साये के साथ देखा था ? - प्यूनी ने पूछा।
हाँ - मृदंग (आभासी) ने जवाब दिया।
ओह , वह काला साया और कुछ नहीं उनकी खुद की “काली रोशनी” थी। जब इंसान मर जाता है तब वह काली रोशनी शरीर से आजाद हो जाती है और आत्मा को अपने साथ ले जाती है। दिमाग के अंदर दो रोशनी होती है एक उजली और एक काली। उजली रोशनी हमेशा शरीर से आज़ाद होना चाहती रहती है लेकिन काली रोशनी उसको रोके रहती है। लेकिन जब इंसान की मौत आती है तो आत्मा के साथ यह दोनों रोशनी भी निकल जाती है। ऐसे कितने काले साये को मैंने अपने जीवन में देखा है। और जब इंसान मर जाता है तो उसका आत्मा किसी से बात नहीं करता है। इसलिए शर्मा जी ने तुम्हें जवाब नहीं दिया - प्यूनी ने कहा।

देखो तुमने कल अंतर पूछा था ना , की जीवन के बाद के दो चरण में क्या अंतर होता है। यही अंतर होता है प्रथम चरण में केवल आभासी रूप बाहर निकल पाता है औऱ इंसान जिंदा रहता है। लेकिन दूसरे चरण में इंसान का आभासी रूप आत्मा बन जाती है और उसके दिमाग के अंदर रहने वाली दोनों रोशनी भी निकल जाती है। उसी दोनों रोशनी से जीवन का आधार है - प्यूनी ने कहा।
और जानते हो दाजु ने तो इतना भी कहा है यह दोनों रोशनी असल में इस ब्रह्मांड के दोनों सूरज के प्रतिनिधित्व करती है। जैसे वह दोनों सूरज की रोशनी इस धरती पर जीवन प्रदान करती है , ठीक उसी प्रकार सभी जीवों के अंदर यह दोनों रोशनी जीवन और मृत्य का संचालन करती है - प्यूनी ने कहा।
ओह , लेकिन शर्मा जी के पास इतनी तो शक्ति थी ना की वह दुबारा जीवनचक्र में वापस आ सकते थे। फिर उन्होंने अपनी काली रोशनी को क्यों जाग्रत किया - मृदंग ( आभासी ) ने पूछा।

शायद शर्मा जी को इस दुनिया से मोह माया खत्म हो गया हो। और उन्होंने दूसरे चरण में जाने का फैसला किया हो। और तुमको भी फैसला करना होगा की तुम्हें जीवनचक्र में वापस आना है या दूसरे चरण में जाना है। क्योंकि तुम यह मत भूलो तुम्हारा शरीर अभी भी हॉस्पिटल में है , जिसपर इलाज चल रहा है। जिसका खर्चा तुम्हारे माँ - बाप उठा रहे है - प्यूनी ने कहा।

हाँ मुझे जल्द से जल्द फैसला लेना है। आज जब डॉक्टर की टीम मेरे शरीर के पास राउंड पर आई थी तो उन्होंने कहा था की अगर मुझे होश आ गया तो तब मेरे दाएं पैर का ऑपरेशन होगा। फिलहाल मेरा शरीर अभी स्थिर है - मृदंग ( आभासी) रूप ने कहा।
तो आगे क्या करोगे - प्यूनी ने पूछा।

आज मैं अपनी उजली रोशनी से बात करूँगा। मुझे पता करना है मेरे साथ क्या हुआ था और मेरा दोस्त राघव कहाँ है - मृदंग ( आभासी) ने कहा।

ठीक है तो तुम्हें आज रात दो से तीन बजे के बीच में अपने अंदर की उजली रोशनी को बाहर निकालना है। उससे सवाल करना है। लेकिन ध्यान रहे , अगर वह एक बार बाहर आया तो वह अपने आप को और काली रोशनी को आज़ाद करवाने की जरूर सोचेगा। और दोनों का आज़ाद होना , तो तुम जानते ही हो की क्या होता है - प्यूनी ने कहा।
हाँ दोनों रोशनी अगर आज़ाद हो जाती है तो वह इंसान मर जाता है। पर मैं नहीं मरूँगा , मुझे ज़िंदा होना है - मृदंग ( आभासी ) ने कहा।
ठीक है , मैं कल सुबह आती हूँ। लेकिन ध्यान रहे उजली रोशनी से जितना कम हो सके उतना बात करना है - प्यूनी ने कहा।
इतना कहने के बाद वह उस हरे आसमान में उड़ गई।।
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रात के तकरीबन दो - तीन बजे के आसपास ,,
मृदंग का आभासी रूप अपने शरीर के पास बैठा हुआ था। आई.सी.यू होने की वजह से उस रूम में केवल पेशेंट ही थे , और कुछ एकाध नर्स थी।
मृदंग के आभासी रूप ने अपना दाहिने हाथ अपने मिट्टी के स्वरूप ( अपने शरीर ) के कपाल पर हाथ लगाया। उसके बाद उसके आभासी रूप ने आँख बंद किया। आँख बंद करने के बाद उसने धीमे शब्दों में कहा “मुझे अपनी उजली रोशनी से बात करनी है”।।
कुछ ही देरी में मृदंग के शरीर ( जो बेड पर बेहोश है ) के कपाल के पास से एक छोटी सी रोशनी निकली। उस रोशनी में एक अजब सी चमक थी। अगर कोई इंसान अपने वास्तविक रूप में उस रोशनी को देख ले तो शायद अंधा भी हो सकता है। पर उस रोशनी के बाहर निकलते ही चारों तरफ समय रुक गया। जो जहाँ पर था वह वहीं जड़ हो गया। मानो ऐसा लग रहा था किसी ने कालचक्र के रथ को रोक लिया हो।
यह सब देख कर मृदंग का आभासी रूप एकदम आश्चर्यचकित एवं परेशान था। उसके मुँह से कोई शब्द नहीं निकल रहा था।
मुझे अपने शरीर से क्यों बाहर निकाला है ? - उजली रोशनी ने पूछा।
मुझे तुमसे कुछ सवाल के जवाब चाइए - मृदंग ( आभासी ) ने कहा।
तुमको जो पूछना है , जल्दी पूछो। क्योंकि मेरे बाहर आने से समय रुक गया है। और समय का रुकना सही बात नही है - उजली रोशनी ने कहा।
हाँ वह तो मुझे भी दिख रहा है की समय रुक गया है। सभी जीव जन्तु पत्थर की मूर्ति बन चुके है। पर मैं क्यों नही मूर्ति बना ? - मृदंग ( आभासी) ने पूछा।
दाजु ने तुम्हे क्या बताया था , की तुम अभी जीवन के बाद के प्रथम चरण में हो। और जो कोई भी प्रथम चरण में होता है , उसपर समय के कालचक्र का कोई प्रभाव नहीं होता है - उजली रोशनी ने कहा।

