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@dawriter

इन प्रतिकूल हवाओं में

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sunilakash by  
sunilakash

💐 प्रतिकूल हवाओं में 💐

सच की नौका चलेगी कैसे,
इन प्रतिकूल हवाओं में।
प्रत्येक स्थान पर झूठ सुशोभित,
छोटी-बड़ी सभाओं में॥

आज सत्य का कामकाज सब,
ढीठ या स्पष्टवादी करते हैं।
दूसरों का सच कहने के साहसी,
स्वयंमेव को सत्यवादी कहते हैं॥
उनका सच यदि आप कहो तो,
बल रखना निजी भुजाओं में।
सच की नौका चलेगी कैसे,
इन प्रतिकूल हवाओं में॥1॥

आप जो सच के बने समर्थक,
वे आलोचक बन जायेंगे।
आपकी बातों को छानेंगे,
एक-एक टुकड़े का अर्थ लगायेंगे॥
आपकी हालत वह कर देंगे,
ज्यों खलनायक मिले कथाओं में।
सच की नौका चलेगी कैसे,
इन प्रतिकूल हवाओं में॥2॥

आज आप यदि बने युधिष्ठिर,
होगी पुन:-पुन: पुनरावृत्ति।
'अश्वत्थामा हतो-नरो कुँजरो'
वही पुरानी लेकर उक्ति॥
पांडव नहीं कौरव करेंगे शोषण,
आपका नित छलनाओ में।
सच की नौका चलेगी कैसे,
इन प्रतिकूल हवाओं में॥3॥

आज सच की राह पे चलना,
तलवार की धार पे चलना है।
सच के साथी मूकदर्शक हैं,
कोई सहयोग न मिलना है॥
वह दिन दूर नहीं जब सच को
छिपना पड़े कहीँ गुफाओं में।
सच की नौका चलेगी कैसे,
इन प्रतिकूल हवाओं में॥4॥

---सुनील आकाश



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