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@dawriter

जिंदगी की परीक्षा

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"जिंदगी की परीक्षा"

मैं रमेश कुमार हूं, मेरा बेटा रोहन 17 वर्ष का है,इस वर्ष उसने 10th की परीक्षा पास की है,इधर रोहन के व्यवहार में कुछ अंतर आ गया है एक हफ्ते पहले की बात है...

रोहन बहुत खुश था,उसके कॉलेज का पहला दिन था और साथ ही पिया जो कि उसकी बचपन की दोस्त थी वो एक महीने बाद कल लौटी वो भी स्कूल में ही मिलेगी,सोच सोच कर रोहन बहुत खुश हो रहा था उसने जल्दी से बैग लगाया आधा अधूरा नाश्ता करके फटाफट स्कूल के लिए निकल गया।मगर जब पिया सामने आई तो वह कुछ चेंज लगी कुछ बदला बदला सा व्यवहार लगा। उसका मूड कुछ उखड़ा-उखड़ा भी था रोहन परेशान हो उठा कि क्या हुआ इसे आखिर पिया उससे गुस्सा क्यों है उसने तो कुछ भी नहीं किया परेशान रोहन ने पिया से बात करने की कोशिश की मगर पिया उठकर चल दी। पिया के जाने के बाद रोहन खड़े-खड़े सोचने लगा कि आखिर क्या हो गया है उसे? रोहन ने क्या-क्या सपने देखे थे, कि पिया मिलेगी ,और रोहन से यहां वहां की तमाम बातें करेगी। वह उसके बेंगलुरु टूर के बारे में पूछेगा तमाम तरह की बातें करेगा... छुट्टियां कैसी गई? यह पूछेगा ! उसके उन एहसासों के बारे में भी जानने की कोशिश करेगा की ...पिया उसके लिए क्या फील करती है? मगर रोहन तो उसके बदले हुए रूप को देखकर ठगा सा रह गया!

उसे यह सब बेहद अजीब लगा रोहन घर लौट आया। उसका मन किसी काम में नहीं लग रहा था वह दिन भर बिना कुछ खाए पिए लेटा रहा अपनी मार्कशीट भी एक तरफ रख दी अच्छे अंको से पास होने की खुशी उसने किसी से नहीं बांटी चुपचाप कमरे में अंधेरा करके लेट गया तभी उसके मैं कमरे में गया मैंने सोचा कमरे में कोई नहीं है...मैं दरवाज़ा बन्द कर पलट ही रहा था कि मुझे रोहन के रोने की आवाज सुनाई पड़ी मैं ठिठक गया और तुरंत दरवाजा खोलकर उसके पास गया मैंने देखा वह रो रहा था उसकी आंखें लाल थी मैंने उससे बहुत कोशिश की पूछने की पर वह कुछ भी नहीं बता रहा था। बड़ी असमंजस की स्थिति थी ...समझ नहीं आ रहा था उसे कैसे हैंडल करूं?

वह कुछ बताना भी नहीं चाहता था और बदहवास होकर रो रहा था! मैंने सोचा उसको बाहर लेकर जाऊंगा और वहां उसके मन की बात निकलवा लूँ

यह तो समझता हूं कि किशोरावस्था में लड़कों को किन समस्याओं से गुजरना पड़ता है किंतु मैं एक पुरुष हूं समझता तो हूं पर समझा नहीं सकता और रोहन की मां भी नहीं है वह तो हमें आज से 7 वर्ष पूर्व ही छोड़ कर चली गई हम दोनों अकेले थे रोहन की मां के चले जाने के बाद से मैंने कभी स्वयं को सिर्फ पिता नहीं समझा उसकी मां ही समझा खुद को मगर इस स्थिति में यदि एकता(मेरी स्वर्गीय पत्नी) होती तो उसे बेहतर संभाल सकती थी फिर, जानबूझ कर अनदेखा करते हुए मैंने रोहन से कहां चलो ..रोहन बेटा! कम ऑन गेट अप!! .. आज हम रात का खाना बाहर खाएंगे और तुम्हारी फेवरेट मूवी देखेंगे !!कितने अच्छे मार्क्स हैं(मार्क्सशीट देखते हुए) "वेलडन बेटा!! पार्टी-शार्टी तो होनी ही चाहिए.. रोहन ज्यादा कुछ नहीं बोला अपने आँसू छिपाकर ...खुद को खुश दिखाने के लिए मुस्कुराता हुआ.. चुपचाप बेड पर से उतरा और तैयार हो गया ..अनमने मन से..!!

हम दोनों बाहर गए उसकी फेवरेट मूवी देखी और आपका फेवरेट खाना खाया और घर वापस आ गए(रास्ते भर वो ज्यादा खुश नहीं लगा) लेटते वक्त मैंने उसे खामोश आंखो से छत की ओर देखते हुए देखा और उससे कहा कि बेटा तुम परेशान हो मगर मुझे नहीं बता रहे। बताओ! हो सकता है, मैं तुम्हारी कुछ मदद कर सकूँ।

यह कह कर मैं चुप हो गया रोहन मेरी तरफ देखने लगा और बोला पापा आप मुझे डाटें नहीं तो आपसे एक बात कहूं मैंने उससे कहा बेटा निसंकोच को कहो जो भी तुम्हारे मन में हो तुम सब कुछ मुझसे शेयर करो जितना संभव होगा मैं तुम्हारी सहायता करूंगा आखिर मैं पापा हूं तुम्हारा !