ठीक मैं समझ गया। पर तुम कैसे जानते हो दाजु को ?और मेरा पहला सवाल है की मेरे दिमाग की क्षमता कितनी प्रतिशत बढ़ी है ? - मृदंग (आभासी ) ने पूछा।
मैं तुम्हारे दिमाग के अंदर हूँ लेकिन मैं जुड़ा हूँ तुम्हारे आभासी रूप से  , इसलिए मुझे दाजु के बारे में पता है। तुम्हारे दिमाग की क्षमता सत्तर प्रतिशत ( 70% ) पर आ चुकी है। और इंसानो में केवल पचहत्तर प्रतिशत ( 75% ) तक की क्षमता को उसका शरीर संभाल सकता है। अगर उसके बाद दिमाग की क्षमता बढ़ी तो काली रोशनी जागृत हो जाएगी और इंसान का शरीर मर जाता है - उजली रोशनी ने कहा।
मैं कुछ समझ नहीं सका - मृदंग ( आभासी ) ने कहा।
मैं , तुम्हारे और दाजु के बीच हुए बातचीत का सार समझाता हूँ - उजली रोशनी ने कहा।
इस दुनिया में जितने भी जीव जन्तु है सभी के पास दिमाग होता है। अब मायने यह रखता है वह सभी अपने दिमाग का इस्तेमाल किस तरह से करते है।
इस धरती पर सात इंसान ऐसे है जिन्होंने अपने दिमाग को सौ प्रतिशत तक सक्रिय किया

अपने शरीर सहित। वह सभी महामानवों की श्रेणी में आते है। असल में वह सभी अपने दिमाग के अंदर दबी काली रोशनी पर विजय हासिल कर ली। काली रोशनी पर विजय हासिल करने का मतलब अमरत्व प्राप्त कर लेना। इन्ही सात इंसानो की वजह से मनुष्य सबसे उच्चतम स्तर का जीव माना गया है। क्योंकि आज तक किसी दूसरे जीव जंतु में कोई भी ऐसा नहीं हुआ जो अपने शरीर के सहित अपने दिमाग को सौ प्रतिशत पर ले जा सके। यह अमर होते हुए कालचक्र से परे हो जाते है। इनमें एक हनुमान अपवाद है क्योंकि वह इंसान भी है और बंदर भी।

दूसरे होते है आम इंसान , जो जैसे - जैसे बढ़ता है अपने जीवन में , अपनी दिमागी क्षमता कम करते जाता है। और जिस दिन उसकी मौत निश्चित होती है। उसका दिमाग एक झटके में सौ प्रतिशत पर चला जाता है , और इतनी शक्ति उसका शरीर संभाल नहीं पाता है। और उसका शरीर मर जाता है। मतलब उसकी आत्मा बाहर निकल जाती है।
तीसरे होते है तुम्हारे और शर्मा जी जैसे , जो किसी कारणवश जीवन के बाद के प्रथम चरण में चले जाते है। इस स्थिति में इंसान का शरीर तो बेहोश रहता है लेकिन उसकी आभासी रूप को उसके शरीर से बाहर निकलने की क्षमता आ जाती है। इंसान तो जीवित रहता है लेकिन उसका शरीर कोमा में रहता है। उसका आभसी रूप सब देख सुन सकता है लेकिन उसका शरीर नहीं। जानते हो यही अंतर होता है आत्मा और आभसी रूप में।
आत्मा जब निकलती है तो दिमाग के अंदर रहने वाली दोनों रोशनियाँ भी उसके साथ निकल जाती है। लेकिन आभासी रूप जो बाहर निकलती है उसमें दिमाग के अंदर की रोशनियाँ बाहर नही निकलती है। दोनों रोशनी साथ मे निकले तो उस इंसान की मौत।
इतना बोलने के बाद उजली रोशनी शांत हो गयी।
पर दाजु ने मुझे “चार रास्तों” के बारे में भी बताया था। जिसपर चल के इंसान अपने दिमाग को सौ प्रतिशत पर ले जा सकता है वह भी अपने शरीर के साथ रहते हुए। यह चीज़ मुझे समझ नहीं आयी थी - मृदंग ( आभासी ) ने कहा।

