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चुभन

suneel   150 views   9 months ago

आदतन हिकारत से उठी शारदा की नजरें उस महिला के कपड़ो पर गयी। अलग अलग कतरनों को गाँठ बाँध कर बनायी गयी उसकी साड़ी उसके युवा शरीर को ढँकने का असफल प्रयास कर रही थी।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ… उसके बाद क्या????

Mona Kapoor   43 views   7 months ago

बेटी को बचाकर व उसे पढ़ाना ही केवल आवश्यक नही है उसे समाज में एक ऊँचा दर्जा देना भी अति आवश्यक है।

​एक कदम….

dhirajjha123   8 views   1 year ago

फैसले बुरे हैं थोपे गए हैं इंसान मर रहे हैं कुछ शोर कर रहे हैं कुछ की दास्तान है रूलाने वाली आखों में सबके पानी

मासिकधर्म या कुरीति

nis1985   1.49K views   6 months ago

शर्म की वजह से ही आज ग्रमीण या सामान्य महिलायें भी न तो इस विषय पर खुलकर बोल पाती और जागरूकता की कमी की वजह से ही उन तक मासिकधर्म से सम्बंधित कई महत्त्वपूर्ण जानकारी नहीं पहुँच पाती और न ही वो【 पेड 】इस्तेमाल की कोई जानकारी रखती हैं

हादसा

swa   66 views   1 year ago

वास्तविक घटना को कहानी का रूप देने की कोशिश की है ड्राइव करते समय सतर्कता बरतें।

उसे पढ़ना है

poojaomdhoundiyal   12 views   1 year ago

जहाँ हम शिक्षा में अंकों और प्रतिस्पर्धा की बहस में लगे हुए हैं वहीँ कुछ मासूम ऐसे भी हैं जो पढ़ना चाहते हुए भी नहीं पढ़ पा रहे हैं। शिक्षा ही एकमात्र ऐसा अचूक बाण है जो हर बुराई हर नफरत हर भ्रष्टाचार, आतंकवाद ,हर असमानता , हिंसा या अमानवता को समाप्त कर सकती है।

भूखें मरते हम

utkrishtshukla   58 views   1 year ago

दुनिया भर में जितना भोजन बनता है, उसका एक तिहाई भोजन बर्बाद हो जाता है।

नारी शक्ति

kavita   131 views   5 months ago

स्त्री के विविध रूप और दायित्वों की एक झलक, जिनमे स्त्री के व्यक्तित्व की सार्थक प्रस्तुति की गई है

बेचारा नहीं हूँ

dhirajjha123   2 views   1 year ago

मैं कोई आवारा नहीं हूँ तरस मत खाओ मुझ पर

કાળા ના ધોળા

pravinakadkia   109 views   8 months ago

પૈસા કમાવા માટે ખોટો રસ્તો ન અપનાવવો એ સમજાવતી એક વાર્તા.

माँ मुझे आना है .....

nehabhardwaj123   21 views   10 months ago

एक अजन्मी बच्ची की भावनाएं , जिसे एक लड़की होने के कारण जन्म नहीं लेने दिया गया ....।

" एक उलझी सी पहेली "

Neha Neh   178 views   9 months ago

एक खूबसूरत सी कहानी जो जरूर आपको कुछ सीखा कर जायेगी।

इंसानी जिद में दफन हो गए पेड़

harish999   22 views   1 year ago

आज महानगरों में सांस लेने के लिए शुद्ध हवा तक मयस्सर नहीं है, कंक्रीट के जंगलों के लिए पेड़ों को दफन करके हाउसिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी और हाइवे के चौड़ीकरण के लिए पेड़ों को कटान के चलते पर्यावरण संतुलन गड़बड़ा गया है

रंग

sonikedia12   15 views   1 year ago

मनुष्यों का नाम बदल दो करे ये सबको बदनाम ।

बच्चों का पेट पालने के लिए पुरुषों का काम करती महिलाएं

Anonymous
  53 views   10 months ago

किस प्रकार एक औरत अपने बच्चों के लिए कुछ ‌‌भी‌‌ कर ‌सकने ‌को ‌सदैव‌ तैयार ‌रहती है।