सुनकर रोहन को थोड़ी तसल्ली हुई उसने बोलना आरंभ किया: पिया के आकर्षण और लगाव से लेकर..उसके वापस लौटने के बाद के चिड़चिड़ेपन और अटपटे व्यवहार तक का पूरा विवरण मुझे बताया। मैं सोच में पड़ गया.. सोचा कि किस प्रकार से रोहन को संभालू।

यह हर किशोर के मन में उठने वाले संवेग होते हैं इसमें गलत और सही को पहचानने की क्षमता उनके अंदर नहीं होती, न हीं निर्णय करने की शक्ति संपन्न होते हैं वह तो अभी बचपन और जवानी की दहलीज पर हैं उन्हें भविष्य ,उचित, अनुचित का ज्ञान नहीं है किंतु ,उसके भोलेपन को देखते हुए (और इस वक्त जब कि उसे मेरी सबसे ज्यादा जरुरत है) समय की मांग को देखते हुए मैंने उसे मित्रवत समझाना उचित समझा।

मैंने कहा ओह्ह तो इसलिए तुम इतना परेशान हो ठीक है,पर यह कोई बड़ी समस्या नहीं है... तुम्हें अच्छा लगे या ना लगे लेकिन हो सकता है पिया किसी और को पसंद करती हो! जरुरी नहीं कि हम जिसे पसंद करें वह भी पलट कर हमें पसंद करे इसलिए बेहतर होगा कि तुम पिया से मिलकर ,उससे बात करो और उसके मन की बात जानने की कोशिश करो। अगर तुम्हें लगता है कि वह तुम में इंटरेस्टेड नहीं है तो उसके पीछे मत पड़ो यह उसका अपना डिसीजन होगा। तुम मेरे अच्छे बेटे हो मुझे पूरा विश्वास है और में चाहता हूँ कि तुम अपनी पढ़ाई आगे जारी रखो मन लगाओ ..मेहनत करो ..पिया से बेहतर लड़कियां तुम्हारी जिंदगी में आएंगी ! बहुत सी खुशियां तुम्हारा इंतज़ार कर रही हैं बेटा!! और रही बात तुम्हारी भावनाओं की तो मैं उन भावनाओ को समझता हूं... मैं भी कभी तुम्हारी उम्र का था जानता हूं कि अपनी भावनाएं दबाना आसान नहीं होता मगर यह इतना मुश्किल भी नहीं है..

इस तरह मैं उसको सपने सीने से लगाऐ समझाता रहा और वह...शून्य में देखता रहा। और ऐसे ही सो गया। मैं अपने जीवन के कड़वे अनुभव के बारे में अपनी बेटे को अवश्य बताया करता था इसके बाद तो जैसे क्रम सा बन गया ..

जीवन में कोई भी समस्या होती.. रोहन मुझसे शेयर करता! मैं उससे बताता कि उसे क्या करना चाहिए और क्या नहीं ? ....तब से आज तक रोहन ने ऐसी कोई भी बात मुझसे नहीं छुपाई चाहे वह उसकी जिंदगी में महत्व रखती हो चाहे नहीं। स्कूल से लौटने से लेकर रात में सोने के पहले तक हम दोनों हमेशा बात करते हैं ...!

एक दिन मैं सो रहा था सुबह उठकर रोहन आया मेरे बेड पर बैठा मेरे माथे पर हाथ रखा.. मैं उठ गया मैं ने आंखें खोली.. सामने देखा तो वो मुस्कुरा रहा था' मैंने उससे कहा 'अरे! आज तुम पहले उठ गए किसने कहा था जल्दी उठने को!! रोहन आज फादर्स डे है पापा! हैप्पी फादर्स डे ..आपने मुझे एक अच्छे पिता एक अच्छे दोस्त एक अच्छी मां.. हर तरीके का सपोर्ट किया है ..! पापा मैं आपको बहुत प्यार करता हूं !! मैं जानता हूं कि आप मुझे हमेशा खुश देखना चाहते हैं। मैं जानता हूं कि आप हर तरह से मेरा साथ देते हैं मेरे लिए..! मेरी खुशी के लिए आपने आज तक दूसरी शादी नहीं की! अपना सारा जीवन सिर्फ मेरे लिए त्याग दिया क्योंकि ...कहकर वह रोने लगा और उसने मेरा हाथ पकड़ कर कहा की.... पापा मैं प्रॉमिस करता हूं कि मैं हमेशा आपको खुश रखूंगा! मैं ऐसा कोई काम नहीं करूंगा जिससे आपको तकलीफ हो !मैं आपकी तरह बनना चाहता हूँ। जिम्मेदार ..प्यार करने वाला... हेल्प करने वाला.. और एक अच्छे इंसान की तरह जीना चाहता हूं पर मेरी निगाह में दुनिया का सबसे अच्छा इंसान मेरे पापा हैं।

अपने बेटे की बातों को सुनकर मुझे इतनी तसल्ली हुई इतनी खुशी हुई..! जिसका वर्णन मैं नहीं कर सकता मुझे लगा की एकता के जाने के बाद आज मैं खुश हुआ हूँ। मैं अपनी संतान की देख रेख के कार्य में सफल हो गया... मेरी परवरिश रंग लाई! मैं जिंदगी की इस सौगात से बहुत खुश था,की आज मेरा बेटा मेरे प्रयासों को समझ गया। और आज ये सब बोल कर जिंदगी की इस परीक्षा मे मुझे सफल बनाया।

-कविता जयन्त श्रीवास्तव



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