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मानव श्रेष्ठ

Rajeev Pundir   251 views   1 week ago

अक्सर हमें यही उपदेश दिया जाता है कि पृथ्वी पर पाए जाने वाली सभी योनियों में मानव योनी सर्वश्रेष्ठ है I लेकिन क्या ये सही है ? शायद नहीं I हर एक जीव जंतु पशु पक्षी अपने में सम्पूर्ण है I अस्तित्व की इस लड़ाई में वो किसी को हरा भी सकता है और किसी से हार भी सकता है I

तू धूप है छम्म से बिखर

Pallavi Vinod   955 views   2 weeks ago

अपनी जवान होती बेटी को आधुनिकता के भटकाव से एक माँ ही निकाल सकती है।

पश्चाताप की ज्वाला

sunita   1.07K views   3 weeks ago

" ‎अरे!! यह तो बिल्कुल तुम्हारी तरह लगता है रीया तुम भी बचपन में ऐसी ही थी , माँ को दिखाते हुए बोली ! है न रीया जैसा " !

मैं नहीं भेजूगी अपनी बेटी को ससुराल..

Kalpana Jain   162 views   3 weeks ago

एक माँ की अपनी बेटी की जुदाई के दर्द की दास्तान है।

चीनी

kumarg   823 views   1 month ago

चीनी फज्र की नमाज के बाद खाँ साहब गणेशी के चाय की थड़ी पर अखबार पढ़ने बैठ गये। अभी भट्टी गरम होने में कुछ समय था ग्राहक इंतजार से ऊब चले न जाएं इसलिए गणेशी ने टीवी ऑन कर दिया। समाचार आ रहे थे जवानों से भरी बस में हुआ विस्फोट।

बाबुल की दुआएँ लेती जा

Maneesha Gautam   685 views   1 month ago

भूगोल तुमने पढा़ दुनिया को समझने के लिए, कौन सा देश कहाँ है किसकी क्या वास्तु स्थिति है,  हो सकता है तुम्हे अपने नये घर का भूगोल पंसद ना आये पर सांइस का जडत्व का नियम हमेशा याद रखना

तेरा ज़िक्र हो रहा है इबादत की तरह

Maneesha Gautam   1.40K views   1 month ago

ख्याल रखिये अपनी पत्नियों का, अपने घर में रहने वाली महिलाओं का, वो आपका ख्याल रखते- रखते अपने आप से दूर हो जाती है. आपके मकान को घर बनाने के लिए अपने शरीर को मशीन बना देती है

दुनिया इतनी भी बुरी नहीं है

poojaomdhoundiyal   241 views   1 month ago

दुनिया जैसी देखती है या खुद को जैसा दिखती है वैसी है नहीं। जीवन और उसकी सच्चाई के कई पहलू हैं।

मनमर्ज़ी

Kavita Nagar   1.64K views   1 month ago

ये अचानक से रजनीश और उसकी बहू को घर छोड़कर क्यों जाना पड़ा, ऐसी भी क्या बात हुई।

रूहानी मोहब्बत

kavita   1.40K views   2 months ago

प्यार के एहसास और त्याग के विचार के बीच मे फंसी एक युवती की कहानी

क्या आपके घर में भी कोई सौम्या है...???

rita1234   1.44K views   2 months ago

हमारे समाज में हम अपनी बेटियों को चाहें कितना भी पढ़ा लें हमारी बेटिया चाहें कितनी भी गुणी और सुसंस्कृत हों उनकी शादी देखते समय हम खुद को बहुत कम समझने लगते है...यह एक बहुत बड़ी विडंबना है जो आज भी देश के कई भागों में विशेष रूप से मध्यम वर्गीय समाज में प्रचलित है।

वो तेरह दिन

kavita   1.76K views   2 months ago

पत्नी की असामयिक मृत्यु के बाद, एक पति के विरह और ग्लानि का विवरण

चिट्ठी - दादाजी के नाम

abhi92dutta   660 views   2 months ago

यह चिट्ठी 2016 मैं अपने दादाजी के जन्मदिवस पर उनके याद में लिखा था । एक दिन में लिखने के कारण इसमें वर्तनी सम्बंधित काफी अशुद्धियाँ है । लेकिन मैं उन अशुद्धियाँ नहीं हटाना चाहता हूँ । मेरे लिए यह चिट्ठी कोई रचना नही थी , यह मेरे जज्बात है । और जज्बातों में कोई सुधार की आवश्यकता नहीं होती है

सुकून की तलाश

Kavita Nagar   865 views   2 months ago

कैसे पकंज को अपनों से अलग होते ही संसार की वास्तविकता समझ आई, और अपनी भूल का एहसास हुआ।

कमाई

sunita   1.37K views   2 months ago

रवीना बेबसी रोने लगी और कर भी क्या सकती थी उस घडी को कोसने लगी जब उसने ब्याज पर रकम ली अपनी पड़ोसन के कहने पर। शराबी पति चारों तरफ करजे में डूबा था अब वो भी उसी में फंस गयी। सोचा था इन पैसों गाड़ी की किस्त चुका देंगे फिर जो आमदनी होगी उससे ब्याज देते रहेंगे।