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@dawriter

कमाई

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sunita by  
sunita

"हरामजादी, कुतिया कहां से लायी थी पैसा ", बता शराब के नशे में थुत्त रविन्द्र अपनी पत्नी को गन्दी गन्दी गालियां दे रहा था।
"जब खा पी कर उड़ा दिए एेश में, तब नहीं पूछा कहां से आये तेरे पास नोट!! "अपमान और डर से रवीना गिडगिडाते हुए बोली।
"जा साली तू ही देनदारों से निपट मै जा रहा हूं ", कहते वो पीछे के दरवाजे से निकल गया। ड्रांइगरूम में बैठे लेनदार सबकुछ सुन चुके थे।
रवीना ड्रांइगरूम में आकर बोली मै आपकी सारी रकम चुका दुंगी कुछ वक्त दे दो, हम कुछ नहीं जानते तुम्हे एक सप्ताह की मोहलत दे रहे हैं हमारी रकम ब्याज समेत चुका देना धड़धड़ाते हुए वहां सब निकल गये।

रवीना बेबसी रोने लगी और कर भी क्या सकती थी उस घड़ी को कोसने लगी जब उसने ब्याज पर रकम ली अपनी पड़ोसन के कहने पर। शराबी पति चारों तरफ करजे में डूबा था अब वो भी उसी में फंस गयी। सोचा था इन पैसों गाड़ी की किस्त चुका देंगे फिर जो आमदनी होगी उससे ब्याज देते रहेंगे।
हाय री किस्मत इस शराबी ने उसे कही की न छोडा गाड़ी की किस्त भरने के बजाय उस रकम से उसे बिना बताये दूसरी गाड़ी ले आया। ज्यादी कमाई के लालच में कर्ज के दलदल में दोनो घिर गये।

रोते रोते पूरा सप्ताह बीत गया रवीना का सुंदर चेहरा मुरझा गया जहां भी मदद मांगने गयी दुत्कार ही मिली। कही से भी पैसों का इन्तजाम न हो सका खाने तक के लाले पड़ गये।

पडोसन ने रवीना के बुरे हालात देख के कहा

वह उसे कुछ लोगों से मिलवा देगी जो उसे काम करवाने के बदले अच्छी खासी रकम दे देंगे। मजबूर रवीना क्या करती चल पड़ी उसके साथ वह उसे ऐसी जगह ले गयी जो उसने पहले कभी न देखी थी अजीब किस्म के लोग सब उसे घुर रहे थे।

एक आदमी जिसने अपना चेहरा छिपाया हुआ था उससे बोला यह कुछ पैसे हैं जो तुम्हे इस पते पर पहुचाने हैं अगर तुमने इसे बिना किसी रूकावट के सही जगह पहुंचा दिया तो यह नोट तुम्हारी कमाई होगें। रवीना ने देखा दो दो हजार के नये नये रूपये थे उसने सोचा अगर वह पैकेट पहुंचा दे तो उसके कर्जदारों का मुंह बंद हो जायेगा लेकिन इसमें है क्या ? उन लोगो का रूख देख उसकी पूछने हिम्मत नहीं हुई।

‎रवीना को न जाने क्यों कुछ अच्छा न लगा उसने कहा वह सोच के बतायेगी यह काम करेगी की नहीं| ठीक है कल बता देना वरना हम किसी और से करवा लेंगे।
‎रात भर रवीना सो न सकी।
‎सुबह चीख पुकार मची थी पड़ोसन चिल्ला रही थी, लेनदार भी खड़े थे कि उनका पैसा मिलेगा दरवाजा जो खुला ही था अन्दर पंखे पर रवीना की लाश टंगी थी।

‎लेनदारों के मुंह लटक गये उसके आदमी का अता पता नहीं था। तीनों आपस में लड़ने लगे। किसी के भी कहने से रूपया ब्याज पर देने जरूरत नहीं कमाई हो या न हो।

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सुनीता शर्मा खत्री



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