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@dawriter

आसमान तो दो

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पंख तो दे दिये मुझे,पर उड़ने को आसमान तो दो
जहां जी संकू मै चैन से,मुझको वो जहान् तो दो
एक शरीर नहीं मै केवल,मुझमे भी जां बसती है
मै नही खिलौना केवल,मुझको एक नई पहचान तो दो
मत मानो देवी मुझे,झूठा महिमामडंन करो नही
जी सकूं खुल कर के बस मै,मुझे इतना सम्मान तो दो
हर ओर है बैठे बाज निर्दयी,हर पल मुझे डराने को
जिस पे करूं भरोसा मै,ऐसा कोई इंसान तो हो
नहीं मांगती हीरा मोती ना दौलत की ख्वाहिश है
जिस पर केवल मेरा हक हो,ऐसा कोई अरमान तो दो
क्यों खुद को रोकूं हर पल,क्यों घुट घुट कर जीना मुझे
नारी होने का गर्व कर सकूं ऐसा कोई एहसास तो दो।।



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