वह “चार रास्ता” असल में वैराग्य जीवन जीने वालों के लिए है ,  जैसे - “नागा साधु”। नागा साधु उन चारों रास्तो को पालन करते है ताकि वह महामानव बन सके। उन सभी में कोई भी लालच या द्वेष की भावना नहीं होती है। वह सभी नशेड़ी होते है । नशा इसलिए करते है ताकि तपस्या और योग करते समय उनका दिमाग एकाग्रचित्त रहे। उसके बाद वह सब संगीत और नृत्य का आयोजन भी करते है। दरसल यह चार रास्ता “महादेव” का बनाया हुआ है। इसपर चल कर कोई भी महामानव बन सकता है। आज तक केवल यह चीज़ महादेव ही कर सके है। आम इंसानो के वश की बात नहीं है - उजली रोशनी ने कहा।

तुम मुझसे यह सब सवाल क्यों पूछ रहे हो ? तुम जिस मकसद से मुझे बाहर निकाला है वह सवाल पूछो। तीन बजे तक मैं दुबारा तुम्हारे दिमाग के अंदर नहीं गया तो तुम्हारी काली रोशनी दिमाग से बाहर आ जाएगी। औऱ काली रोशनी बाहर आ जायेगी तो , तुम जानते ही हो की क्या होगा - उजली रोशनी ने कहा।
हाँ मैं जानता हूँ की क्या होगा , काली रोशनी के बाहर आने पर मैं आभासी रूप से आत्मा बन जाऊँगा औऱ जीवन के दूसरे चरण में चला जाऊँगा। और यहाँ इन्सानों की दुनिया में मेरा यह शरीर मर जायेगा - मृदंग (आभासी ) ने कहा।
जब इतना सब जानते हो तो फिर देर क्यों कर रहे हो। अपने मुद्दे पर आओ - उजली रोशनी ने कहा।

मेरे दिमाग की क्षमता के अभी सत्तर प्रतिशत पर है। मैं अपने जन्म से लेकर अभी तक की सभी चीज़ों को देख सकता हूँ। लेकिन मुझे यह क्यों नहीं पता चल पा रहा है की मेरे साथ ऐसा क्या हुआ की मेरा शरीर हॉस्पिटल में है ? और मेरे दोस्त राघव के साथ क्या हुआ ? और किस कारण मेरा दिमाग की क्षमता एकाएक इतनी बढ़ गयी - मृदंग ( आभासी ) ने सवाल किया।

तुम्हें अपने जन्म से लेकर अभी तक का केवल वही सब चीज़ देख पा रहे हो जिस समय तुम्हारी शरीर की आँखे खुली हुई थी। लेकिन जिस समय तुम्हारे शरीर का यह आँख बंद हुआ होगा , यानी जब तुम नींद में गए होंगे तो उस समय क्या - क्या हुआ होगा यह तुम्हें नहीं याद होगा। लेकिन तुम यह बात जानते हो हर इंसान में तीसरे नेत्र की शक्ति भी होती है। इंसान जब नींद में जाता है तो उस समय के सभी घटनाक्रम को तीसरे नेत्र की शक्ति से दिमाग में सुरक्षित ( सेव ) हो जाती है । वह सुरक्षित हो कर आती है मेरे पास यानी इंसानो के उजली रोशनी के पास। इंसान तो उसे कभी अपने जीवनकाल में नही देख पाता है  , लेकिन वह सभी घटना मेरे पास मौजूद रहती है। जानते हो इंसान का आभासी रूप और उजली रोशनी मिल कर की मनुष्य में त्रिनेत्र शक्ति उत्पन्न करती है। मेरे ही अंदर सारी भावना , अतीत की अच्छी - बुरी यादें दबी रहती है - उजली रोशनी ने कहा।
अच्छी बात बताई तुमने। अब मेरे सवाल का जवाब दे दो की मेरे साथ क्या हुआ था , और इतनी अधिक क्षमता होते हुए भी मुझे क्यों नहीं दिखाई दिया ? - मृदंग ( आभासी ) ने कहा।

मैं तुम्हें जरूर दिखाऊंगा। लेकिन उससे पहले यह बता दूँ इस चीज़ को देखने के बाद तुम्हारी दिमागी क्षमता बढ़ जाएगी। यानी सत्तर प्रतिशत से बहत्तर प्रतिशत पर चली जायेगी। क्योंकि दिमाग की शक्ति बढ़े बिना इस चीज़ को नहीं देख सकते। तो तुम सोच लो - उजली रोशनी ने कहा।
मतलब इसलिए मैं वह घटना नहीं देख पा रहा था की उस समय मैं नींद में था। और उस चीज़ को देखने से मेरी दिमागी क्षमता बढ़ जाएगी। और तुमने शुरू में ही कह दिया था की पचहत्तर प्रतिशत के बाद काली रोशनी जागृत हो जाएगी। और मैं मर जाऊँगा। सिर्फ दो प्रतिशत की ही वृद्धि होगी न , मुझे मँजूर है। मैं देखना चाहता हूँ - मृदंग ( आभासी ) ने कहा।

ठीक है मैं दिखा देता हूँ , पर दिमागी क्षमता बढ़ने से तुम्हारे इस मिट्टी के शरीर पर क्या दुष्परिणाम होंगे यह मुझे नहीं पता । क्योंकि जैसे ही तुम्हारी दिमागी क्षमता बढ़ेगी तुम्हारा शरीर इस भार को नहीं संभाल सकेगा। तुम्हारे शरीर को तकलीफ़ ज्यादा होगी - उजली रोशनी ने कहा।
मुझे मँजूर है - मृदंग ( आभासी ) ने कहा।

