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@dawriter

चीनी

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फज्र की नमाज के बाद खाँ साहब गणेशी के चाय की थड़ी पर अखबार पढ़ने बैठ गये। अभी भट्टी गरम होने में कुछ समय था ग्राहक इंतजार से ऊब चले न जाएं इसलिए गणेशी ने टीवी ऑन कर दिया।

समाचार आ रहे थे जवानों से भरी बस में हुआ विस्फोट।

खाँ साहब मुस्कुराये, बगल में बीड़ी फूंकते इलियास की तरफ देखकर मुस्कुराये " खुदा जन्नत बख्शे उनको, काफिरों को मारकर बड़ा नेक काम किया है। "
गणेशी के आँखों में अंगारे दहक उठे, बीड़ी बुझाते इलियास की नजर उसपर पड़ी तो उसने सर झुका लिया।

खाँ साहब रौ में थे कल मग्रिब के बाद मेरी तकरीर सुनी होगी तुमने, उसमें भी मैंने कहा था काफिरों और बुतपरस्तों को दुनिया से मिटाने वाले को जन्नत से नवाजा जाएगा। सालभर से प्रदेश में घूमघूम कर ऐसी तकरीरें कर रहा हूँ। मुझे लग रहा था बेकार मेहनत कर रहा हूं। लेकिन इस खबर को देखने के बाद लग रहा है मेहनत रंग ला रही है।"
इलियास ने मुँह बनाया जैसे किसी ने कुनैन की गोली मुँह में रख दी हो। गणेशी से नजरें चुराते हुए उसने बीड़ी का भुगतान किया और "इहाँ एक टाइम खाने का भरोसा नहीं हैं और जन्नत का कौन सोचे। चलते है ट्रेन का टाइम हो गया है यही तो समय है हम रिक्शावालों के कमाने का" कहकर खड़ा हो गया।
गणेशी ने इलियास को टोका "बन गया है चाय पीते जाओ।"
चाय का घूंट लेते ही इलियास चौंके "अरे चाय में चीनी नहीं दी क्या?"
खाँ साहब ने टीवी से नजरें हटा अपने सामने पड़े गिलास से चाय चखी " अरे इसमें तो बहुत चीनी है एकदम मीठा से जहर बन गया है। "
गणेशी चीनी के डब्बे पर नजर दौड़ाए "अरे दो गिलास में पाँच चम्मच डाले थे, लगता है सब एक में ही डाल दिए। "

तभी एक दस बारह साल का लड़का बदहवास सा दौड़ता हुआ आया "अब्बू अब्बू वो लोग जन्नत आपा को उठाकर ले गये। "
उन्होंने बच्चे का कंधा पकड़कर झंझोड़ा "कौन लोग?"
लड़का हाँफते हुए बोला "वही जो अक्सर रात को आपसे तकरीरें करने आते थे। "

Kumar Gourav



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