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@dawriter

क्यूटिया

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झाँसी चढ़ने के बाद बैग जमाते हुए जब पानी की बोतल बर्थ पर रखी तो एक महीन सी आवाज उभरी "अंकल पानी ले सकता हूं।"
पलटकर देखा तो एक तेरह चौदह साल का किशोर बालक था । अभी बोतल की सील भी नहीं खोली थी लेकिन बालक इतना क्यूट था कि मना नहीं कर पाया ।
जबतक उसने पानी पीया मैं भी सामान व्यवस्थित कर उसके बगल में बैठ चुका था । बोतल वापस करते हुए उसने अपनी कहानी शुरू की " कानपुर घर है । ग्वालियर गया था नानी  के पास। टिकट कटा के नाना सौ का नोट दिये थे खाते पीते चले जाना । खाना वाना नानी दे दी है पैक करके । "
मैंने पानी की बोतल को बगल में डालते हुए चुटकी ली "नानी पानी नहीं दी ?"
बालक मुस्कुराया " आप बड़े लोगों की यही प्रॉब्लम है पूरी बात सुनते समझते नहीं हो और लगते हो ज्ञान देने।"


बालक इतनी अदा से झुंझलाया कि मुझे भी मुस्कुराना पड़ा " चल बता दे पूरी बात ।"
वह तफ्सील में गया " ज्योंही गाड़ी खुली एक किन्नी आ गया , एकदम टीप टॉप हिरोइन जैसा। वह तो उसने ताली बजायी तब समझ में आया किन्नी है । फिर आकर उसने मेरे सामने आंचल फैला दिया आज पहली बार अकेले निकली हूं कुछ दे दे । मैंने आगे बढ़ो कहा तो रोआंसी हो गई , बोहनी खराब मत कर दस रूपये तो दे ही सकता है । "

उसने रूककर फिर से बोतल उठा लिया । दो घूंट के पश्चात् फिर उसने साँस संयत किया " मैंने सौ का नोट निकालकर दिखाया । खुल्ले नहीं हैं और इतना ही है। मेरी बलाएं लेते हुई दुआएँ देने लगी । भरोसा हो तो यही दे दे । खुल्ले मिलते ही दस काटकर वापस कर दूंगी । "

इतना कहकर वह चुप हो गया । मैंने उसकि चुप्पी का मतलब सही समझा "और तूने दे दिया। अब यही पानी पीते पीते पहुंच जाना कानपुर "  , मैंने पानी की बोतल उसकी गोद में रख दी ।

लड़का मायूस था " वो किन्नी इतनी क्यूट थी की मैं मना नहीं कर पाया । "
फिर मेरा फोन आ गया और मैं व्यस्त हो गया ।

तभी ट्रॉली घसीटती महिला बर्थ ढूंढती पहुंची "ऐ.. हटो ये मेरी बर्थ है । "
लड़का खिड़की से हटने लगा तो मैंने वकालत की "रहने दो आंटी बच्चा है । थोड़ी देर में उतर जाएगा । "  लेकिन बालक खुद ही उठकर मेरी बगल में आकर बैठ गया ।
मुरझाया सा बालक थोड़ी देर में आंटी को भी खलने लगा। उन्होंने  कपकेक निकाला और बालक की तरफ बढ़ाया "लो खाओ बेटा ।"
बालक ने न में सिर हिला दिया। झेंपी सी आंटी ने वही केक मुझे आफर किया । तो मैंने बालक के सर के बाल बिखरा दिये "अरे खाले क्यूटनेस देखने के चक्कर में तेरी क्यूटनेस मारी जा रही है। "
बालक ने झुंझलाते हुए सर हटा लिया । 
आंटी ने दिलचस्पी दिखाई "कुछ हुआ है क्या ? "

उसने कातर दृष्टि से मेरी तरफ देखा । मैंने आँखों ही आँखों में भरोसा दिलाया कि उसका मजाक नहीं उड़ाएंगे " नहीं कुछ नहीं आंटी, वो दूसरी बात है। 
तभी उसने राहदरी में कुछ देखा और फिर मेरी बाँह झँझोड़ी "ये वही है इधर ही आ रही है। "

मैं कोई प्रतिक्रिया करता तबतक वह सामने आकर खड़ी हो गई । एकदम तराशा हुआ बदन, बिल्लौरी आँखें , सस्ते से क्रीम पाउडर में भी वह, किसी भी मनचले के होंठ गोल कर देने की क्षमता रखती थी ।

उसने आकर बालक के सामने आंचल फैला दिया " ले मैं उधार नहीं रखती। तुझे जितने वापस चाहिए ले ले । "

बालक मेरी तरफ देखकर मुस्कुराया । लेकिन नोटों का ढ़ेर देख असमंजस में पड़ गया । कुछ देर असमंजस में रहा तब उसने खुद ही मुट्ठी भर नोट उठाकर बालक की जेब में ठूंस दिये ।

वह आंचल समेटकर दुआएं देती चली तो गई। लेकिन बालक मेरी तरफ देख  कुटिल मुस्कान देता हुआ आंटी से संबोधित हुआ " कुछ लोग इतने क्यूट होते हैं कि खुद के पाजामे में एक दिन गांठ पर जाए तो जमाने भर को लुंगी पहनने की सलाह देते फिरते हैं।"

उसकी मुस्कान इतनी चुभी कि मन किया थप्पड़ जड़ दूं लेकिन इस बीच आंटी ने उसकी ठुड्ढी पकड़ कर हिला  दिया " कुछ तेरे जितने क्यूट भी होते हैं जिसपर सबका दिल आ जाता है। "



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