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@dawriter

ठूंठ

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उस बिस्तर के कोने में, एक दिन में न जाने कितनी बार वो अपने पूरे जीवन को याद कर के जी लेती है। कैसे बचपन में पापा की साईकिल सवारी जवानी में पति के साथ बजाज स्कूटर की सवारी में बदल गयी । कैसे जिसे अपने आप को सम्हालना नहीं आता था, माँ बन गयी। दो बच्चों के साथ गर्मी की राते, लाईट चले जाने पर पंखा करने में बीत गई। अपना आधा पेट खा कर उसने अपने बच्चों क़ो पढ़ाया। पढ़ाई में दोनों बच्चे अव्वल। बस यही देख कर उसका मन खुशियों से और तन अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य की कल्पना के गहनो से भर जाता था।

दोनों बच्चों की नौकरी लग गई। शादी के दिन लाल जोड़े में वो इस संसार में सबसे सुंदर बेटी लग रही थी। काल ने उसके पति को उससे छीन लिया। लेकिन वो अपने बच्चों के लिए जीती रही। और फिर बेटे की शादी हुई नौकरी वाली लड़की थी। उसने भी सोचा पढ़ी लिखी है नौकरी करती है तो अच्छा है। वो भी उसे बहुत सम्मान देती। एक साल के अंदर ही उसे दादी और नानी दोनो बनने का सौभाग्य मिल गया। बहु ने नौकरी नहीं छोडी, उसने भी कहा कि मै हूँ न बच्चे के लिए। आखिर दादी हूँ। बाटल का दूध पिलाया, उसके लंगोटो को धोया।

चूकिं बहु कहती माँ आपके पास ज्यादा अच्छे से रहता है। कही सोते सोते दबा न दूँ इसलिए रात को उसी के पास ही सोता। न जाने कितनी रातें जाग कर पहले बेटे के लिए फिर बेटे के बेटे के लिए गुजारी। ऐसे करते हुए बच्चा बड़ा हुआ, मेरी उम्र भी बढ़ गई। कमर भी झुक गयी और काम करने की गति भी कम हो गई। अब सारा काम नहीं हो पाता था इसलिए बहू को ऑफिस से आने के बाद या जाने से पहले करना पड़ता था। धीरे धीरे उसके हर काम मे बहु को कमी नजर आने लगी।

वो माँ से बूढ़ी हो गयी। और अब बच्चे पे भी ध्यान नहीं दे पाती। रोज झगड़ा बहु कभी उसे कुछ कहती कभी बेटे को। थक के एक दिन बेटा पास आया.

"माँ क्या करूँ बता। बीवी को तो नहीं छोड़ सकता। सोच रहा हूँ कुछ दिन तू यहाँ नहीं रहेगी तो उसको महत्व समझ आयेगा तेरा।"

"ठीक है थोड़े दिन बेटी के पास चली जाती हूँ फिर वापस आ जाउंगी" उसने कहा था। "नहीं माँ लड़की के पास कैसे जाओगी, यहाँ पास में एक वृद्ध आश्रम है कुछ दिन के लिए ही। फिर मैं ले आऊंगा"

ठीक है। वो छोड़ने वाला दिन है और आज का दिन आठ महीने हो गए बेटा नहीं आया। पर आयेगा। यूँ तो जब डालियां पेड़ से कट जाती हैं तब वो सूख जाती हैं पर केवल हम माता पिता ऐसे पेड़ है जिनकी डालियां कट कर बढ़ जाती हैं और वो ठूंठ बन जाते हैं।

Image Source: flickr



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