तो ठीक है। लेकिन एक बात याद रखो इस धरती पर मनुष्य की प्रजाति सबसे बुद्धिमान होती है , वह अलग बात है इंसान अपने दिमाग का इस्तेमाल सही चीज़ों में करने की जगह गलत कामों में अधिक करता है। इसलिए जीवन को सही से जीयो। कभी - कभी जोश में लिया फैसला इंसान को जीवन और मौत के बीच में लाकर रख देती है। जैसे अभी तुम हो , क्योंकि तुमने भी एक ऐसा ही फैसला किया था आज से छः दिन पहले। अब अपनी आँखें बंद कर के , अपने मिट्टी के शरीर के कपाल को छूना। तुम्हें हल्का झटका लगेगा फिर तुम्हारे सामने सारा दृश्य आ जायेगा - उजली रोशनी ने कहा।
जैसे - जैसे उजली रोशनी ने कहा , वैसे ही मृदंग के आभासी रूप ने किया। उसने अपने मिट्टी के शरीर के ऊपरी हिस्से को यानी कपाल को छुआ। छूते वक़्त उसकी आँखें बंद थी। उसे एक हल्का सा झटका लगा। और वह फलशबैक में जा चुका था .....

मृदंग बैंगलोर के इंजिनीरिंग कॉलेज के तीसरे वर्ष का विद्यार्थी था। तीसरे वर्ष की परीक्षा समाप्त हो चुकी थी। मृदंग और उसके साथियों ने फैसला किया की इस बार छुट्टी में घर बाइक से जाएंगे , और घर वालों को सरप्राइज देंगे , यानी घरवालों को नही बताया जाएगा की हम सब इस बार बाइक से घर आ रहे है। तो दूसरे दिन में सारी तैयारी की गयी  , इस ट्रिप में कुल बारह लड़के शामिल हुए , छः बाइक का इंतज़ाम किया गया। हर बाइक पर दो लड़के , सभी ने फैसला किया की आराम से घूमते हुए इस बार अपने घर जाएंगे। अगली सुबह सभी लोग बाइक से निकल पड़े , रास्ते की जानकारी “गूगल मैप” से मिल रही थी। सभी लड़के एकदम उत्साहित थे।

पर क्या यह फैसला मृदंग के लिए सही था ? बैंगलोर से पटना बाइक से आना क्या सही फैसला था ? क्योंकि मृदंग का घर पटना में था , और बैंगलोर से पटना की दूरी 2124 कि.मी है। इतना लंबा सफर बाइक से तय करना , एक साहसी फैसला था।  युवा जोश कभी - कभी दूर का नुकसान नही सोचती है और फैसले ले लेती है।
सफर के दो दिन बीत चुके थे। अब सफर में केवल दो बाइक और चार लड़के बचे हुए थे। कानपुर बाकी दो लड़के का घर था , वहाँ पर सुबह के दस बजे पहुँचे। वहाँ पर कुछ देर रुक कर , मृदंग और उसका एक दोस्त पटना के लिए निकल पड़े। मृदंग को पटना और उसके दोस्त राघव को हाजीपुर निकलना था।

शाम के लगभग छः बजे के आसपास , उस समय बाइक राघव चला रहा था। बाइक मुग़लसराय से आगे निकल कर चंदौली के रास्ते पर थी। मृदंग बाइक के पीछे आँख बंद कर के सो गया था।

