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@dawriter

निशा तुम डरती क्यों हो??

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सुबह से शाम हो गई निशा को यह सोचते-सोचते की कहना कैसे है? मगर शब्द है कि ज़ुबान से निकलते नहीं। बात कुछ विशेष नहीं है निशा को अपनी सासु माँ से बस कुछ दिनों के लिए मायके जाने की अनुमति लेनी थी। मगर कुछ भी कहने से पहले वो घबरा रही थी। यह पहली बार हुआ हो ऐसा नहीं था। उसकी सास उसे बहुत प्यार करती और वह उनसे अपनी हर बात शेयर कर लेती मगर बात जब मायके की हो उनका रवैया बदल जाता।

पहले तो वह अपने चेहरे पर एक ठंडी उदासीनता लाकर कुछ नहीं बोलती और दूसरे इस बीच ही ससुराल में अनेक आवश्यक काम बताने लग जाती। निशा के ससुराल में फैमिली मेंमबर अधिक तो नहीं थे मगर ननदों और बाकी रिश्तेदारों के उसी शहर में रहने से सभी का आना-जाना लगा रहता। निशा जब अपनी ननदों और बाकी लोगों की खूब आवभगत करती तब तो सास को बहुत अच्छा लगता और वो उससे बहुत खुश रहती। मगर जब कभी वो अपने मायके जाने की इच्छा रखती सासु माँ की अनावश्यक नाराज़गी झेलनी पड़ती।

अपनी जन्म गृह जाने के लिए होने वाली इस कश्मकश में उसकी आत्मा रो उठती। बाद में ठंडे स्वर में अनुमति मिलना मायके जाने की ख़ुशी को आधी कर देता। निशा मायके जाती इस बीच फ़ोन पर भी वो बेमन से ही बात करती अन्य सदस्य भी उसे पराये ही लगते। जब वो वापस आकर फिर से अपनी जिम्मेदारियों में लग जाती सासु माँ के साथ अन्य सभी लोग भी खुश हो जाते।

निशा की ख़ास सहेलियां जो उसकी इस परेशानी को जानती समझती थी वे उससे अक्सर पूछा करती निशा तुम डरती क्यों ही? संकोची निशा के पास कोई जवाब नहीं था। शादी के 13 साल बाद भी निशा इसकी वज़ह नहीं जान पाई की ममतामयी सासु माँ मायका शब्द सुनते ही बदल क्यों जाती हैं? वह खुद भी तो मायके जाती जाती हैं। फिर उसका मायका जाना गलत क्यों है? मायके जाने के लिए निशा का अंतर्द्वन्द अभी भी ज़ारी है?



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