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@dawriter

तेरा ज़िक्र हो रहा है इबादत की तरह

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मेरी नींद रोज़ सुबह अपने आप 6 बजे से पहले खुल जाती है, पुरानी आदत है, पर जब वो चूड़ियों की खनक कानों तक न पहुंचे, जब तक बैड टी लेकर वो पास आकर नही कहती, गुड मॉर्निंग अब उठ जाईए हूजूर, हम बिस्तर नहीं छोड़ा करते। लेटे-लेटे वो शायद पांच या दस मिनट का रोज़ का इंतज़ार अपने आप में बहुत सुखद, जायकेदार होता था, वो भी जानती थी कि मैं जग जाता हूँ क्योंकि मेरी करवटों की आहट उस तक भी पहुंचती. वो अदरक वाली उसकी मुस्कान रुपी चीनी में घुली चाय, इतना काफी होता था मेरा दिन बनाने के लिए, एक परफेक्ट दिन, 10 साल बिना एक भी दिन मिस किये मेरी हर सुबह ऐसे ही होती थी. डॉक्टर के रुप में मेरा जीवन बहुत अस्थायी था पर सुबह निश्चित थी. उसकी मुस्कान के साथ.

23 अक्टूबर 2017 ठीक उसके जाने के एक दिन पहले पूरी रात उसका हाथ अपने हाथो में थामे चाँँद को ताकते बीता क्योंकि वो मुझसे बिछड़ने से पहले ऐसे ही रहना चाहती थी. बालकनी में झूले पर बिल्कुल शांत जैसे धड़कने आपस में बात कर रही थी, लगा कहीं श्रीमती जी सो तो नहीं गयीं, मैं हल्का सा बनावटी खाँसा, तुरंत आवाज आई "जग रही हूँ, और तुम्हें सुन भी रही हो"?

पर मैं तो कुछ कह ही नही रहा.

सुनो मेरा एक काम करोगे,

हाँ बोलो,

तुम शादी कर लेना,

तुम न कुछ भी बोलती हो, मैंने तुनक कर कहा

सोचा था किस्मत कुछ साथ देगी तो, सात जन्मों का साथ होगा, पर मैं तुम्हारा साथ न दे सकी.आंसुओं को संभालते हुए रुंधे गले से बोली

सो जाओ रात बहुत हो गयी है तबीयत और खराब हो जायेगी ऐसे जगते रहने से,

पता नहीं अब कितने घंटों का साथ है तुम्हारा, जग लेने दो हर पल में मुझे, देख लेने दो वो पल भी जहाँ यकीन हो, मुझे कि अब मैं तुम्हारे साथ नही रहूंगी, इतने सालों से तुमको देख कर सिर्फ हँसना जाना है मैंने, और मैं तुम्हें छोड़ कर चली जाऊंगी, मैं तुम्हारे साथ जीना चाहती हूँ, प्लीज मुझे बचा लो. उसकी साँस भरने लगी थी।

मैंने उसे सीने से लगा लिया, उसकी बात का मेरे पास कोई जवाब ही नहीं था, अगर कुछ था तो मेरी भी आँखों के किनारों का गीलापन था फिर न उसने कुछ कहा और न मैंने, उस समय यूँ लगा जैसे दुनिया में सिर्फ हम दोनों ही थे और बाकी सब शून्य था। उस समय मैं उसकी धड़कन पहचान रहा था, क्योंकि उस ही धड़कन के साथ मेरा भी दिल धड़क रहा था, बिछड़ने का दर्द था उसमे, मैंने चुप रहना उस समय बेहतर समझा ...पर कुछ देर बाद उसकी धड़कन बिगडने लगी, तुंरत अस्पताल लेकर गया...पर....

ब्रैस्ट कैंसर था उसे, मैं डॉक्टर होते हुए भी सही समय पे नही जान पाया, और जब पता चला तो बहुत देर हो गयी थी. हर संभव इलाज करवाया, उसकी तकलीफ देखी नही जाती, उसने मेरी खुशी का हमेेेशा ध्यान रखा, मेरी बेड़ टी उसकी हर नये दिन की पहली मंजिल होती थी, मेरी हसीं उसके गुजरे हुए दिन का मुकाम... और मैं......

ख्याल रखिये अपनी पत्नियों का, अपने घर में रहने वाली महिलाओं का, वो आपका ख्याल रखते- रखते अपने आप से दूर हो जाती है.आपके मकान को घर बनाने के लिए अपने शरीर को मशीन बना देती है. 8 में से एक महिला में स्तन कैंसर पाया गया है। इसकी सबसे पहली निशानी होती है स्तन और निप्पल में गांठ महसूस होना, कुछ अजीब से वीर्य बाहर निकलना। इसलिए बहुत ज़रूरी है अपने शरीर में, अपने स्तनों में होते हुए बदलावों का सही समय पर जांच कराएं और इलाज भी। क्योंकि जितनी जल्दी कैंसर के बारे में पता चलेगा उतना जल्दी ही उसका इलाज भी हो पायेगा, और कैंसर से बचाव भी। पुरुषों को भी स्तन कैंसर हो सकता है, इसलिए उनको भी अपने स्तन के आस-पास के हिस्से में हुए किसी भी बदलाव को नज़रंदाज़ नहीं करना चाहिए।

सुहागन थी वो पूरे सोलह श्रृंगार किया गया, वही श्रृंगार जिसमे वो दुनिया की सबसे खूबसूरत लगती थी, उसे देख कर अपनी आँखें मैंने जैसे ही बंद की ऐसा बाँध टूटा उनमे से कि जाने कितने साल के आँसू थे जो रोक के रखे थे, शायद इस ही दिन के लिए। मांग भरते वक्त मै उसे जी भर के निहार लेना चाहता था, पर हो नही पाया, अग्नि देने के समय ऐसा लग रहा था जैसे अपने आप को जला रहा हूँ। सब चले गए मैं वहीँ खड़ा रहा शाम तक घरवालों ने कहा घर चलो, मैने कहा सात जन्म का साथ चाहती थी वो, इस जनम में तो पूरा साथ नही हो पाया कम से कम आंखिरी आँच तक तो साथ दे दूँ.



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