बाइक की रफ्तार 80-100 के बीच में थी। उस पाँच सेकंड के अंतराल पर ऐसा कुछ हुआ , जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी।
आगे जो बस थी उसने अपनी गति कम की , पर उसके पीछे बाइक पर राघव और मृदंग की गति कम नही हुई , पर बस के नजदीक पहुँचते राघव ने बाइक से बस को ओवरटेक किया। पर पीछे से ट्रक अपने पूरी गति से आ रही थी। उसके बाद एक जोरदार धक्का। और बचा हुआ काम “न्यूटन के गति के नियम ने कर दिया”।।
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धक्का लगने के बाद मृदंग बाइक पर से उछल कर सीधे सड़क के बीच लगे बड़े से पोल से टकरा गया। यह टक्कर सीधे उसके मस्तिष्क से हुई थी। एक्सीडेंट के समय वह नींद में था और दिमाग पर चोट लगने से बेहोश उसी वक़्त बेहोश हो गया। पर दृश्य अभी भी चल रहे थे। मानो उजली रोशनी एक बड़ा सा पर्दा है और उसपर चलचित्र चल रहे हो।
पोल से टकराने के बाद मृदंग का शरीर दुबारा सड़क पर गिरा। लेकिन तभी पीछे से तेज रफ्तार में आती स्कार्पियो गाड़ी ने मृदंग के दाएं पैर पर चलाती हुई निकल गयी। उसका पैर हिलने में असमर्थ था। आधे घण्टे में एम्बुलेंस आयी। राघव और मृदंग के शरीर को उठा कर एम्बुलेंस के अंदर डाला गया। बॉडी उठाने वक़्त ही किसी ने राघव के शरीर को देख कर बोला - अरे यह तो मर चुका है। इसका दिमाग तो चिपटा हो गया है और इसकी आँखे भी बाहर आ चुकी है।
तभी दूसरे आदमी ने कहा - अरे दूसरे लड़के ( मृदंग ) को देख उसमें जान बची है की नही।
अरे हाँ इसके में जान बची है। इसको जल्दी से हॉस्पिटल ले चलो ,क्योंकि इसकी भी स्थिति ज्यादा सही नही है।
उसका बाद एम्बुलेंस हॉस्पिटल की ओर चल पड़ी .......
..........
तो देखा तुमने। तुम्हारे और राघव के साथ क्या हुआ था। तुम जब पोल पर टकराये थे , तभी से तुम बेहोश हो , और उसके बाद से ही यह सब तुम्हारे साथ हो रहा है - उजली रोशनी ने कहा।
हाँ , मतलब राघव अब इस दुनिया में नहीं रहा - मृदंग ( आभासी ) ने कहा।
हाँ वह मर चुका है। उस दिन उसकी मौत आयी थी। और तुम अभी चाह कर के भी रो नही सकते हो - उजली रोशनी ने कहा।
हाँ रोने वाली सारी तत्व मेरे इस मिट्टी के शरीर में है। अब तुम जाओ वापस मेरे दिमाग के अंदर -मृदंग ( आभासी ) ने उजली रोशनी को अपने शरीर के तरफ इशारा करते हुए कहा।
ठीक है अब मैं जाती हूँ तुम्हारे शरीर में वापस। लेकिन यह याद रखना मेरे वापस जाते ही समय का चक्र दुबारा शुरू हो जाएगा। उसके बाद तुम्हारे मिट्टी के शरीर पर क्या असर हुआ होगा यह मुझे नहीं पता - उजली रोशनी जाते - जाते यह बात बोल के गयी।
।।।।।
सुबह के चार बजते ही प्यूनी , मृदंग के आभासी रूप से मिलने पहुँची।
मृदंग तुम्हारे शरीर के पास इतनी भीड़ कैसी ? - प्यूनी ने पूछा।
आज रात मैंने अपनी उजली रोशनी से बात किया था। यह उसी का नतीजा है - मृदंग ( आभासी ) ने कहा।
मतलब ? मुझे सही से समझाओ - प्यूनी ने कहा।
उसके बाद मृदंग के आभासी रूप ने प्यूनी को वह सभी बात बता दिया जो उसने उजली रोशनी से बात की थी।।
अच्छा तो तुम्हारा एक्सीडेंट हुआ था।  उस समय तुम नींद में थे। इस चीज़ को देखने के बाद तुम्हारी दिमागी क्षमता दो प्रतिशत बढ़ गयी। और क्षमता बढ़ने के कारण तुम्हारे शरीर पर दवाब बढ़ गया - प्यूनी ने कहा।
वैसे डॉक्टरों ने क्या कहा है ? तुम्हारे शरीर के बारे में - प्यूनी ने मृदंग ( आभासी ) से पूछा।
उजली रोशनी के वापस अंदर जाते ही  , मेरे शरीर में अंदर से छटपटाहट बढ़ी। नर्स ने चेक किया तो मेरा ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ था। उसके बाद डॉक्टरों ने मेरा चेकअप किया। फिर उन्होंने कुछ जाँच लिखा। जाँच की रिपोर्ट के अनुसार मेरे सभी अंग धीरे - धीरे बेकार हो रहे है - मृदंग ( आभासी ) ने कहा।
फिर आगे क्या हुआ ? - प्यूनी ने पूछा।
आगे डॉक्टर ने कहा की मुझे “वेंटिलेटर” पर डालना होगा। वह मेरे शरीर को अभी ही वेंटिलेटर पर डालने वाले थे - मृदंग ( आभासी ) ने कहा।
नहीं नहीं वेंटिलेटर पर नहीं - प्यूनी ने कहा।
क्यों , क्या हुआ ? मेरे शरीर को सुबह की शिफ्ट में वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया जाएगा , यानी आठ बजे के बाद - मृदंग ( आभासी ) ने कहा।
तुमको अपने शरीर को वेंटिलेटर पर जाने से रोकना होगा - प्यूनी ने कहा।
पर हुआ क्या है ? तुम वेंटिलेटर का नाम सुन कर इतनी परेशान क्यों हो गयी हो ? - मृदंग ( आभासी ) ने पूछा।
तुम मेरे जीवन में पहले इंसान नहीं हो जिसका आभासी रूप से मेरी दोस्ती हुई। वह सभी बच सकते थे , पर जैसे उन सब का शरीर वेंटिलेटर पर गया। उन सभी की मौत हो गयी। मैंने उन सभी को उनके काले रोशनी या काला साया के साथ जाते देखा है। इसलिए मैं नहीं चाहती की तुम्हारा शरीर भी वेंटिलेटर पर जाए। मैं तुम्हें इंसानो की दुनिया में वापस जाने का रास्ता बता सकती हूँ , पर उसके लिए तुमको अपने शरीर को वेंटिलेटर पर जाने से रोकना होगा - प्यूनी ने कहा।
पर मैं कैसे रोकूँ। इंसानो में तो कोई भी मुझे देख भी नहीं सकता है - मृदंग ( आभासी ) ने कहा।
एक रास्ता है - प्यूनी ने कहा।
कौन सा रास्ता ? - मृदंग ( आभासी ) ने पूछा।
“सपनों का रास्ता” - प्यूनी ने कहा।
सपनों का रास्ता यह क्या है ? - मृदंग ( आभासी ) ने पूछा।
देखो तुम्हारे शरीर को वेंटिलेटर पर डालना है या नहीं इसका फैसला तुम्हारे पिताजी करेंगे। और अभी 8 बजने में चार घंटे बचे हुए है। तो तुम अपने पिताजी के दिमाग के अंदर जाओगे और उन्हें समझोगे की वह तुम्हें वेंटिलेटर पर ना डाले। डॉक्टर कितना भी बोले फिर भी नहीं - प्यूनी ने कहा।
पर मैं उनके दिमाग में कैसे जाऊँगा - मृदंग ( आभासी ) ने पूछा।
सपनो के जरिये। देखो तुम्हारे पिताजी तुम्हारे शरीर के पास कुर्सी पर बैठ कर सोये हुए है। और उनका हाथ तुम्हारे शरीर पर है। तुमको अपने शरीर से होते हुए उनके शरीर में जाना है , फिर उनके दिमाग में जाना है। उसके बाद उनके सपने में जाना है और उन्हें बताना है की तुम्हें वेंटिलेटर पर ना डाले - प्यूनी ने कहा।
क्या मैं यह कर सकता हूँ ? - मृदंग ( आभासी ) ने पूछा।
हाँ बिल्कुल कर सकते हो। लेकिन एक बात याद रखना तुम उनके दिमाग में ज्यादा देर नही रह सकते हो। क्योंकि सपना दिखाने का काम उजली रोशनी करती है। तो तुम्हारे पिताजी के दिमाग में जो उजली रोशनी तुम्हें उनके सपने में जाने देगी। पर इंसानो के दिमाग के अंदर एक द्रव्य पाया जाता है जिसका नाम होता है “अम्यग्दल  amygdala” इसी द्रव्य के कारण इंसान को डर महसूस होता है। उसे कुछ ही समय में पता चल जाएगा की इसी धरती का कोई इंसान तुम्हारे पिताजी के दिमाग में आया है। वह द्रव्य तुरंत उजली रोशनी को सपनों का शटर गिराने का आदेश देगी। और उसके बाद सपनो का शटर बन्द हो जाएगा और तुम वापस यहाँ पहुँच जाओगे। और यह पूरा घटनाक्रम पलक झपकने से भी कम समय में हो जाएगा। याद रहे मनुष्य को पूरा सपना कभी याद नहीं रहता है , केवल अंत के कुछ दृश्य ही याद रह पाते है तो तुम फालतू की बात नही करोगे सपने में केवल काम की बातें , और यह सपना तुम्हारे पिताजी को एकदम सच जैसा लगना चाइए  - प्यूनी ने कहा।
पर वह द्रव्य ऐसा क्यों करेगा ? मेरा मतलब मैं तो अपने पिताजी के दिमाग में जाऊँगा। तो उनका दिमाग मुझे जानता होगा न - मृदंग ( आभासी ) ने कहा।
इंसान का दिमाग रिश्तों सोते वक्त रिश्तों का ख्याल नहीं रखता है। वह सोते वक्त केवल सपने दिखाता है जो उसके मन में दबी इच्छा का ही प्रतिबिंब तैयार करता है। जब तुम अपने पिताजी के सपने में जाओगे तो वह द्रव्य डर जाएगा और उसे लगेगा कोई और तुम्हारे पिताजी के दिमाग को काबू करने आया है। जैसे ही उसको पता चलेगा की वह भी इस धरती का वह तुरंत सपना बन्द कर देगा। अब जाओ बिना सवाल किये - प्यूनी ने कहा।
ठीक है मैं समझ गया - मृदंग ( आभासी ) ने कहा।
मृदंग का आभासी रूप , प्यूनी के बताए तरीके से अपने पिताजी के दिमाग में गया। और पंद्रह मिनट के बाद उसका आभासी रूप वापस प्यूनी के पास हवा में उड़ रहा था।
क्या हुआ ? काम हुआ - प्यूनी ने पूछा।
हाँ हुआ। उससे पहले पिताजी की प्रतिक्रिया देखने दो। वह नींद से जाग चुके है - मृदंग ( आभासी ) ने कहा।
सामने मृदंग के पिताजी , मृदंग के शरीर पर हाथ रख कर रो रहे थे। शायद आज से पहले उन्होंने ऐसा सपना नहीं देखा था।
क्या हुआ उनके साथ ? - प्यूनी ने पूछा।

