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जो हम फेंक देते हैं उसी का ना मिलना इनकी जान ले लेता है

dhirajjha123   58 views   9 months ago

आज माँ के हाथ का खाना खाने का मन नहीं कर रहा तो चलो बाहर चलते हैं दोस्तों के साथ । होटल में बैठ कर शाही पनीर चिली चिकेन बटर नान ये वो लटरम पटराम मंगाया जीतना मन उतना खाया बाकि का छोड़ कर डकार ली और चल दिए । कभी कभी तो गुस्से में थाली उठा कर फेंक दी ।

मैं_भिखारी_हूँ‬…

dhirajjha123   11 views   9 months ago

जो मैं लिखने जा रहा हूँ वो वही पढ़ें जिन्हे शब्द पीड़ा महसूस करनी आती है…

​एक कदम….

dhirajjha123   7 views   9 months ago

फैसले बुरे हैं थोपे गए हैं इंसान मर रहे हैं कुछ शोर कर रहे हैं कुछ की दास्तान है रूलाने वाली आखों में सबके पानी

मुसीबत का नाम है जिंदगी

harish999   40 views   9 months ago

जिंदगी मुसीबतों से निकलकर निखरती, मुस्कराती है. इसलिए हंसते-मुस्कराते हुए खुद को तैयार करते रहिए आने वाली मुसीबतों से लड़ने के लिए.

Murdered by others

jhalak   8 views   9 months ago

Sometime force marriage social abuse acid attack..woman is hunted ....

झूठी कहानी

dhirajjha123   12 views   9 months ago

यह महज़ कहानी ही है मैं सच भी कहूँगा तब पर भी कहानी ही रहेगी । पर इस कहानी पर ऊँगली ना उठाऐं क्योंकी सच में तो ये प्रेम मरता जा रहा है कम से कम कहानियों में तो अल्लाह और महादेव का प्रेम बना रहे

"डर"

dhirajjha123   0 views   9 months ago

क्या तुम जानते हो सबसे बहादुर होता है ये डर हाँ मैं सच कह रहा हूँ

A Fearless Girl...

khyati   17 views   9 months ago

It is a small write up on a girl who is brave, who has fought to carve a niche for herself. this is exemplary and praiseworthy.

पापा के नाम एक और चिट्टठी

dhirajjha123   38 views   9 months ago

पापा आपके लिए चिट्ठी है, कितने दिनों से नही लिखी थी ना । पढ़िएगा ज़रूर और आशीर्वाद दीजिएगा अपने नालायक बेटे को ।

अच्छी माँ बन जाऊं

dhirajjha123   3 views   9 months ago

एक पिता जब माँ बनता है तब एक पुरुष अपनी विपरीत दिशा में चलता है

​क्या तुम जानते हो

dhirajjha123   4 views   9 months ago

क्या तुम जानते हो गुलामी किसको कहते हैं ?

भीड़ के अलग अलग चेहरे

dhirajjha123   6 views   9 months ago

“हाँ हाँ महराज जाइए ना हम कहाँ रोक रहे हैं । मगर एक बात कह दें आप जईसा लोक सब के चलते देस पिछड़ा है । लालच है ना जो वो देस की जनता के मन से जब तक नहीं जाएगा देस का भला संभब नहीं है महराज ।”

​लाश हो जाना ही अच्छा है

dhirajjha123   11 views   9 months ago

मरघट में धू धू कर जलती लाशें जलते हुए भी मुस्कुरा रही थीं जाते जाते ज़िंदा लोगों को उनके मरे होने का अहसास करा रही थीं

बेचारा नहीं हूँ

dhirajjha123   1 views   9 months ago

मैं कोई आवारा नहीं हूँ तरस मत खाओ मुझ पर

Suicide

akshay khodpatil   11 views   9 months ago

For that guys who do suicide because of one girl left.