जब मैं उनके दिमाग में गया तो वह कोई सपना देख रहे थे। किसी तालाब के सामने वह बैठे हुए थे। फिर मैं वहाँ पहुँच जाता हूँ उसी समय। उसके बाद वहाँ का दृश्य बदल जाता है और हम दोनों एक अनंत शून्य में पहुँच जाते है। जहाँ कुछ था ही नहीं केवल दूर - दूर तक कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। तो मैंने उनको कहा की मुझे वेंटिलेटर पर न डाले। उसके बाद तो तुम देख ही रही हो - मृदंग ( आभासी ) ने प्यूनी को अपने पिताजी के तरफ इशारा करते हुए कहा।
ठीक है आठ बजे तक का इंतजार करो। देखते है तुम्हारे पिताजी क्या फैसला लेते है। अभी मैं जा रही हूँ - प्यूनी ने कहा।
पर वह तरीका तो बताते जाओ , जिससे तुम मेरे आभासी रूप को दुबारा मेरे शरीर से जोड़ सकोगी ? - मृदंग ( आभासी ) ने पूछा।
अगर आठ बजे के बाद भी तुम ज़िंदा रहे तो खुद देख लेना। इतना बोलने के बाद प्यूनी उड़ गई।
।।
सुबह के नौ बज रहे है। प्यूनी हॉस्पिटल आयी , मृदंग का आभासी रूप उसका इंतजार कर रहा था।
ओह तुम ज़िंदा हो। इसका मतलब - प्यूनी की बात अधूरी रह गयी।
हाँ इसका मतलब , मेरा शरीर वेंटिलेटर पर नहीं गया। मेरे पिताजी ने डॉक्टर से कहा की उनका बेटा मर जायेगा ठीक है लेकिन उसको वेंटिलेटर पर नहीं डालेंगे - मृदंग ( आभासी ) ने कहा।
मतलब सपनों वाला तरीका काम कर गया - प्यूनी ने कहा।
अब वह तरीका बताओ , जिससे तुम मुझे दुबारा जीवनचक्र में वापस भेजोगी ? - मृदंग ( आभासी ) ने प्यूनी से पूछा।

याद है उस दिन दाजु ने क्या कहा था। तुम्हारे जन्म के समय तुम्हारी माँ कोमा में थी। तो रूनी ने लोरी गा कर तुम्हारे माँ को कोमा से बाहर निकलने में मदद की थी। बस यही तरीका है - प्यूनी ने कहा।
मतलब तुम भी मेरे लिए लोरी गाओगी और मुझे वापस जीवनचक्र में भेज दोगी। पर कैसे ? - मृदंग ( आभासी ) ने पूछा।
उन चार रास्तों के बारे में जानते हो न। योग , संगीत , नृत्य और नशा। इन सभी में बहुत ताकत होती है , औऱ इसमें से मैं संगीत समुदाय की हूँ। तो जैसे - जैसे मेरा संगीत तुम्हारा शरीर और आभासी रूप सुनेगा तुम्हारी दिमागी क्षमता बहत्तर प्रतिशत ( 72 % ) से तीस प्रतिशत ( 30 % ) तक ले आऊँगी। पर एक बात का तुम्हें फैसला लेना होगा , होश में आने के बाद क्या होगा यह कोई नहीं जानता। लेकिन इन चार रास्तों में से एक विद्या को तुम्हें चुनना होगा। क्योंकि होश तो तुम्हें 30% पर ही आ जायेगा। यानी तुम आम इंसान से दिमागी तौर पर अधिक सक्रिय रहोगे , तो इन चार रास्तों में से एक रास्ता को चुन कर तुम शरीर के साथ अपनी दिमागी क्षमता बढ़ाते रहोगे - प्यूनी ने कहा।
यह बोलते वक़्त प्यूनी के आँखों में आँसू थे। और यह आँसू मृदंग के आभासी रूप ने देख लिया था।
तुम रो रही हो - मृदंग ( आभासी ) ने कहा।

अरे नहीं यह तो मैं खुशी में रो रही हूँ। पहली बार एक इंसान से मेरी दोस्ती हुई। और मेरे कारण उसे दुबारा जिंदगी मिलेगी - प्यूनी ने कहा।
मुझे लगता है तुम कोई बात मुझसे छिपा रही हो - मृदंग ( आभासी ) ने कहा।
अरे नहीं मैं कोई बात नहीं छिपा रही हूँ। अब तुम बताओ उन चार रास्तों में से कौन सा रास्ता तुम चुनोगे - प्यूनी ने मृदंग के आभासी रूप से पूछा।।
मैं संगीत को चुनता हूँ । बचपन से ही मुझे संगीत से लगाव रहा है - मृदंग के आभासी रूप ने कहा।
तो ठीक है। आज रात को मैं लोरी गाना शुरू करूँगी , औऱ तुम दुबारा जीवनचक्र में वापस चले जाओगे। और कल सुबह जब तुम्हें होश आ जाएगा मतलब तुम्हारे शरीर को। तो तुम्हें संगीत याद रहेगा केवल - प्यूनी ने कहा।
इतना कहने के बाद वह उस हरे आसमान में उड़ गई।।।।
रात के दस बजे ,,
मृदंग का आभासी रूप , उसका शरीर और प्यूनी बेड नंबर 10 के पास थे। वह बेड के चारों ओर से पर्दा लगा हुआ था।
अपने शरीर के अंदर चले जाओ - प्यूनी ने मृदंग के आभासी रूप से बोली।
मृदंग के आभासी रूप ने वैसा ही किया।
अब मैं लोरी शुरू करूँगी। यह संगीत केवल तुम्हें और तुम्हारे शरीर को सुनाई देगा बाकी किसी को नही - प्यूनी ने कहा।
प्यूनी ने लोरी गाना शुरू की। वैसा संगीत आज तक ही शायद किसी ने सुना होगा। प्यूनी बिना रुके लगातार लोरी गाते रही , और इधर मृदंग के आभासी रूप अपने शरीर से जुड़ता गया ....
सुबह के 5 बजे ,,,,
सिस्टर , सिस्टर , डॉक्टर जल्दी आइए - मृदंग के पिताजी ने चिल्लाते हुए कहा।
क्या हुआ मुकेश जी - वार्ड के सिस्टर ने कहा।
देखिए मेरे बेटे को होश आ गया। देखिए मृदंग ने अपना आँख खोला है - मृदंग के पिताजी ने कहा।
आप जरा बाहर निकलिए। डॉक्टर पूरी तरह से निरक्षण करेंगे। डॉक्टर अभी आ रहे है - सिस्टर ने कहा।
डॉक्टर के आने के बाद मृदंग का पूरा निरक्षण किया गया।
एक घंटे बाद डॉक्टर परीक्षण कर के बाहर निकल कर आये। डॉक्टर ने बताया की सर के पिछले हिस्से पर चोट लगने के कारण मृदंग अपना याददाश्त खो गया है। पर समय के साथ याददास्त वापस आ जायेगी। पहले बॉडी को रिकवर होने दीजिए सही से। फिर उसके दाएं पैर का ऑपरेशन कर के हटा दिया जाएगा , उसके जगह नकली टांगे लगवा दिया जाएगा। आप लोग उससे मिल सकते है , लेकिन ज्यादा बात अभी उससे नहीं करना है। क्योंकि अचानक होश में आना यह एक चमत्कार से कम नहीं है। हम लोग नहीं चाहते है वह दुबारा कोमा में जाये। मौत से लड़कर वापस आ गया आपका बेटा। दो - तीन दिन में इसको यहाँ से डिस्चार्ज कर देंगे अगर रिकवरी सही तरीके से हुआ तो।
इसके बाद मृदंग के माँ , पिताजी अंदर गए अपने बेटे मृदंग से मिलने।
मृदंग अंदर लेटा हुआ था। तभी बेड के नीचे किसी चीज़ पर मृदंग की माँ का नज़र गया।
अरे सिस्टर यहाँ देखिए , इस बेड के नीचे एक छोटी चिड़िया मरी पड़ी है , हटवाए इसको ...
वह मरी हुई छोटी चिड़िया प्यूनी थी।।
।।।।
...
वर्तमान समय ( साल 2050 ) ,,
फिर क्या हुआ ? - ट्यूनी ने दाजु से पूछा।
मृदंग धीरे - धीरे स्वस्थ होते गया। उसको कृत्रिम पैर लगाया गया। एक अच्छा संगीतकार बन चुका है  - दाजु ने कहा।
क्या आपको पहले से पता था की वह बच जाएगा ? - ट्यूनी ने पूछा।
हाँ मुझे उम्मीद थी की वह बच जाएगा - दाजु ने कहा।
पर कैसे ? - ट्यूनी ने पूछा।
क्योंकि वह “शिवांश” था। उसमें शिव का अंश था , इसलिए उसकी इच्छा शक्ति दूसरे इंसानो की तुलना में अधिक थी - दाजु ने कहा।
पर प्यूनी कैसे मर गयी ? - ट्यूनी ने एक और सवाल दाजु से किया।
क्योंकि प्यूनी को पता चल चुका था की मृदंग असल में कोई आम इंसान नहीं , बल्कि इस युग का पहला रक्षक है इस धरती का। और इंसानो को छोड़ कर बाकी जितने भी जीव जन्तु इस धरती पर विचरते है वह सभी मौत का शोक नहीं मानते है , बल्कि मौत का उत्सव मनाते है। और रक्षक को दुबारा जीवनचक्र में भेजने के लिए उसने अपने आप को बलिदान कर दिया। उसने अपने दोस्ती का फर्ज निभायी - दाजु ने बताया।
रक्षक , यह क्या चीज़ है ? - ट्यूनी ने पूछा।
हाँ वह पहला रक्षक है। जब भगवान हनुमान ने मुझे बताएं थे की मैं एक मानव योनि में से किसी को ज्ञान दूँगा तो वह असल में एक शिवांश होगा। और आगे चल कर वह धरती का पहला रक्षक बनेगा - दाजु ने कहा।
मतलब पूरी भविष्यवाणी यह थी। तो आपने मृदंग को पूरी भविष्यवाणी के बारे में क्यों नही बताया - ट्यूनी ने कहा।
अगर मैं उसे पूरी भविष्यवाणी बता देता , तो उसमें घमण्ड आ जाता। और जिसमें घमण्ड आ जाता है , उसकी इच्छा शक्ति कमजोर हो जाती है। अगर उसकी इच्छा शक्ति कमजोर हो जाती तो वह मर भी सकता था - दाजु ने कहा।
तो मृदंग को क्या पता चल चुका है की वह पहला रक्षक है ? - ट्यूनी ने पूछा।
नहीं अभी नही , लेकिन समय आने पर उसे सब याद आ जायेगा। बेहोशी के दौरान उसके साथ जो भी हुआ सब याद आ जायेगा उसे। उसकी दिमागी शक्तियां बढ़ेंगी - दाजु ने कहा।
उसे होश आने पर उसकी याददास्त क्यों चली गयी थी - ट्यूनी ने सवाल किया।
याददास्त जाना जरूरी था। अगर उसे बेहोशी के दौरान जो चीज़े भी हुई उसे होश आते ही याद रहता तो वह पागल हो जाता। धीरे - धीरे उसे सब याद आ ही जायेगा - दाजु ने कहा।
पर कब ? - ट्यूनी के आवाज़ में बेचैनी थी।
जब बाकी के तीन रक्षक का पता चलेगा तब - दाजु ने कहा।
तीन और रक्षक ? - ट्यूनी ने कहा।
हाँ भगवान हनुमान ने कहा था की इस धरती को बचाने के लिए इस युग में चार रक्षक इस धरती पर जन्म लेंगे। जो धरती पर से पाप को कम करेंगे। परजीवी ( एलियन ) हमले से सबकी रक्षा करेंगे। तो उसमें से पहला रक्षक का पता लग चुका है - दाजु ने कहा।
औऱ बाकी तीन का क्या ? - ट्यूनी ने पूछा।
बाकी तीन भी अपने समय के साथ दुनिया की नज़रों में आ जाएंगे। जैसे मृदंग संगीत के रास्ते रक्षक बना है। वैसे ही बाकी तीन रक्षक , बाकी बचे तीन रास्तों पर चल कर आएंगे। योग , नृत्य और नशा - दाजु ने कहा।
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तो यह थी पहले रक्षक की उद्गम ( ओरिजिन ) कहानी। बाकी तीन रक्षक भी आएंगे। और चारों की शक्ति मिल कर महादेव की शक्ति से धरती को बचाने का काम करेगी।।।।।

इस कहानी को पढ़ने के बाद जाहिर सी बात है मन में काफी सवाल उतपन्न होंगे। तो आप अपने सभी सवाल आप मुझे मेल कर सकते है। मेरा मेल id है
ईमेल -dutta.abhilash92@gmail.com
Facebook - dutta.abhilash@facebook.com



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